प्यार का इज़हार (व्यंग्य)

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संतोष उत्सुक । Jan 17 2024 5:27PM

प्यार का पहला खत लिखने में भी, वक़्त तो लगता है। अब तो हमारे यहां भी काफी बदलाव आए हैं, प्यार की बातें लड़खड़ा रही हैं। नफरत करते हुए भी नहीं सोचा जाता। यहां इस तरह के सर्वे करवाने बारे सोच भी नहीं सकते।

आज फिर से लिखना पडेगा कि विदेशियों के अनूठे सर्वे हैरान कर देते हैं। पता नहीं उनके पास कितना समय है जो ऐसे ऐसे सर्वे करते रहते हैं। जिन चीज़ों बारे में दुनिया पहले से जानती है उनके बारे ही सर्वे करते रहते हैं। गज़ब शैली है इनकी। प्यार के बारे में कहा जाता है कि कब, कहां, किससे, किस स्थिति में हो जाए पता नहीं, कह नहीं सकते। कितनी बार प्यार का इज़हार करना इतना मुश्किल हो जाता है कि ज़िंदगी तमाम हो जाती है और यह काम रह जाता है। ऐसा भी होता है कि पहली नज़र में प्यार हो जाता है पहली ही नज़र में प्यार और बंदा बेकरार हुआ जाता है। खैर... 

उधर प्यार के ख़ास विशेषज्ञ, स्कॉटलैंड के विश्वविद्यालय के सर्वे करने वालों के मुताबिक, नए रिश्ते में प्यार का इज़हार करने में 107 दिन लग जाते हैं। क्या कहने अंग्रेज़ी सलीके के। दिलचस्प यह है कि वहां की महिलाओं में भी शर्म का नैसर्गिक भाव है। वे प्यार का इज़हार, पहले नहीं करती। मजेदार यह है कि सर्वे करवाने और करने वालों ने इतने ज़रूरी विषय पर, सर्वे करने के लिए अपने देश ही नहीं छ और देशों के सिर्फ तीन हज़ार युवाओं को सर्वे का हिस्सा बनाया और नए स्वाद का परिणाम पेश कर दिया।

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कोई यह सर्वे पसंद करे या नहीं एक बात ज़रूर फिर से पता चली कि स्कॉटलैंड के वासी जो भी करते हैं पूरे आराम और तन्मयता से करते हैं। उनके लिए एक दूसरे की सोहबत, खाना पीना, घूमना फिरना, ज़िंदगी में दूसरे काफी कामों से ऊपर है। तन का मिलन या विवाह, वहां इंसानों रिश्तों में कभी रोक टोक नहीं बना। साथी को अच्छी तरह से आंक लिया तो प्यार का इज़हार कर दिया, विवाह कर लिया। वह बात अलग है कि यह सर्वे पश्चिमी समाज पर एक व्यंग्य सा लगता है। 

प्यार का पहला खत लिखने में भी, वक़्त तो लगता है। अब तो हमारे यहां भी काफी बदलाव आए हैं, प्यार की बातें लड़खड़ा रही हैं। नफरत करते हुए भी नहीं सोचा जाता। यहां इस तरह के सर्वे करवाने बारे सोच भी नहीं सकते। लड़की उपहारों पर रीझ जाए तो प्यार का इज़हार और इकरार मान लिया जाता है। शादी के पुल तक पहुंचते पहुंचते, महंगे उपहारों के मील पत्थर आते रहते हैं। यदि कोई और आकर्षक समृद्ध मंज़िल दिख जाए तो इज़हार उस तरफ मुड़ जाता है। इज़हार व्यावसायिक और व्यवहारिक हो जाता है। सिर्फ प्यार मुहब्बत से ज़िंदगी नहीं चलती। प्यार के इज़हार में समय लगे न लगे, प्यार के व्यापार में समझदारी भरा समय लगता है। 

पहले विवाह होता था फिर प्यार करते, होते न होते, समझौता रचते रचते समय लगता था। इज़हार न भी हो तब भी कई दशक साथ रह लेते थे। ज़िंदगी की परेशानियां पानी की तरह बह जाती थी। अनुभव बताते रहते थे और ज़िंदगी सिखाती रहती थी। पुराने पत्नी पति अभी उसी लकीर पर चल रहे हैं। वैसे.. अब तो जीवन इतना व्यावसायिक हो गया है कि समाज को अंधेरे में उजाला दिखाने वाले भविष्य वाचक कह रहे हैं कि प्यार करने से पहले कुंडली दिखा लेनी चाहिए। लगता है अंग्रेजों द्वारा किया गया सर्वे उनसे प्रेरित है।

- संतोष उत्सुक

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