आनंदपाल सिंह: एक गैंगस्टर के रॉबिनहुड बनने की पूरी कहानी

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अभिनय आकाश । Jan 2 2020 6:04PM

असल में आनंदपाल दूसरे गैंगस्टरर्स से कई मायनों में अलग था। एक लॉ ग्रेजुएट और बीएड होने के बावजूद उसने न सिर्फ जुर्म का रास्ता चुना और गुनाहों की स्य़ाह दुनिया में गहरी पैठ होने के बाद भी फर्राटेदार इंग्लिश बोलकर एक सॉफिस्टिकेटेड इमेज बनाने में कामयाब रहा।

राजस्थान को वो लड़का जो पढ़ना चाहता था। गांव का वो युवक जो टीचर बनना चाहता था। एक नौजवान जो सियासतदार बनते-बनते प्रदेश का सबसे बड़ा गैंगस्टर बन गया। उस गैंगस्टर की कहानी, जिसने जीते जी पुलिस की नींद हराम कर दी और उसकी मौत ने प्रदेश की सरकार को हिला कर रख दिया। 

एक शख्स जिसका नाम जीते जी कानून के सबसे बड़े बहीखातों में सूबे के बड़े मुलजिम के तौर पर शुमार हिआ। वो मरने के बाद अचानक गरीबों का सबसे बड़ा मसीहा यानी रॉबिनहुड बन गया। एक ऐसा राबिनहुड जिसके एनकाउंटर में मौत के बाद उसके जिस्म को भी पुलिस हाथ लगाने से घबरा रही थी। उस के समर्थकों ने एनकाउंटर पर सिर्फ सवाल ही नहीं उठाए बल्कि उसके मुर्दा शरीर के साथ जमकर बवाल भी काटा। उनकी जिद थी कि आनंदपाल के मुर्दा शरीर को तब तक जब तक उसकी मौत का सच आम नहीं हो जाता। लिहाजा अपनी मौत के बाद भी गैंगस्टार आनंदपाल मु्दा बवाल बन गया था। आधे दर्जन से ज्यादा कत्ल के इल्जाम उस पर 37 से ज्यादा गुनाह के मामले उस पर। बेगुनाहों से पुलिसवालों तक का खून बहाने का इल्जाम। तस्करी से लेकर फिरौती और वसूली तक की तोहमत उस पर। लेकिन फिर भी उसके लिए एक सूबा इतना सुलगा कि मौत के 20 दिनों बाद उसका अंतिम संस्कार हुआ। 

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- कहानी एक गैंगस्टर के रॉबिनहुड बनने की।

- गैंगस्टर की पूरी कहानी सुनाने से पहले इस गुजरे हुए गैंगस्टर से आपका तार्रुफ करा देते हैं।

नाम- आनंदपाल सिंह उर्फ आनंद बन्ना

पहचान- राजस्थान का नामी गैंगस्टर

इल्जाम- सात कत्ल समेत 37 से ज्यादा गुनाहों का मुलजिम और राजपूत समाज का  रॉबिनहुड 

राजस्थान के सबसे बड़े और खौफनाक गैंगस्टर का ताल्लुक नागौर इलाके से था। लेकिन किसी गांव के रहने वाले अन्य आम लड़के के मुकाबले आनंदपाल ने जुर्म की दुनिया में ऐसा नाम पैदा किया कि कब राजपूत समाज की एक पूरी की पूरी पुश्त ही उसकी दीवानी हो गई। नागौर से लेकर राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। 

असल में आनंदपाल दूसरे गैंगस्टरर्स से कई मायनों में अलग था। एक लॉ ग्रेजुएट और बीएड होने के बावजूद उसने न सिर्फ जुर्म का रास्ता चुना और गुनाहों की स्य़ाह दुनिया में गहरी पैठ होने के बाद भी फर्राटेदार इंग्लिश बोलकर एक सॉफिस्टिकेटेड इमेज बनाने में कामयाब रहा। नागौर के इलाके का आनंदपाल कभी शिक्षक बनना चाहता था। लेकिन जिंदगी उसे किसी और रास्ते पर ले गई। बीएड की पढ़ाई करते-करते उस पर सियासत का भूत सवार हुआ। 2000 में जिला पंचायत के चुनाव हुए। आनंदपाल ने पंचायत समिति का चुनाव लड़ा और जीत गया। इसके बाद पंचायत समिति के प्रधान का चुनाव होना था। आनंदपाल सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भर दिया। उसके सामने था कांग्रेस के कद्दावर नेता हरजी राम बुरड़क का बेटा जगनाथ बुरड़क। ये चुनाव आनंदपाल महज दो वोट के अंतर से हार गया। सियासत करते-करते उसने शराब की तस्करी भी शुरू कर दी। लेकिन तस्करी के साथ ही उसने जुर्म की दुनिया में कदम रखा और जातिए समीकरण कुछ ऐसे साधे कि देखते ही देखते राजपूतों का हीरो बन गया। कहते हैं आनंदपाल ने सबसे पहले अपने करीबी दोस्त जीवनराम को ही मौत के घाट उतार दिया था। दरअसल, आनंदपाल, मदन सिंह राठौड़ की हत्या का बदला था। बताते हैं कि कुछ ही महीने पहले फ़ौज के जवान मदन सिंह की हत्या जीवनराम ने कर दी थी। हत्या का तरीका दिल गहलाने वाला था। उसके सिर पर पट्टी (पत्थर का लंबा टुकड़ा जिससे छत बनाई जाती है) मार-मारकर खत्म कर दिया गया था। इस हत्या ने जातीय रूप ले लिया था और सारा मामला राजपूत बनाम जाट में तब्दील हो गया. और आनंदपाल ने राजपूतों के ‘मान’ के लिए ये बदला लिया था। फिर तो एक के बाद एक लाशें बिछाई और हर कत्ल के साथ उसका नाम बड़ा होता गया। उसकी महत्वाकांक्षा लिकर किंग बनने की बताई जाती है। जिसके कारण विरोधी गैंग से उसकी लड़ाई होती रही। बीकानेर जेल में 2015 में उसका गैंगवार हुआ था। आनंदपाल को भी गोली लगी थी। पहले वह बीकानेर और फिर अजमेर जेल में बंद था। 3 सितंबर 2015 को आनंदपाल और उसके साथी सुभाष मूंड की नागौर कोर्ट में पेशी थी। पुलिस वैन में उसे फिर अजमेर सेंट्रल जेल लाया जा रहा था। लौटते हुए आनंदपाल ने पुलिस वालों को मिठाई खिलाई जिससे उन्हें नशा आ गया। आगे उसके साथियों ने सड़क रोक ली और गोलियां चलाते हुए उसे भगाकर ले गए। इसमें एक पुलिसकर्मी मारा गया था। तमाम पुलिस महकमे की सक्रियता के बावजूद वह किसी के हाथ नहीं आया था।

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जुर्म के रास्ते पर होने के बावजूद वो अपने समाज के साथ खड़ा हुआ। करीब दो सालों तक वो पुलिस के लिए छलावा बना रहा। लेकिन फिर 2017 में वो एनकाउंटर बेहद कम वक्त में संगीन गुनाहों को अंजाम देते हुए आनंदपाल राजस्थान के ऊपर एक बदनुमा दाग बना। वहीं दूसरी तरफ इसकी रॉबिनहुड वाली छवि पुलिस औऱ प्रशासन के आड़े आ रही थी। 21 महीने से फरार चल रहे आनंदपाल को पकड़ने की नाकामी पुलिस पर भारी पड़ रही थी। तभी अचानक 24 जून की रात साढे 11 बजे खबर आई की आनंदपाल एनकाउंटर में मारा गया। लेकिन उस रात आखिर हुआ क्या था ये सवाल सवालों के घेरे में है। राजस्थान के चुरू जिले की रजतनगढ़ इलाके के गांव मालासर में हाइवे के निकट दो मंजिला मकान। मकान को पुलिस और एसओडी की टीमों ने चारों से घेर लिया। पुलिस के मुताबिक मकान की ऊपरी छट पर मौजूद था मोस्ट वाटंड अपराधी आनंदपाल सिंह एक्शन से पहले सरेंडर की चेतावनी दी गई। मगर जवाब में आनंदपाल ने एके 47 से गोलियां बरसानी शुरू कर दी। पुलिस और एसओजी ने जवाबी फाइरिंग की और आनंदपाल मारा गया। दरअसल, एसओजी आनंदपाल के भाई रूपेश और उसके गुर्गे देवेंद्र का पीछा कर रही थी। सिरसा में दोनों को एसओजी ने धर दबोचा। पुलिस ने रूपेश को एनकाउंटर की धमकी दी।  जिसके बाद आनंदपाल का पता मिला। पुलिस ने पहले ही पूरी जानकारी जुटा ली थी कि आनंदपाल के पास एके 47 और करीब 400 राउंड गोलियां हैं। कई बार गच्चा खा चुकी पुलिस ने छत के ऊपर से मकान में चढ़कर पीछे से आनंदपाल पर छह गोलियां दाग दी। इस मुठभेड़ में सूर्यवीर और कॉन्स्टेबल सोहन घायल हो गए। एनकाउंटर के बाद सवाल उठे कि क्या आनंदपाल को जिंदा नहीं पकड़ा जा सकता था, क्या आनंदपाल को जिंदा पकड़ने की कोशिश नहीं हुई। 

याद करने वाले आनंदपाल को अपनी-अपनी तरह से याद करते हैं। जैसे कि वो अपराधी जो नौजवानों को अपराध की दुनिया में न आकर पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देने की नसीहत देता था। जो कहता था कि अपराध की दुनिया में बैक गियर नहीं लगता। जिसके फर्राटेदार गाड़ी चलाने और 150 पुशअप लगाने के किस्से मशहूर हैं। लेकिन आज फिर से एक बार सोशल मीडिया पर आनंदपाल का नाम चर्चा में आ गया। जी5 पर आई नई वेब सीरीज 'रंगबाज फिर से' इन दिनों खूब ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा है कुछ सीन व डायलॉग काफी वायरल भी हो रहे हैं। दरअसल यह वेब सीरिज मशहूर गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के जीवन पर ही बनी है और वेब सीरिज में नाम बदलकर अमरपाल सिंह कर दिया गया है।

- अभिनय आकाश

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