हर दिल जो जिहाद करेगा पहचाना जाएगा, धर्म छुपाकर शादी करने वाला जेल की सजा पाएगा

  •  अभिनय आकाश
  •  नवंबर 25, 2020   16:59
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हर दिल जो जिहाद करेगा पहचाना जाएगा, धर्म छुपाकर शादी करने वाला जेल की सजा पाएगा

देशभर में लंबे समय से विवादों का सबब बन रहे 'लव जिहाद' पर अब भाजपा शासित राज्यों में कानूनी शिकंजा कसने वाला है। दरअसल, दूसरे धर्मों की युवतियों खासकर हिंदू युवतियों से मुस्लिम युवकों द्वारा जबरिया, प्रलोभन देकर या धोखाधड़ी पूर्वक किए जाने वाले विवाहों के मामले सामने आते रहे हैं।

क्या वाकई हमारे देश में लव जिहाद पूरी तरह से पैर जमा चुका है। क्या इसे खत्म करने के लिए देश में एक कड़े कानून की आवश्यकता है। लव जिहाद का मुद्दा एनसीआर के नोएडा ही नहीं बल्लभगढ़ की निकिता हो या कानपुर से लेकर इंदौर तक, भोपाल से लेकर बागपत तक जिधर भी देखो लव जिहाद की खबर सामने आ रही है। साहिल खान साहिल सिंह बन जाता है और एक मासूम को अपने प्यार के जाल में फंसाता है और फिर एक शर्मनाक खेल खेला जाता है। ये खेल बागपत, भोपाल, केरल, इंदौर देश के हर कोने में होता है। ऐसे में क्या इस पर देशव्यापी कानून बनने का वक्त आ चुका है। देशभर में लंबे समय से विवादों का सबब बन रहे 'लव जिहाद' पर अब भाजपा शासित राज्यों में कानूनी शिकंजा कसने वाला है। दरअसल, दूसरे धर्मों की युवतियों खासकर हिंदू युवतियों से मुस्लिम युवकों द्वारा जबरिया, प्रलोभन देकर या धोखाधड़ी पूर्वक किए जाने वाले विवाहों के मामले सामने आते रहे हैं। इसके अलावा युवतियों द्वारा इंकार करने पर उनकी जघन्य हत्याएं भी हुई हैं। हरियाणा के बल्लभगढ़ में कथित लव जिहाद की आड़ में हुई युवती की हत्या इसका ताजा उदाहरण है, जिसके बाद से ही कई राज्यों में लव जिहाद कानून बनाने की तैयारी की जा रही है।

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22 साल की एक लड़की अपने फिटनेस के लिए जिम जाती है। आरोप के मुताबिक साहिल खान नाम का फिटनेस ट्रेनर उससे साहिल सिंह के नाम से मिलता है। उसे भावनात्मक तौर पर अपने से जोड़ता है। अपने घर पर छूठा दुख दर्द बताकर उससे हजारों रुपए ऐंठता है। प्यार भरा जीवन का झांसा देकर लड़की की मां-बाप की जानकारी के बगैर उससे शादी करता है। शादी करने के बाद लड़की के पैरों चले जमीन खिसक जाती है तब उसे पता चलता है कि जिसने उससे शादी की वो साहिल सिंह ने बल्कि साहिल खान है। फिर शुरु होता है लड़की को प्रताड़ित करने का सिलसिला और आखिर में जब लड़की उससे पीछा छुराना चाहती है तो आरोप है कि साहिल खान 25 लाख रुपए की मांग करता है। ये पूरी घटना नोएडा के सेक्टर 15ए में रहने वाली एक लड़की के साथ घटी है। इतना ही नहीं साहिल खान ने मुस्लिम होता हुए हिन्दू नाम से आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज भी बनवा लिए। नोएडा पुलिस ने आरोपी साहिल खान के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। । उत्तर प्रदेश के ही बागपत में लवन जिहाद के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डाक्टर और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। महिला ने डाक्टर पर पहचान छिपाकर शारिरिक शोषण करने और शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने के लिए दवाब बनाने का आरोप लगाया था। हाल ही में भोपाल में लव जिहाद का मामला सामने आया था जिसका खुलासा तब हुआ जब पीड़ित लड़की की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। यूपी के झांसी में रहने वाली एक नाबालिग लड़की को भोपाल का एक लड़का करीब डेढ़ साल पहले बहला-फुसलाकर ले आया था। भोपाल आने के बाद लड़की का हिन्दू नाम बदलकर तरन्नुम कर दिया। 

क्या है लव जिहाद का मतलब?

इस्लाम में जिहाद शब्द का अर्थ धर्म की रक्षा के लिए युद्ध करना है। वर्तमान हालात में लव जिहाद एक गढ़ा हुआ शब्द है, जिसका मतलब शादी या प्रेम का झांसा देकर इस्लाम में धर्म परिवर्तन करवाने से समझा जाता है। माना जाता है कि लव जिहाद वह धोखा है, जिसके तहत कोई मुस्लिम युवक या आदमी किसी गैर मुस्लिम युवती या महिला को प्रेम का जाल बिछाकर मुस्लिम बनने पर मजबूर करता है। हालांकि यह संगठित रूप से किया जाता हो, ऐसा सबूत नहीं है। लेकिन पहचान छिपाकर शादी करना और धर्म बदलने के लिए दबाव बनाने के कई मामले देश के विभिन्न कोने से लगातार सामने आए हैं। 

क्या है लव-जेहाद की पृष्ठभूमि?

‘लव-जेहाद’ की पृष्ठभूमि उस विषैले दर्शन में निहित है, जिसमें विश्व को ‘मोमिन’ और ‘काफिर’ के बीच बांटा गया है।  जिसके अनुसार, प्रत्येक सच्चे अनुयायी का यह मजहबी कर्तव्य है कि वह काफिरों की झूठी पूजा-पद्धति को नष्ट कर तलवार, छल, फरेब और प्रलोभन के माध्यम से उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करे या फिर मौत के घाट उतार दे- चाहे इसके लिए अपनी जान की बाजी ही क्यों न लगानी पड़े। इसी मानसिकता ने मोहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, गौरी, तैमूर, बाबर, अलाऊद्दीन खिलजी आदि कई विदेशी आक्रांताओं को भारत पर आक्रमण के लिए प्रेरित किया। इसी जेहाद ने 70 वर्षों में पाकिस्तान की जनसंख्या को शत-प्रतिशत इस्लाम बहुल कर दिया है। क्या यह सत्य नहीं कि विभाजन के समय जिस पाकिस्तान की कुल जनसंख्या में 15-16 प्रतिशत आबादी हिनदू, सिख और जैन आदि अनुयायियों की थी, वे आज एक प्रतिशत रह गए हैं? पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों के प्रति जेहाद आसान है। जहां 79 प्रतिशत आबादी हिन्दुओं की है,  इसलिए यहां पाकिस्तान की भांति तौर-तरीके अपनाकर गैर-मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन करना कठिन है। इसी कारण यहां जेहाद के लिए तथाकथित प्रेम का प्रयोग किया जा रहा है।

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कहां से हुई लव जिहाद की शुरूआत?

साल 2009 में, रिटायर्ड जस्टिस केटी शंकरन ने माना था कि केरल और मैंगलोर में जबरन धर्म परिवर्तन के कुछ संकेत मिले थे। तब उन्होंने केरल सरकार को इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कानूनी प्रावधान करने की बात कही थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रेम के नाम पर, किसी को धोखे या उसकी मर्ज़ी के बगैर धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

लव जिहाद के कुछ चर्चित केस

साल 2009 में एक केस चर्चा में आया था जब एक लड़की को इस्लाम में कन्वर्ट किए जाने के आरोप लगे थे। स्पेशल ब्रांच के हवाले से उस वक्त आई खबरों में कहा गया था कि नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट और कैंपस फ्रंट जैसे कुछ समूह कई शहरों में, खास तौर से कॉलेजों में योजनाबद्ध ढंग से हिंदू और ईसाई लड़कियों को इस्लाम में कन्वर्ट करवाने के लिए 'प्रेम के झांसे' का खेल खेल रहे थे।

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राष्ट्रीय स्तर की शूटर तारा शाहदेव ने खुलकर कहा था कि उसके ससुराल पक्ष ने इस्लाम कबूल करने के लिए प्रताड़ना दी। तारा ने कहा था कि उसने जिस व्यक्ति से शादी की थी, यह समझकर की थी कि वह हिंदू था। इस मामले में सीबीआई जांच हुई और पीड़िता के पति समेत ससुराल पक्ष के खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई।

हादिया केस भी लव जिहाद का एक बेहद चर्चित केस था। हादिया केस में लव जिहाद के तार सीरिया के आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के साथ जुड़े थे। हाई कोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए से जांच को कहा था और एनआईए ने कहा था कि 'लव जिहाद नकारा नहीं' जा सकता. इसके बाद ताज़ा मामलों में कानपुर और बल्लभगढ़ के कुछ मामले सुर्खियों में रहे।

क्या हैं कानूनी प्रावधान?

लव जिहाद के ज़्यादातर केसों में यौन शोषण संबंधी कानूनों के तहत मुकदमे चलते रहे हैं। आरोपी को पेडोफाइल मानकर पॉक्सो और बाल विवाह संबंधी कानूनों के तहत भी केस चलते रहे हैं। इसके अलावा, बलपूर्वक शादियों के मामले में कोर्ट आईपीसी के सेक्शन 366 के तहत सज़ा दे सकते हैं. महिला की सहमति के बगैर यौन संबंध बनाने का आरोप साबित होने पर 10 साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है।

ऐसे मामलों में कानूनी पेंच यहां फंसता रहा है कि मुस्लिम शादियां शरीयत कानून और हिंदू शादियां हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कानूनन होती हैं। चूंकि मुस्लिम शादियों में सहमति दोतरफा अनिवार्य है इसलिए इन शादियों में अगर यह साबित हो जाता है कि सहमति से ही शादी हुई थी, तो कई मामले सिरे से खारिज होने की नौबत तक आ जाती है।

एमपी में तैयार है संभावित कानून की रूपरेखा

मध्य प्रदेश में कानून की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। एमपी सरकार के एक मंत्री ने बताया कि लव जिहाद के खिलाफ संभावित कानून में अपराधी को 5 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। मामले में गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा। संभावित कानून के मुताबिक, धर्म परिवर्तन के लिए एक महीने पहले ही अनुमति लेनी होगी। मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा सत्र में इस प्रस्ताव को सदन में पेश किया जा सकता है।

 यूपी में लव जिहाद कानून

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'लव जिहाद' के विरुद्ध अध्यादेश लेकर आई है। अध्यादेश में योगी सरकार ने लव जिहाद जैसा घिनौना कृत्य करने वालों पर सख्त रुख अख्तियार किया है। अध्यादेश के अनुसार धोखे से धर्म परिवर्तन कराने पर 10 साल की सजा का प्रावधान है। साथ ही अध्यादेश में इस बात पर भी बल दिया गया है कि यदि धर्म परिवर्तन कराया जाता है तो इसकी सूचना जिले के जिलाधिकारी को दो महीने पहले देनी होगी।

लव जिहाद पर यूपी के क़ानून में क्या?

उप्रविधि विरुद्ध प्रतिषेद अध्यादेश 2020

धोखा या लालच देकर शादी करना अपराध

शादी के बाद जबरन धर्म बदलवाने पर सज़ा

दोषी को 5 से 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान

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हरियाणा : कानून बनाने की तैयारी

लव जिहाद के खिलाफ हरियाणा में भी कानून बनाने पर विचार चल रहा है। राज्य के गृह मंत्री अनिल विज ने इसी माह ट्वीट कर यह जानकारी दी थी। बता दें कि फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में हुए निकिता तोमर हत्याकांड के बाद लव जिहाद का मामला नए सिरे से गरमाया है। विज ने यह भी कहा था कि इस मामले की धर्म-परिवर्तन और लव जिहाद की दृष्टि से भी जांच करवाई जाएगी। राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने निकिता हत्याकांड पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा था कि यह बेहद गंभीर मामला है। इसे धर्मांतरण से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें ऐसे प्रावधान करने पर विचार कर रही हैं, ताकि ऐसा मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

कर्नाटक : लव जिहाद पर लगेगी लगाम

मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने भी कहा है कि राज्य सरकार 'लव जिहाद' के नाम पर धर्मांतरण पर लगाम के लिए कड़े कदम उठाएगी। पांच नवंबर को दिए बयान में उन्होंने कहा 'हाल ही में कर्नाटक में लव जिहाद के नाम पर धर्मांतरण की खबरें आई हैं। मैंने इस बारे में अधिकारियों से बात की है। दूसरे राज्य क्या कर रहे हैं या क्या नहीं कर रहे, यह अलग बात है। लेकिन कर्नाटक में इस पर लगाम लगाई जाएगी। जब ‘जिहादी’ राज्य में महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़ कर रहे हैं तो सरकार चुप नहीं बैठेगी।' येदियुरप्पा ने कहा कि राज्य की युवा लड़कियों का प्यार और पैसे के नाम पर बहला-फुसलाकर धर्मातंरण किया जा रहा है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 'लव जिहाद' को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि यह शब्द उसने देश को बांटने व सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने के लिए गढ़ा है. गहलोत ने इस बारे में एक ट्वीट में लिखा, लव जिहाद शब्द भाजपा ने देश को बांटने व सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए गढ़ा है। इसी बारे में एक और ट्वीट में गहलोत ने लिखा है कि वे देश में ऐसा माहौल बना रहे हैं जहां वयस्कों की आपसी सहमति राज्य सरकार की दया पर निर्भर होगी. शादी विवाह व्यक्तिगत निर्णय होता है और वे इस पर लगाम लगा रहे हैं जो कि व्यक्तिगत आजादी छीनने जैसा ही है।

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ये एक बड़ा सवाल है कि कौन-सा मजहब है, जो अपना संख्या-बल बढ़ाने की कोशिश नहीं करता ? वे ऐसा इसीलिए करते हैं, क्योंकि वे समझते हैं कि ईश्वर, अल्लाह या यहोवा को प्राप्त करने का उनका मार्ग ही एक मात्र मार्ग है और वही सर्वश्रेष्ठ है। सिर्फ हिंदू धर्म के अनुयायी ही सारी दुनिया में एक मात्र ऐसे हैं, जो यह मानते हैं कि ‘एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति।’ याने सत्य एक ही है लेकिन विद्वान उसे कई रूप में जानते हैं। इसीलिए भारत के हिंदू या बौद्ध या जैन या सिख लोगों ने धर्म-परिवर्तन के लिए कभी तन, तलवार या तिजोरी का सहारा नहीं लिया।  वास्तव में, ‘‘लव-जेहाद’’ देश की बहुलतावादी और पंथनिरपेक्षता के लिए बड़ा खतरा है। 2 वयस्क प्रेमियों के बीच मजहब की दीवार कभी नहीं बननी चाहिए परंतु यदि तथाकथित ‘‘प्यार’’ के माध्यम से एक वयस्क मजहबी कारणों से दूसरे को अपने प्रेम के प्रपंच में फंसाए, तो उसे धोखा ही कहा जाएगा। क्या इस प्रकार के धोखे को स्वीकार करने से सभ्य समाज स्वस्थ रह सकता है?- अभिनय आकाश







आजादी लेकिन पाकिस्तान के बिना और हिन्दुस्तान के साथ, कुछ ऐसी रही है लोन परिवार की कश्मीर को लेकर सोच

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 21, 2021   18:34
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आजादी लेकिन पाकिस्तान के बिना और हिन्दुस्तान के साथ, कुछ ऐसी रही है लोन परिवार की कश्मीर को लेकर सोच

कश्मीर के नेता सज्जाद लोन जिन्हें पीएम मोदी का करीबी भी माना रहा है। कभी फारूक अब्दुल्ला द्वारा उनके पिता पर कश्मीर में बंदूक लाने का जिम्मेदार भी ठहराया जाता है। तो कभी सूबे के राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा लोन को बीजेपी की तरफ से सीएम बनाने की तैयारी की बात भी कह दी जाती है।

पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन जिसमें जम्मू कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं वो अब धीरे-धीरे बिखरने लगी हैं। पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद लोन ने गुपकार गठबंधन से अलग होने का एलान कर दिया है। गुपकार घोषणापत्र गठबंधन के घटक दलों में जारी वर्चस्व और कलह के बारे में उल्लेखित करते हुए कहा कि कोई दल एक-दूसरे को देखना नहीं चाहते। जिसके बाद सज्जाद लोन ने गुपकार गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। बता दें कि डीडीसी चुनावों के परिणाम आने के बाद महबूबा मुफ्ती भी गुपकार गठबंध से किनारा कर रही हैं। वो गुपकार की किसी बैठक में भी शामिल नहीं हुईं। जिसके बाद सज्जाद लोन का ये बड़ा फैसला आया। ऐसे में आज के विश्वेषण में बात करेंगे जम्मू कश्मीर की और कश्मीर के नेता सज्जाद लोन की। जिन्हें पीएम मोदी का करीबी भी माना रहा है। कभी फारूक अब्दुल्ला द्वारा उनके पिता पर कश्मीर में बंदूक लाने का जिम्मेदार भी ठहराया जाता है। तो कभी सूबे के राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा लोन को बीजेपी की तरफ से सीएम बनाने की तैयारी की बात भी कह दी जाती है। कौन हैं कश्मीर का लोन परिवार जो मुफ्ती का भी करीबी रहा और मोदी का भी। 

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सज्जाद लोन को जानने से पहले उनके पिता अब्दुल गनी लोन को जानना बहुत जरूरी है। एक गरीब परिवार में जन्में अब्दुल गनी लोन की चाह शुरू से ही वकील बनने की थी। अपने मकसद में उन्हें कामयाबी भी मिलती है। लेकिन ये उन्हें तो राजनीति में आना था और यही चाह अब्दुल गनी लोन को कांग्रेस के दरवाजे पर लेकर आती है। वो साल 1967 में कांग्रेस से जुड़ते हैं और फिर धीरे-धीरे अपनी सियासत को मजबूत करने की चाह लिए 1978 में जम्मू कश्मीर पीपुल्स काॅन्फ्रेंस का गठन किया। जम्मू कश्मीर में अब्दुल गनी लोन ने राजनीति तब शुरू की जब शेख अब्दुल्ला की लोकप्रियता चरम पर थी। उसी वक्त लोन कश्मीर को और अधिक दिलाने की मांग लिए अब्दुल्ला की सत्ता को चुनौती देने की कोशिश में लग गए। लेकिन शुरुआती दो चुनाव में उन्हें पराजय ही मिलती है। 1983 में 10 वोट से और 1987 को 430 वोटों से। जिसके बाद अब्दुल गनी लोन अलगाववाद के रास्ते पर चल पड़ते हैं। उनके साथ मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के भी लोग साथ आ जाते हैं। अब्दुल गनी लोन कश्मीर को एक स्वतंत्र राज्य के तौर पर देखना चाहते थे। अपनी अलगाववादी कार्यों और बयानों की वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। पूर्व राॅ चीफ एएस दुलत की किताब कश्मीर द वाजपेयी इयर्स के मुताबिक 1992 में जब लोन जेल से बाहर आए तो उनके दिमाग में बस अलगाववादियों का एक संगठन बनाने की बात थी। कश्मीर द वाजपेयी इयर्स के अनुसार लोन इसके लिए आईएसआई से भी सलाह मशवरा किया था। घाटी में 13 जुलाई 1993 को ऑल पार्टीज हुर्रियत कांफ्रेंस की नींव रखी गई। हुर्रियत कांफ्रेंस का काम पूरी घाटी में अलगाववादी आंदोलन को गति प्रदान करना था। यह एक तरह से घाटी में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के विरोध स्वरूप एकत्रित हुई छोटी पार्टियों का महागठबंधन था। इस महागठबंधन में केवल वही पार्टियां शरीक हुईं जो कश्मीर को वहां के लोगों के अनुसार जनमत संग्रह कराकर एक अलग पहचान दिलाना चाहती थीं। हालांकि इनके मंसूबे पाक को लेकर काफी नरम रहे। ये सभी कई मौकों पर भारत की अपेक्षा पाक से अपनी नजदीकियां दिखाते रहे हैं। 90 के दशक में जब घाटी में आतंकवाद चरम पर था तब इन्होंने खुद को वहां एक राजनैतिक चेहरा बनने की कोशिश की लेकिन लोगों द्वारा इन्हें नकार दिया गया। एपीएचसी  की एग्जिक्‍यूटिव कांउसिल में सात अलग-अलग पार्टियों के सात लोग बतौर सदस्‍य शामिल हुए। जमात-ए-इस्‍लामी से सैयद अली शाह गिलानी, आवामी एक्‍शन कमेटी के मीरवाइज उमर फारूक, पीपुल्‍स लीग के शेख अब्‍दुल अजीज, इत्‍तेहाद-उल-मुस्लिमीन के मौलवी अब्‍बास अंसारी, मुस्लिम कांफ्रेंस के प्रोफेसर अब्‍दुल गनी भट, जेकेएलएफ से यासीन मलिक और पीपुल्‍स कांफ्रेंस के अब्‍दुल गनी लोन शामिल थे। अब्दुल गनी लोन कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के काफी नजदीक हो जाते हैं। ओल्ड टाउन श्रीनगर की ईदगाह में मीरवाइज मौलवी फारुख की 12वीं मेमोरियल सर्विस में शरीक हुए थे तभी 21 मई 2002 को अब्दुल गनी लोन की आतंकिों द्वारा हत्या कर दी जाती है। जब अब्दुल गनी लोन की हत्या हुई तो उनके पुत्र सज्जाद लोन ने अपने पिता की हत्या में आईएसआई का हाथ होने की बात कही थी। लेकिन बाद में अपनी मां के कहने पर उन्होंने अपने आरोप वापस ले लिए थे। सज्जाद की मां हनीफा का कहना था कि मैंने अपने पति को खोया है और अब अपना बेटा नहीं खोना चाहती। बाद में सज्जाद लोन ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया और अलगाववाद की राजनीति की वकालत शुरू कर दी।

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फारूक ने लोन को कश्मीर में बंदूक लाने का जिम्मेदार ठहराया

नेशनल काॅन्फ्रें, के नेता फारूक अब्दुल्ला ने एक बार अब्दुल गनी लोन को कश्मीर में बंदूक लाने का जिम्मेदार ठहराया था। जिसके पीछे अब्दुल्ला ने इतिहास की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व राज्यपाल जगमोहन ने जब उन्हें निलंबित किया था, उस वक्त अब्दुल गनी लोन उनके पास आए थे। उन्होंने कहा था कि वह पाकिस्तान से बंदूक लाएंगे। अब्दुल्ला ने कहा कि उस वक्त मैंने लोन को बहुत समझाया था, लेकिन वह माने नहीं। 

मुशर्रफ से कहा- पाकिस्तान के बारे में चिंता करें

कश्मीर द वाजपेयी इयर्स के अनुसार एक बार अब्दुल गनी लोन पाकिस्तान के जनरल परवेज मुशर्रफ से मिले तो उन्होंने गनी लोन से पूछा कि कश्मीर के हालात कैसे हैं तो इस पर लोन ने फट से जवाब देते हुए कहा कि कश्मीर के बारे में चिंता मत कीजिए, पाकिस्तान को देखिए। आपके कट्टरपंथी उसी हाथ को काट लेंगे जो उन्हें खिलाते हैं। 

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सज्जाद लोन की कश्मीर की सियासत में एंट्री

सज्जाद लोन कश्मीर की आजादी की बात करते रहे लेकिन पाकिस्तान के बिना और हिन्दुस्तान के साथ। मतलब आसान भाषा में समझें तो कश्मीर की और स्वायतता की मांग। साल 2002 में सज्जाद लोन के खिलाफ अलगाववादी उम्मीदवारों के खिलाफ डमी उम्मीदवार उतारने के आरोप भी लगे। बाद में उन्होंने हुर्रियत से अलग होना शुरू कर दिया। कश्मीर को लेकर सज्जाद हमेशा से मुखर रहे और साल 2006 में उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात भी की। 2008 में अमरनाथ हिंसा के बाद खुद को सज्जाद लोन ने अलगाववाद से अलग कर लिया। साल 2008 और 2009 के दौरान सज्जाद लोन ने विधानसभा का चुनाव भी लड़ा लेकिन दोनों बार ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2014 में बारामूला में निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए भी उन्हें हार ही मिली। साल 2014 में उनकी पार्टी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की और बीजेपी-पीडीपी गठबंधन वाली सरकार में मंत्री बने। बाद में कश्मीर में विधानसभा भंग हो गई थी और सूबे में राष्ट्रपति शासन लग गया था। हाल ही में हुए डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव में जेकेपीसी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की है। सज्जाद लोन को पीएम मोदी का करीबी भी माना जाता है। पीएम मोदी के कश्मीर दौरे के दौरान वह उनके साथ नजर भी आ चुके हैं। सज्जाद लोन की एक बहन हैं जिनका नाम शबनम लोन है। वह सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं और कश्मीर मुद्दे को लेकर काॅलम लिखती हैं। -अभिनय आकाश







जानें कौन हैं एलेक्सी नवालनी, जिसे दो बार जहर देकर मारने की साजिश रचने के आरोप रूस के राष्ट्रपति पर लगे

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 19, 2021   18:10
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जानें कौन हैं एलेक्सी नवालनी, जिसे दो बार जहर देकर मारने की साजिश रचने के आरोप रूस के राष्ट्रपति पर लगे

एलेक्सी नवालनी को जर्मनी से मास्को आने पर हिरासत में ले लिया गया है और फिर अदालत ने उन्हें 30 दिन के लिए जेल भेज दिया है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपियन काउंसिल और ब्रिटेन सहित पश्चिम देशों ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

2011 का साल और दिल्ली के रामलीला मैदान का वो शोर। जब गांधी की टोपी पहले अन्ना हजारे रघुपति राघव राजा राम के बोल के साथ अनशन पर बैठे थे। पूरा देश उस वक्त मैं भी अन्ना तू भी अन्ना अब तो सारा देश है अन्ना के नारे के साथ अन्नामय हो गया था। लेकिन ठीक उसी वक्त दिल्ली से 4195 किलोमीटर दूर रूस में एक संगठन की नींव रखी जा रही थी। नाम- एंटी करप्शन फाउंडेशन। मकसद- रूस की ब्लादिमीर पुतिन सरकार के कथित भ्रष्टाचार को उजागर करना। आज की कहानी है एक ऐसे नेता कि जिसके पोस्टर 2017 में पुतिन विरोधी आंदोलन में दिखे। उसी राजनेता को दो बार जहर देकर मारने की कोशिश की गई और आरोप रूस के राष्ट्रपति पर लगे। वो नेता जिसके इलाज की पेशकश फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने की। वो नेता जिसके बारे में अमेरिकी अखबार के एक बार लिखा कि The Man vladimir Putin fears most यानी वो आदमी जिससे ब्लादिमीर पुतिन को सबसे ज्यादा डर लगता है। ये कहानी है पुतिन के खिलाफ प्रदर्शन के लिए 3 बार जेल जाने वाले और चुनाव लड़ने की कोशिश में ईसी द्वारा अयोग्य करार दिए जाने वाले पुतिन विरोधी रूस के सबसे बड़े नेता एलेक्सी नवालनी की।

सबसे पहले बात वर्तमान की करते हैं। एलेक्सी नवालनी को जर्मनी से मास्को आने पर हिरासत में ले लिया गया है और फिर अदालत ने उन्हें 30 दिन के लिए जेल भेज दिया है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका. यूरोपियन काउंसिल और ब्रिटेन सहित पश्चिम देशों ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मास्को कोर्ट द्वारा नवलनी को निलंबित जेल की शर्तों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए 15 फरवरी तक जेल में रखने का आदेश दिया। नवालनी को गबन के आरोप में यह सजा सुनाई गई थी और उनके खिलाफ तीन और आपराधिक मामले दर्ज हैं। 

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रूस के कई दशकों से राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के जन्मदिन वाले दिन यानी सात अक्टूबर 2017 की बात है। रूस की राजधानी मास्को के पुश्किन स्क्वायर पर सैकड़ों लड़के-लड़कियां इकट्ठे हुए। पुतिन के विरोध वाली तख्तियां हाथों में लिए ये लोग जिसमें लिखा था पुतिन इज ए थीफ, पुतिन को राष्ट्रपति पद से हटाओ। पुतिन और उनकी सरकार के खिलाफ 20 से ज्यादा रूस के शहरों में हो रहा था। उन प्रदर्शनकारियों के पास एक पोस्टर में युवा चेहरे वाला पोस्टर भी लहराया जा रहा था और उसकी जिंदाबाद के नारे भी लगाया जा रहा था। 

पेश से वकील एलेक्सी नवालनी का रूस की राजनीति में उभार 2008 से दिखता है । जब वो रूस सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलना शुरू करते हैं। राष्ट्रवादी नेता के तौर पर उनकी छवि बन जाती है। सरकारी कांट्रैक्ट में भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाते हैं। ब्लाॅगिंग और यूट्यूब के जरिये इन तमाम मुद्दों को उठाते हुए रूस में लोकप्रिय हो जाते हैं। एलेक्सी ने एंटी करप्शन फाउंडेशन नाम का संगठन बनाया। और इसके जरिये भ्रष्टाचार पर पुतिन सरकार को सीधे ललकारने लगे। आलम ये हुआ कि साल 2012 में अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल ने अपने खबर की शीर्षक में एलेक्सी का परिचय देते हुए एक खबर प्रकाशित की The Man vladimir Putin fears most यानी वो आदमी जिससे ब्लादिमीर पुतिन को सबसे ज्यादा डर लगता है। इस लेख के मुताबिक सरकार के समर्थक टीवी और अखबार एलेक्सी को सीआईए का एजेंट बताते हैं। हिटलर से उसकी तुलना करते हैं। रूस के सरकारी चैनलों पर तो एलेक्सी को दिखाने पर भी पाबंदी है। 2013 में उन्होंने मास्को में मेयर का चुनाव लड़ने का ऐलान किया। वो लड़े लेकिन पुतिन के उम्मीदवार से हार गए। एलेक्सी ने चुनाव में धांधली का इल्जाम लगाया। उसके बाद उनपर कई केस लगाए। एक में एलेक्सी को पांच साल की सजा हुई और दूसरे में साढ़े तीन साल की। कुछ साल जेल में रहने के बाद एलेक्सी नजरबंद कर दिए गए। 2016 में बाहर आए तो फिर प्रदर्शन जारी कर दिया। 2017 में उन्हें पुतिन के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए 3 बार जेल हुई। साल 2017 में ही उन पर हमला हुआ और इस हमले की वजह से एलेक्सी की दाहिनी आंख केमिकल बर्न से प्रभावित हुई। 2018 में रूस के राष्ट्रपति के चुनाव के वक्त एलेक्सी के पुतिन को तगड़ी चुनौती देने के कयास लगाए जा रहे थे। तभी चुनाव आयोग ने एलेक्सी को अयोग्य घोषित कर दिया गय। लेकिन जुलाई 2019 में रूस में विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने की वजह से उन्हें 30 दिन की जेल हुई। जेल में ही उनकी तबीयत बिगड़ी और आरोप लगे कि एलेक्सी को जहर देने की कोशिश हुई है। 20 अगस्त 2020 को रूस के साइबेरिया से एक विमान मास्को के लिए उड़ान भरता है।

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विमान के उड़ान भरने के दौरान ही उसमें बैठे पैसेंजर एलेक्सी नवालनी बीमार हो गए। मामला गंभीर हुआ तो प्लेन की इमरजेंसी लैंडिग करनी पड़ी और नवालनी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पता चला कि नवालनी को जहर दिया गया। जिसके बाद शक जताया गया कि एयरपोर्ट पर जिस कैफे में एलेक्सी नवालनी ने चाय पी थी उसमें जहर मिला थ। एलेक्सी की प्रेस सेक्रेटरी ने ट्वीट करके बताया कि एलेक्सी को जहर दिया गया है। लेकिन डक्टर कहते हैं कि एलेक्सी को जहर नहीं दिया गया है। जर्मनी ने तो अपना एक एयर एंबुलेंस भी रूस के साइबेरिया में भेज दिया। जिसके बाद उन्हें जर्मनी लाया गया। जहां वे कोमा में रहे। वहीं जर्मनी ने रूस पर आरोप लगाया कि रूस ने एलेक्सी को नोविचोक नाम का जहर दिया। 

वैसे रूस की राजनीति में विरोधियों को जहर देकर मारने जैसे कई तथ्य और रिपोर्ट समय-समय पर सामने आते रहते हैं। विकीपीडिया में भी List of soviet and Russian Assassinations लिखने पर उन नामों का उल्लेख मिलता है जिन्हें कथित तौर पर सत्ता पार्टी द्वारा जहर देकर मारने की कोशिश हुई। साल 2006 में अलेक्जेंडर लिटनिवेनको को रेडियो एक्टिव त्तव पोलोनियम 210 देकर मारने जैसी खबरें स्काई न्यूज की एक रिपोर्ट मं प्रकाशित की गई। वहीं 1978 में जाॅर्जी मार्कोव नाम के लेखक की मौत हो गई, जिसके सालों बाद ये खुलाया हुआ कि रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी ने जहर देकर जाॅर्जी की हत्या करवाई थी।- अभिनय आकाश







WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी के बारे में सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 18, 2021   19:04
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WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी के बारे में सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

व्हाट्सएप की नई पाॅलिसी आने के बाद लोग खफा चल रहे थे और दूसरे प्लेफार्म पर जाना भी शुरू कर दिया। निगेटिव इम्पैक्ट देखकर व्हाट्सएप डैमेज कंट्रोल में जुट गया। ट्वीटर पर पोस्ट डालकर और अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देकर व्हाट्सएप लोगों को समझा रहा है कि आपकी चैट अभी भी सुरक्षित हैं।

पहले निबंध की शुरूआत एक लाइन के जरिये हुआ करती थी ''भारत एक कृषि प्रधान देश है''। मोबाइल क्रांति के बाद से स्थिति थोड़ी बदल सी गई। अब भारत व्हाट्सएप प्रधान देश भी बन चुका है। If you are not paying for it, you become the product ये अंग्रेजी की एक कहावत है। जिसका मतलब है कि अगर आप कोई प्रोडक्ट मुफ्त में ले रहे है तो इसका मतलब है कि आप खुद ही प्रोडक्ट हैं। व्हाट्सएप पर आए एक नोटिफिकेशन से ये बात जरूर साबित हो गई है। पिछले कुछ दिनों में दुनियाभर के करीब दो सौ करोड़ लोगों को व्हाट्सएप पर एक नोटिफिकेशन मिला। 

इस नोटिफिकेशन में कहा गया कि 8 फरवरी 2021 तक आपको जो शर्तें लिखीं हैं उसे स्वीकार करना होगा। अगर आप ये शर्तें स्वीकार नहीं करते तो आपका व्हाट्सएप एकाउंट बंद कर दिया जाएगा। 

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नोटिफेकेशन की शर्तें क्या थी- व्हाट्सएप आपके डेटा को फेसबुक के साथ शेयर करेगा।  जिसके लिया वो ग्रीन बटन के जरिये आपसे एग्री यानी इजाजत की मांग कर रहा है। फेसबुक ही व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी है। डेटा का मतलब है आपका फोन नंबर, आपके कांन्ट्रैक्ट्स और आपको व्हाट्सएप स्टेटस जैसी तमाम जानकारियां। ये डेटा व्हाट्सएप लेकर फेसबुक के साथ शेयर करना चाह रहा है। मतलब व्हाट्सएप आपकी कुछ चीजों की निगरानी करेगा और उसे थर्ड पार्टी के साथ शेयर भी करेगा। व्हाट्सएप ये गौर करगेा कि आप कितनी देर आनलाइन रहते हैं, आनलाइन रहकर क्या करते हैं। कौन सा फोन इस्तेमाल करते हैं और किस तरह के कंटेट व्हाट्सएप पर पसंद करते हैं। क्या सबसे अधिक देखते हैं। सबसे अधिक जो कंटेट आप देखते होंगे वह बेसिक डेटा व्हाट्सएप थर्ड पार्टी यानी फेसबुक, इंस्टाग्राम को शेयर करेगा और फिर उसी से मिलता-जुलता कंटेट आपको दिखाया जाएगा। 

दरअसल, व्हाट्सएप पर भेजे गए मैसेज इंड टू इंड इंक्रिप्शन की मदद से स्कियोर होते हैं। मान लीजिए कि दो लोग हैं जिन्होंने एक दूसरे को भेजा हो। जैसे ही आप मैसेज भेजते हैं एक प्रोग्राम आपके मैसेज को एक जटिल कोड में बदल देता है। जिसे मैसेज भेजा गया है उसके फोन में वो कोड जाता है दोबारा मैसेज में बदल जाता है और जिसने वो मैसेज पढ़ा उसे समझ में आ जाता है कि सामने वाले ने मैसेज क्या भेजा। इस दौरान कोई भी मैसेज कहीं भी स्टोर नहीं होता। 

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व्हाट्सएप की नई पाॅलिसी आने के बाद लोग खफा चल रहे थे और दूसरे प्लेफार्म पर जाना भी शुरू कर दिया। निगेटिव इम्पैक्ट देखकर व्हाट्सएप डैमेज कंट्रोल में जुट गया। ट्वीटर पर पोस्ट डालकर और अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देकर व्हाट्सएप लोगों को समझा रहा है कि आपकी चैट अभी भी सुरक्षित हैं। 

व्हाट्सएप के विज्ञापन के अनुसार उनकी पाॅलिसी में बदलाव आपकी निजी चैट को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करते हैं। ये अपडेट सिर्फ बिजनेस अकाउंट से बात करने को लेकर है और वो भी वैकल्पिक है। आप चाहे तो व्हाट्सएप पर किसी भी बिजनेस से बात न करे और अगर ऐसा करते हैं तो व्हाट्सएप इस बातचीत को फेसबुक से साझा कर सकता है। फिर इसे आपकी जानकारी से जोड़कर आपके हिसाब से विज्ञापन दिखा सकता है। व्हाट्सएप का कहना है कि बाकी सारी चीजें पहले जैसी हैं। व्हाट्सएप ने ट्वीटर और विज्ञापन के जरिये ये बाते भी कहीं। व्हाट्सएप और फेसबुक न तो आपके प्राइवेट मैसेज देख सकता है न ही आपकी काॅल सुन सकते हैं। व्हाट्सएप इस बात रिकाॅर्ड नहीं रखता कि आप किसी चैट या काॅल कर रहे हैं। आप व्हाट्सएप पर जो लोकेशन दूसरे के साथ साझा करते हैं उसे न तो व्हाट्सएप देख सकता है और न ही फेसबुक। व्हाट्सएप आपको फोन में मौजूद कांट्रैक्ट्स को फेसबुक के साथ शेयर नहीं करता है। व्हाट्सएप पर बने हुए ग्रुप प्राइवेट ही रहेंगे।

अब आते हैं प्राइवेट पाॅलिसी पर। व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम तीनों का प्रभुत्व मार्क जुकरबर्ग के पास है। वहीं उसके प्रतियोगी कहे या प्रतिद्वंद्वी गूगल के ही लोकेशन,क्लाउड, ड्राइव, जीमेल, यूट्यूब, गूगल एडसेंस हैं। गूगल को टक्कर देने या उसे पछाड़ने के लिए फेसबुक के द्वारा इस तरह की कवायदों को किया जा रहा है। साल 2009 में जब व्हाट्सएप मार्केट में आई तो उस वक्त किसी को भी टेक्सट मैसेज भेजने के लिए कम से कम एक रुपये की शुल्क देनी होती थी। उस वक्त फ्री मैसेज की सुविधा के साथ व्हाट्सएप आया। जिसकी मैसेज और काॅल को कोई रिकार्ड भी नहीं कर सकता तो प्राइवेसी के मामले में भी सही था। साल 2014 में फेसबुक ने 9 बिलियन डाॅलर में व्हाट्सएप को खरीद लिया। लेकिन जिस प्लानिंग के तहत व्हाट्सएप को फेसबुक ने खरीदा था वो मनचाहा रिजल्ट नहीं मिल पा रहा था। जिसके बाद व्हाट्सएप और फेसबुक का ये पाॅलिसी वाला चक्कर सामने आया। 

यूट्यूब में विज्ञापन के जरिये जो भी पैसा आता है वो गूगल एडसेंस के जरिये। फेसबुक की भी चाहत इसी तरह के तरीके को अपनाने की है। मतलब विज्ञापन फेसबुक पर चलेगा लेकिन यूजर को व्हाट्सएप के जरिये लाया जाएगा। यूट्यूब पर कैटेगराइजेशन ज्य़ादा बेहतर है। जिस पर फेसबुक के रिसर्च किया।  यूट्यूब ने टाइटल, डिस्क्रिप्शन, टैग, थंबनेल आदि के माध्यम से पहले ही वीडियो से संबंधित सारी जानकारी पा ली। फिर ये डेटा के आधार पर गूगल एड सेंस कौन सा विज्ञापन दिखाना है तय करती है। ऐसी ही कुछ सोच फेसबुक की भी है। आप जो भी व्हाट्सएप पर कर रहे हैं वो इसकी जानकारी फेसबुक को देगा और फिर फेसबुक उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाएगा। ताकि फेसबुक का विज्ञापन भी रिलेवेंट हो सके।

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यूजर्स के विरोध पर फैसला टला

व्हाट्सएप के पाॅलिसी अपडेट से जुड़े फैसले के बाद लोग इसका भारी विरोध देखने को मिला। जिसके बाद व्हाट्सएप ने अपनी अपडेट पाॅलिसी को मई तक पोस्टपोन करने का फैसला किया। व्हाट्सएप का कहना है कि इससे यूजर्स को पाॅलिसी को समझने, इससे जुड़े कन्फ्यूजन दूर करने और इसे स्वीकार करने का मौका मिलेगा। कंपनी की तरफ से ब्लाॅग पोस्ट में यह बात कही गई। 

व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी पर हाईकोर्ट 

व्हाट्सएप की प्राइवेट पाॅलिसी को लेकर याचिकाकर्ता द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की गई। याचिका में कहा गया कि पाॅलिसी पर सरकार को एक्शम लेना चाहिए। साथ ही याचिकाकर्ता ने इसे निजता का उल्लंघन बताया। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर विस्तृत सुनवाई की बात करे हुई कोई नोटिस जारी नहीं किया। इसके साथ ही हाईकोर्टने कहा कि व्हाट्सएप एक प्राइवेट एप है। अगर आपकी निजता प्रभावित हो रही है तो आप इसे डिलीट कर दें। कोर्ट ने कहा क्या आप मैप या ब्राउजर इस्तेमाल करते है? उसमें भी आपका डाटा शेयर किया जाता है। 

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गूगल सर्च में व्हाट्सएप यूजर्स के नंबर 

तमाम तरह के विवाद चल ही रहे थे कि व्हाट्सएप को लेकर एक और विवाद सामने आया। कहा जा रहा है कि व्हाट्सएप यूजर्स के फोन नंबर इंडेक्सिंग के जरिये गूगल सर्च पर एक्सपोज कर दिए हैं। इससे पहले एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि व्हाट्सएप ग्रुप के लिंक भी गूगल पर सर्च किए गए थे। समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार गूगल सर्च में व्हाट्सएप यूजर्स के नंबर देखे गए हैं। गौरतलब है कि व्हाट्सएप को मोबाइल के अलावा लैपटाॅप और कंप्यूटर पर भी चलाया जाता है। यूजर्स के नंबर व्हाट्सएप वेब के जरिये लीक हुए हैं। मतलब साफ है कि अगर आप व्हाट्सएप को कंप्यूटर या लैपटाॅप पर इस्तेमाल करते हैं तो आपका कान्टैक्ट पब्लिकली गूगल सर्च स्क्राॅल में आ सकता है। जिससे यूजर्स के स्पैम और साइबर अटैक जैले जोखिम हो जाते हैं। 

कोरोड़ों की संख्या में भारतीय फेसबुक, व्हाट्सएप जैसी प्लेटफार्म्स का यूज करते हैं। अगर ऐसे में अगर ऐसे ही चलता रहा तो लोगों का भरोसा व्हाट्सएप से घटता दिखाई देगा। प्राइवेसी वाले मसले के बाद तो कई लोगों ने व्हाट्सएर छोड़ टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एप्स का भी रुख किया था। बीते कुछ दिनों से जो भी हुआ उससे साफ प्रतीत होता है कि यूजर्स ने व्हाट्सएप को ये बता दिया कि आपकी मोनोपाॅली नहीं चलेगी। - अभिनय आकाश







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