कार्रवाई और कार्यवाही (व्यंग्य)

पहले कार्रवाई हो चुकी हो या निपटाई जा चुकी हो तब भी दोबारा कार्रवाई की जा सकती है। पिछली कार्रवाई स्वत निरस्त हो जाती है। अगर कागज़ पर लिखे पत्र भेजे जाएं और महत्त्वपूर्ण शब्दों और लाइनों पर पीला, लाल या पसंद का रंग हाई लाइनर के रूप में प्रयोग किया जाए तो कई बातें रंग बदल लेती हैं।
नकली बुद्धि पूरे विश्व में नैसर्गिक बुद्धि पर कब्ज़ा करती जा रही है। इधर दुनिया और समाज के समझदार, ख़ास लोग आम लोगों को चौकन्ना भी करते जा रहे हैं कि एआई यानी कृत्रिम बुद्धि पर ज्यादा विशवास न करें क्यूंकि यह भी गलती कर सकती है। लेकिन नकली बुद्धि ने यह बिलकुल सही बताया कि समाज या दफ्तर में अनुशासन बनाए रखने लिए नियमों के पालन के लिए, गलत काम करने वालों को सजा देकर अपराध रोकने के लिए और आम जनता की सुरक्षा और व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए कई किस्म की ज़रूरी कार्रवाई की जाती है।
मजेदार यह है कि कितनी ही परिस्थितियों में कार्रवाई की जगह सिर्फ कार्यवाही ही की जाती है क्यूंकि कार्रवाई मुश्किल काम होता है और कार्यवाही आसान। हमारे यहां कार्यवाही यानी कामकाज और विचार विमर्श बहुत मेहनत, समयबद्ध तरीके से नियमानुसार और संवैधानिक आधार पर होता है जिसमें गलती की गुंजाईश काफी कम होती है। अगर गलती होती है तो प्राकृतिक कारणों से ही हुआ करती है, जैसे बरसात के मौसम में पानी का, बादलों की गलती से ज्यादा बरसना। कार्यवाही, बेचारी समझे जानी वाली कागजी चीज़ होती है, जिसके बारे ज्यादा बात क्या करनी।
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कार्रवाई यानी किसी नियम, अनुशासन तोड़ने, गैर कानूनी काम करने वाले के खिलाफ सज़ा देने के लिए सख्त यानी कठोर प्रक्रिया अपनाना। जैसे पुलिस अपराधियों के खिलाफ हमेशा सख्त कदम उठाती है। वह बात अलग है कि कार्रवाई के दौरान जाति व्यवस्था, ऊंच नीच, शिक्षा अशिक्षा, अमीरी गरीबी, सामंती समाज को भी ससम्मान प्रवेश कराया जाता है। यह हमारे समाज के स्वादिष्ट मसाले हैं।
पहले कार्रवाई हो चुकी हो या निपटाई जा चुकी हो तब भी दोबारा कार्रवाई की जा सकती है। पिछली कार्रवाई स्वत निरस्त हो जाती है। अगर कागज़ पर लिखे पत्र भेजे जाएं और महत्त्वपूर्ण शब्दों और लाइनों पर पीला, लाल या पसंद का रंग हाई लाइनर के रूप में प्रयोग किया जाए तो कई बातें रंग बदल लेती हैं। कार्रवाई पूरे इत्मीनान से होनी चाहिए नहीं तो पानी के बिना सिर्फ दूध की कॉफ़ी बन जाती है। कार्रवाई करना छोटा नहीं मोटा काम होता है। तस्सलीबख्स बाल काटने जैसा सतर्कता और ज़िम्मेदारी भरा काम होता है।
कार्रवाई के दौरान जांच किए गए प्रमाण और कागजात बार बार कई कोनों से देखने परखने जांचने पड़ते हैं तभी तो बाद में पाया जाता है कि जिस गाडी को ट्रक के रूप जांच लिया गया वह वास्तव में टू व्ह्लिर्स या थ्री व्हीलर हो सकता है। कार्रवाई पूरी तरह से व्यवस्थित करनी पड़ती है ताकि कई नाक कटने से बच जाएं क्यूंकि नाक की मरम्मत पर अथाह खर्च होता है। हालांकि राजनीतिक परम्परा के अनुसार कार्रवाई के दौरान आपदा में अवसर भी खोजे जा सकते हैं फिर भी असली नैसर्गिक बुद्धिमत्ता इसी में है कि कार्रवाई को कार्यवाही न समझा जाए।
- संतोष उत्सुक
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