251 रुपये में फोन देने का झांसा देने वाले मोहित गोयल ने अब किया 200 करोड़ का काजू-किशमिश घोटाला

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 13, 2021   18:04
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251 रुपये में फोन देने का झांसा देने वाले मोहित गोयल ने अब किया 200 करोड़ का काजू-किशमिश घोटाला

251 रुपये में लोगों को स्मार्ट फोन का झांसा देने वाले मोहित गोयल ने अब करोड़ों का काजू-किशमिश घोटाला कर दिया। मोहित गोयल ने दुबई ड्राई फ्रूट्स नाम से एक कंपनी बनाई और लोगों को लूटने में लग गया। नोएडा पुलिस ने इस फर्जी कंपनी का भंडाफोड़ करते हुए 2 लोगों मोहित गोयल और ओमप्रकाश जांगिड़ को गिरफ्तार किया।

फ्रीडम यानी आजादी ये शब्द अपने आप में बहुत मायने रखता है। हमारे गणतंत्र की स्वतंत्रता जिसे, आजादी, आत्म-निर्भरता, भाईचारा, साम्प्रदायिक सद्भाव, आर्थिक व सामाजिक विषमताओं में साम्यभाव तथा राजनैतिक स्वातंत्रय आदि पर्याप्त शब्दों में समझ सकते हैं। लेकिन आज बात आजादी की नहीं करेंगे न ही गणतंत्र की। आज बात करेंगे फ्रीडम की लेकिन आजादी वाले फ्रीडम की नहीं बल्कि फ्रीडम 251 वाले मोहित गोयल की। 

आज से करीब पांच साल पहले की बात है सितंबर का महीना था 2015 की नई नवेली कंपनी रिंगिंग बेल कुछ ही महीने में पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गई। 18 फरवरी, 2016 को एक वए स्मार्टफोन की घोषणा की। वैसे कोई ऐसी खास फीचर नहीं थी जैसा कि आई-फोन या सैमसंग के हर वर्जन का इंतजार करते हैं। लेकिन इस फोन की खास बात थी इसकी कीमत। मात्र 251 रुपये। वो भी 3 जी स्मार्टफोन था। फोन का नाम था फ्रीडम 251। लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया और तीस हजार के लगभग स्मार्टफोन की बुकिंग हो गई। बाद में पता चला कि ये सारा कंपनी के फाउंडर मोहित गोयल का बनाया फर्जीवाड़ा था। 251 रुपये में लोगों को स्मार्ट फोन का झांसा देने वाले मोहित गोयल ने अब करोड़ों का काजू-किशमिश घोटाला कर दिया। 

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कुछ इस तरह हुआ 200 करोड़ का ड्राई फ्रूट्स फ्राॅड

मोहित गोयल ने दुबई ड्राई फ्रूट्स नाम से एक कंपनी बनाई और लोगों को लूटने में लग गया। नोएडा पुलिस ने इस फर्जी कंपनी का भंडाफोड़ करते हुए 2 लोगों मोहित गोयल और ओमप्रकाश जांगिड़ को गिरफ्तार किया। इनके पास से पुलिस को 2 लक्जरी कार, 3 मोबाइल और 60 किलो ड्राई फ्रूट के सैंपल बरामद हुए। पुलिस के अनुसार शुरुआत में ये लोग देश के तमाम हिस्सों से ट्रेडर्स से ड्राई फ्रूट्स को बाजार से ऊंचे दाम पर खरीदते थे और समय से भुगतान कर उनका भरोसा हासिल करते थे। इसके बाद वह बड़े ऑर्डर देने लगता और 40 प्रतिशत का भुगतान तो बतौर एडवांस पेमेंट कर दिया जाता। बाकी की शेष रकम के लिए कहा जाता कि चेक के जरिये किया जाएगा। लेकिन यहीं से शुरू होता था असली खेल। चेक बैंक पहुंचकर बाउंस हो जाता था। इस तरह ड्राई फ्रूट्स का पूरा ऑर्डर तो ले लेते लेकिन भुगतान नहीं करते। फिर बाजार में इन ड्राई फ्रूट्स को बेचकर पैसा कमाते थे। 

40 शिकायत के बाद एक्शन में पुलिस

नोएडा पुलिस के पास करीब 40 शिकायतें मिली। जिसके बाद नोएडा पुलिस ने कंपनी के खिलाफ एक्शन लिया। ये शिकायतें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों के ट्रेडर्स की ओर से की गई थीं। जिसके बाद एक्शन में आई पुलिस और मोहित गोयल और उसके सहयोगी ओमप्रकाश जानगिद को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से कार, 60 किलो ड्राई फ्रूट आदि बरामद हुए। 

बना रखी है लगील टीम

मोहित गोयल ने एक लीगल टीम बना रखी है। फ्राड किए गए रकम का तीस प्रतिशत हिस्सा लीग टीम को जाता है। बदले में वो मोहित कि जमानत करवा देते हैं और फिर मोहित गोयल अपने अगले जालासाजी की ओर चल पड़ता है। इसके अलावा ठगी का शिकार हुए लोग जो आवाज उठाते हैं उनने खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करवा उसे तंग करता हैं। 

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फ्रीडम 251 की ठगी

साल 2016 में 251 रुपये के मोबाइल फोन ने देश-दुनिया में सुर्खियां बटोरी थी। हालांकि इसकी घोषणा के वक्त ये भी दावे किए गए थे कि उस वक्त के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर इस फोन को लांच करेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। लेकिन फ्रीडम 251 के नाम वाली इस फोन की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद इसे बनाने वाली कंपनी रिंगिंग बेल को लेकर तमाम तरह की खबरों ने खलबली मचा दी। नोएडा के सेक्टर 63 में स्थित इस कंपनी ने मोबाइल फोन की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की। लेकिन ऑर्डर इतने आ रहे थे कि इसके चलते रिंगिर बेल की वेबसाइट क्रैश हो गई। इस फोन को दुकान से नहीं खरीदा जा सकता था और न ही किसी ऑनलाइन प्लेटफार्म से। इसके लिए तो ग्राहकों को  रिगिंग बेल की वेबसाउट पर ही जाना पड़ता था। बार-बार क्रैश हो रही वेबसाइट के बाद आनन-फानन में लोग बड़ी तादाद में कंपनी के ऑफिस पहुंचे। मोबाइल खरीदने वालों के अलावा इसका डिस्टि्ब्यूशन लेने के लिए भी कई कारोबारी नोएडा स्थित इस कंपनी के चक्कर काटने लगे। सुर्खियों में आई कंपनी इसका फायदा उठाने की कोशिश में लग गई। अभी कंपनी का प्लान रनिंग प्रोसेस में ही था कि कई तरह की खबरें सामने आने लगी। लोगों ने आरोप लगाए कि आॅनलाइन बुकिंग करवाते समय पैसे पेमेंट होने पर भी रसीद नहीं मिली। तभी नेशनल कंज्यूमर फोरम में कंपनी के फर्जी होने की शिकायत की गई। कंपनी ने दावा किया कि 25 लाख फोन बुक किए गए और जल्दी ही सस्ता स्मार्ट टीवी भी लाया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी ने जून 2016 तक बुकिंग करवाए लोगों को फोन उपलब्ध करवाने का दावा भी किया। लेकिन लगातार आ रही विवादित खबरों से कंपनी ने प्री-बुक करवाने वाले ग्राहकों से पैसे लौटाने की बात कही। 

21 मार्च को बीजेपी नेता किरीट सोमैया की शिकायत पर रिंगिंग बेल के मालिक मोहित गोयल और अशोक चढ्ढा के खिलाफ नोएडा फेज-3 पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए कंपनी के डायरेक्टर हाई कोर्ट चले गए थे। हाई कोर्ट के आदेश पर मोहित गोयल समेत कंपनी के डायरेक्टरों के पासपोर्ट भी जब्त कर लिए गए।

रिंगिंग बेल के सीईओ मोहित गोयल ने साढ़े सात करोड़ यूनिट की डिलिवरी के लिए प्रधानमंत्री मोदी से सहायता मांगी। गोयल ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर डिजिटल इंडिया पहल के तहत सरकार से 50,000 करोड़ रुपये की मांग भी की। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार मोहित गोयल ने 28 जून को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि हम फ्रीडम 251 लेकर आए हैं जो कैश आन डिलिवरी की शर्तों पर पेश कर रहे हैं। लेकिन बीओएम ( बिल ऑफ मैटेरियल) और ब्रिकी मूल्य को लेकर समस्या है। अत: सरकार से सहयता करने का अनुरोध है। 

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बाद में बीजेपी नेता किरीट सोमैया की शिकायत पर रिंगिंग बेल के मालिक मोहित गोयल और उसके सहयोगी के खिलाफ नोएडा थाने में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए कंपनी के डायरेक्टर हाई कोर्ट चले गए। हाई कोर्ट के आदेश पर मोहित गोयल समेत कंपनी के डायरेक्टरों के पासपोर्ट भी जब्त कर लिए गए। नोएडा क्राइम ब्रांच ने इस पूरे मामले में मोहित को क्लीन चिट दे दी। बाद में डिस्ट्रीब्यूशन में हुए फ्राॅड के चलते मोहित को पुलिस ने पकड़ लिया। 3 महीने जेल में रहने के बाद 2018 में उसे जमानत मिल गई। 

हनीट्रैप का जाल

हिंदी में एक प्रचलित कहावत है आदत से मजबूर होना। जेल से छूटने के बाद मोहित गोयल ने एक कंपनी खोल ली और लोगों के साथ धोखाधड़ी करने लगा। 10 जून 2018 को नेताजी सुभाष पैलेस के एक माॅल से तीन लोगों को पुलिस ने धर दबोचा। ये तीनों हनी ट्रैप रैकेट के सदस्य थे। रैकेट ऐसा कि क्राइम में फंसाता या झूठे आरोप लगाता और फिर ब्लैकमेलिंग के जरिये पैसे बनाता। जानकारी के अनुसार जालसाज महिला ने दिल्ली के पांच कारोबारियों को हनीट्रैप में फंसाया। उस पर गैंगरेप का आरोप लगाकर जेल भी भिजवाया। केस वापस लेने की एवज में 2 करोड़ 40 लाख की डील कर करीब आधी रकम भी वसूल ली। लेकिन 30 लाख लेने के चक्कर में पुलिस ने धर लिया। लेकिन गैंगरेप के मामले को सुलटाने के लिए जो तीन लोग धरे गए उनमें से एक रिंगिंग बेल के मोहित गोयल भी थे।

विदेश से की है पढ़ाई

ठगी के यह नए-नए आइडिया लाने वाला मोहित उच्च शिक्षित है, उसने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी से पढ़ाई की है। जानकारी के अनुसार, मोहित ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट आरसी कॉन्वेंट स्कूल शामली से की। उसने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री नोएडा की एक निजी यूनिवर्सिटी से प्राप्त की और एमबीए की डिग्री वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी न्यू साउथ वेल्स से हासिल की है। मोहित के पिता की शामली में किराना की दुकान है।

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अब फिर से मोहित गोयल नए मामले में धरे गए हैं। एडीसीपी के अनुसार मोहित ने फर्जीवाड़ा कर करोड़ों की कमाई की है। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से इसे नोएडा सेक्टर 62 में गेम्स एप बनाने की कंपनी चला रहा है। यह कंपनी एप कंपनी वीआरके गेम्स के नाम से चल रही है। 

नोएडा सेक्टर 62 में कंपनी के दफ्तर में पुलिस को कई डायरियां मिली है। बताया जा रहा है कि इनके जरिये उसके और काले कारनामों के चिट्ठे खुलेंगे।- अभिनय आकाश







गौरवशाली गणतंत्र के 72 साल: 26 जनवरी 1950, 10 बजकर 18 मिनट पर हमें हुई थी अस्तित्व की प्राप्ति

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 25, 2021   14:07
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गौरवशाली गणतंत्र के 72 साल: 26 जनवरी 1950, 10 बजकर 18 मिनट पर हमें हुई थी अस्तित्व की प्राप्ति

72 साल पहले घड़ी में 10 बजकर 18 मिनट हो रहे थे। जब 21 तोपों की सलामी के साथ भारतीय गणतंत्र का ऐतिहासिक ऐलान हुआ था। डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले रहे थे। एक महान देश की अद्भुत यात्रा शुरू हो रही थी।

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से, अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा।।

 कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा।।

दिल्ली सज धज कर तैयार है बलिदान समर्पण उपलब्धि के अभूतपूर्व लम्हे को मनाने के लिए। क्या क्या नज़र आएगा राजपथ पर इस परेड में वो सब हम आपके सामने। इसके साथ ही बताएंगे कि भारत गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य अतिथि का चयन कैसे करता है? "जितने लोग देश हित के लिए कुर्बान हो गए हैं। जिन्होंने अपना अपना सबकुछ त्याग दिया है। जो जान की बाज़ी लगाकर इस संसार से उठ गए हैं। वो सब उस बीज की तरह आज भारत की स्वतंत्रता के रूप में पल्लवित और प्रफुल्लित होकर हमें फल देने लगे हैं।''

72 साल पहले घड़ी में 10 बजकर 18 मिनट हो रहे थे। जब 21 तोपों की सलामी के साथ भारतीय गणतंत्र का ऐतिहासिक ऐलान हुआ था। डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले रहे थे। एक महान देश की अद्भुत यात्रा शुरू हो रही थी। वैसे तो राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक जाने वाली सड़क को पूरा देश राजपथ के नाम से जानता है। इसी सड़क पर हर साल देश अपने गणतंत्र की शक्ति और साहस का प्रदर्शन परेड के आयोजन के माध्यम से करता है। आज़ादी से पहले इस मार्ग को 'किंग्स वे' कहा जाता था, जिसका अर्थ है- राजा के गुज़रने का रास्ता। आज़ादी के बाद इसका नाम राजपथ कर दिया गया। लेकिन क्या आप इस बात से अवगत हैं कि 1950 से लेकर 1954 तक परेड का आयोजन स्थल राजपथ नहीं हुआ करता था। इन सालों में 26 जनवरी की परेड का आयोजन इरविन स्टेडियम यानी वर्तमान का नेशनल स्टेडियम, किंग्सवे, लाल किला और रामलीला मैदान से कदमताल करता हुआ साल 1955 में राजपथ की ओर अग्रसर हुआ। पहली बार गणतंत्र दिवस पर अतिथि के तौर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकुर्णों सन 1950 में भारत पधारे थे। 1954 में भूटान के राजा जिग्मे डोरजी मुख्य अतिथि बने थे। 26 जनवरी की परेड राष्ट्रपति के स्वागत के साथ शुरू होती है। साथ ही 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है। लेकिन वास्तव में 21 तोपों से गोला नहीं दागा जाता है बल्कि भारतीय सेना के 7 तोप जिन्हें 25 पौन्डर्स कहा जाता है के द्वारा तीन-तीन राउंड की फायरिंग की जाती है। 1955 में राजपथ पहली बार गणतंत्र के परेड से रूबरू हुआ तो इसके गवाह बने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद। हर साल गणतंत्र दिवस और बीटिंग रिट्रीट परेड में बाइबल से लिया गया गीत 'अबाइड विथ मी' बजाया जाता था, जिसे महात्मा गांधी का पसंदीदा गीत कहा जाता है। लेकिन साल 2020 से इसका स्थान भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम ने ले लिया। साल 1960 में सोवियत संघ के मार्शल क्लीमेंट येफ्रेमोविक वारोशिलोव गणतंत्र दिवस परेड के मेहमान बने थे। इसके अगले वर्ष ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ भारत आईं। साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला साल 1995 में गणतंत्र दिवस के मेहमान बने थे। इसके अलावा लैटिन अमेरिका, ब्राजील, यूनाइटेड किंगडम, मालद्वीव, माॅरीशस और नेपाल को गणतंत्र दिवस में शरीक होने का अवसर मिला।

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वर्ष 2007 में रूस के ब्लादिमीर पुतिन भारत के खास मेहमान बनकर सामने आए। 2015 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत आए। 2016 में फ्रांस के राष्ट्रपति फैंकोइस होलांद भारत के गणतंत्र दिवस में आए। फ्रांस ने पांचवीं बार शिरकत की।

भारत के गणतंत्र दिवस में विशेष सम्मान के लिए निमंत्रण क्यों भेजा जाता है

गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि की यात्रा किसी भी विदेशी उच्च गणमान्य व्यक्ति की राज्य यात्रा के समान है। यह सर्वोच्च सम्मान है जो भारतीय प्रोटोकॉल के मामले में एक अतिथि को दिया जाता है। मुख्य अतिथि को राष्ट्रपति भवन में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। वह शाम को भारत के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में भाग लेते हैं। वह राजघाट पर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं। उनके सम्मान में प्रधानमंत्री द्वारा लंच का आयोजन किया जाता है।

इंडियन एक्सप्रेस ने पूर्व भारतीय विदेश सेवा अधिकारी और 1999 से 2002 के बीच प्रोटोकाॅल के प्रमुख के रूप में काम करने वाले मनबीर सिंह के हवाले से अपनी रिपोर्ट में लिखा कि मुख्य अतिथि की यात्रा प्रतीकात्मकता से भरपूर होती है। यह मुख्य अतिथि को भारत के गौरव और खुशी में भाग लेने के रूप में चित्रित करता है। इसके साथ ही भारत के राष्ट्रपति और मुख्य अतिथि द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए दो लोगों के बीच मित्रता को भी दर्शाता है।

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भारत गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य अतिथि का चयन कैसे करता है

सरकार सावधानी से विचार करने के बाद किसी राज्य या सरकार के प्रमुख को अपना निमंत्रण देती है। यह प्रक्रिया गणतंत्र दिवस से लगभग छह महीने पहले शुरू होती है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार विदेश मंत्रालय द्वारा कई मुद्दों पर विचार किया जाता है, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण है संबंधित देश के साथ भारत के संबंध। अन्य कारकों में राजनीतिक, आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध, पड़ोस, सैन्य सहयोग, क्षेत्रीय समूहों में प्रमुखता शामिल हैं। ये सभी विचार अक्सर अलग-अलग दिशाओं में इंगित करते हैं - और मुख्य अतिथि चुनना, इसलिए, अक्सर एक चुनौती बन जाता है।

अतिथि की उपलब्धता के बाद विदेश मंत्रालय को चाहिए होती है मंजूरी

एमईए को विचार-विमर्श के बाद प्रधानमंत्री की स्वीकृति चाहिए होती है। जिसके बाद राष्ट्रपति भवन की मंजूरी मांगी जाती है। इसके बाद, संबंधित देशों में भारत के राजदूत संभावित मुख्य अतिथियों की उपलब्धता और कार्यक्रम का पता लगाने की कोशिश करते हैं। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, संसद का सत्र या महत्वपूर्ण राज्य यात्रा जैसे कोई अन्य महत्वपूर्ण कार्य उच्च गणमान्य व्यक्ति के पास उस समय हो। एक बार यह सारी प्रक्रिया पूरी हो गई उसके बाद विदेश मंत्रालय का प्रादेशनिक विभाग सार्थक वार्ता की दिशा में काम करते हैं। जबकि प्रोटोकॉल के प्रमुख कार्यक्रम के विवरण पर काम करते हैं। प्रोटोकॉल चीफ आगंतुक के विस्तृत कार्यक्रम के बारे में समकक्ष को समझाते हैं। गणतंत्र दिवस समारोह के बारे में इसके साथ ही सैन्य परिशुद्धता के साथ मिनट-दर-मिनट का पालन किया जाता है।

यदि परामर्श प्रक्रिया के दौरान असहमति हो तो क्या होगा?

यह एक महत्वपूर्ण पहलु है क्योंकि समय और बैठकों पर कुछ चर्चाएँ हो सकती हैं। गणतंत्र दिवस समारोह और उनके कार्यक्रम के संबंध में कोई लचीलापन नहीं होता है। कोई मुख्य अतिथि नहीं रहा है जिन्होंने भारत की प्रोटोकॉल आवश्यकताओं या कार्यक्रम के समय का पालन न किया हो। यह गौर करने वाली बात है कि दुनिया के ताकतवर मुल्क अमेरिक के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा जब मुख्य अतिथि के रूप में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए तो आवश्यकता अनुरूप वो भी पूरे कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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अबकी बार 26 जनवरी को क्या-क्या दिखेगा?

हर साल 26 जनवरी के मौके पर भव्य परेड की तस्वीरों से देश तो अक्सर दो-चार होता है। परेड में अलग-अलग प्रदेशों की कला-संस्कृति की झांकियां दिखती हैं। परेड में भारतीय सेना के सभी कैटगरी की मार्च फास्ट भी देखने को मिलती है। लेकिन इस बार की 26 जनवरी की परेड और भी खास होने वाली है। हवा को चिड़ते जब राफेल की रफ्तार देखकर दुश्मन दहल जाएगा। सुखोई की उड़ान देखकर पाकिस्तान थर-थर कांपेगा। तेजस की उड़ान हिंदुस्तान की ताकत का अहसास कराएगी। शौर्य पराक्रम और साहस का प्रदर्शन होगा राजपथ पर जिसे देख कर हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। एयर फोर्स की झांकी में महिला पायलट शामिल होंगी। इस बार गणतंत्र दिवस पर राफेल गरजने के लिए तैयार है। राजपथ पर होने वाली परेड में वायुसेना के 42 एयरक्राफ्ट शामिल होंगे। लेकिन सबकी नज़र राफेल पर ही होगी। क्योंकि पहली बार होगा जब पूरा देश राफेल की ताकत राजपथ पर देखेगा। राफेल ही वर्टिकल चार्ली फॉर्मेशन के साथ फ्लाईपास्ट का समापन करेगा। वर्टिकल चार्ली फॉर्मेशन में विमान कम ऊंचाई पर उड़ान भरता है। सीधे ऊपर जाता है और फिर कलाबाज़ी खाते हुए एक ऊंचाई पर स्थिर हो जाता है। एक राफेल, दो जगुआर और दो मिग-29 विमान होंगे, इनके ठीक पीछे त्रिनेत्र फॉर्मेशन होगा। त्रिनेत्र के पीछे सांरग हेलीकाॅप्टर होंगे जो विजय फॉर्मेशन में फ्लाई पास्ट करेंगे। लास्ट में एक राफेल फाइटर आएगा जो कि आकर ठीक सामने वर्टिकल चार्ली फॉर्मेशन के साथ समापन करेगा। गणतंत्र दिवस पर सिर्फ राफेल ही अपना दम नहीं दिखाएगा बल्कि उसका साथ सुखोई भी देगा। हिन्दुस्तान की वायुसेना के वीर जगुआर और तेजस जब करतब दिखाएंगे तो देखने वाले बस देखते रह जाएंगे। भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट्स में से एक भावना कांत गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय वायुसेना की झांकी का हिस्सा होंगी। वो भावना कांत गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाली पहली महिला फायटर पायलट होंगी।

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अयोध्या का राम मंदिर

9 नवंबर 2019 को भक्तों की आस पर कार्तिक के मास में आखिरकार रामलला का वनवास खत्म हुआ था। 5 अगस्त 2020 को क्या हिन्दू क्या मुसलमान सभी अपने भगवान अपने इमामे हिन्द के अद्भूत मंदिर के नींव रखे जाने के साक्षी बने। अयोध्या में भगवान राम के दिव्य और भव्य मंदिर के लिए भूमि पूजन किया गया। लेकिन इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में अयोध्या पर बन रहे राम मंदिर की झांकी भी दिखाई जाएगी। यूपी सरकार ने केंद्र सरकार को इसके लिए प्रस्ताव भेजा था। केंद्र सरकार ने योगी सरकार के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। जिसके बाद गणतंत्र दिवस के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा कि उत्तर प्रदेश से राम मंदिर से जुड़ी झांकी पेश की जाएगी। इसे दो आर्किटेक्ट समेत 25 कारीगरों ने तैयार किया है। पर्यटन विभाग की झांकी में अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी के तीर्थ स्थल को दर्शाया जाएगा।

क्या गायब है

दुनिया में फैला डर, सन्नाटें में शहर, अल्लाह का घर, भगवान का दर, न किसी का आना न किसी का जाना। बच्चों ने पार्क में जाना छोड़ दिया, स्कूलों ने क्लास लगाना छोड़ दिया। छोड़ दिया लोगों ने सिनेमा में जाना, पिकनिक मनाना। सभाएं, आंदोलन, धरना-प्रदर्शन टल गए। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को चुनौती दी, एक-एक दिन में सैकड़ों जाने ली। वैसे तो कोरोवा वैक्सीन के आने से कोरोना का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। लेकिन इस बार के कोरोना काल के बाद इसकी वजह से बदलाव की कुछ झलक गणतंत्र दिवस के परेड कार्यक्रम में भी देखने को मिलेगी।

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस जब दूसरे देशों के राष्ट्रप्रमुख, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाया जाता रहा है। इसी तरह इस बार गणतंत्र दिवस पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जाॅनसन को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। लेकिन ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन के मद्देनजर बोरिस जाॅनसन ने अपना भारत दौरा रद्द कर दिया है। 1966 के बाद पहली बार ऐसा होगा कि कोई विदेशी अतिथि गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल नहीं होगा। 1952 और 1953 में भी गणतंत्र दिवस परेड में कोई मुख्य अतिथि शामिल नहीं हो सका था।

पिछले वर्ष डेढ़ लाख दर्शक गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में थे लेकिन अब इस वर्ष इसे कम करके 25 हजार कर दिया गया है। इसके अलावा मीडियाकर्मियों की संख्या में भी कटौती करके 300 से 200 कर दी गई है।

इस बार की परेड इंडिया गेट के सी हेक्सागाॅन में नेशनल स्टेडियम तक ही जाएगी। हां, झाकियां लाल किले तक जाएगी।

इस बार पूर्व सैनिकों और महिलाओं द्वारा परेड और सेना व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के सैनिकों का मोटरसाइकिल स्टंट को रद्द कर दिया गया है।

15 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को इंडिया गेट लाॅन में अनुमति नहीं दी जाएगी और इस बार स्कूली बच्चों के लिए भी कोई परिक्षेत्र नहीं होगा।

बहरहाल, बदलते हिन्दुस्तान का हर पहलु दुनिया के सामने जाने की होड़ में होगा। आत्म निर्भर भारत की झलक, राम मंदिर की झांकी। राफेल की गर्जना के साथ ही राज्यों की झांकियां भी होंगी। वीरता भी होगी और वीर भी रहेंगे। 15 अगस्त को अगर हिन्दुस्तान ने आजादी के रूप में अपनी नियति से मिलन किया था तो 26 जनवरी को हमे अस्तित्व की प्राप्ति हुई थी। - अभिनय आकाश







आजादी लेकिन पाकिस्तान के बिना और हिन्दुस्तान के साथ, कुछ ऐसी रही है लोन परिवार की कश्मीर को लेकर सोच

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 21, 2021   18:34
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आजादी लेकिन पाकिस्तान के बिना और हिन्दुस्तान के साथ, कुछ ऐसी रही है लोन परिवार की कश्मीर को लेकर सोच

कश्मीर के नेता सज्जाद लोन जिन्हें पीएम मोदी का करीबी भी माना रहा है। कभी फारूक अब्दुल्ला द्वारा उनके पिता पर कश्मीर में बंदूक लाने का जिम्मेदार भी ठहराया जाता है। तो कभी सूबे के राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा लोन को बीजेपी की तरफ से सीएम बनाने की तैयारी की बात भी कह दी जाती है।

पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन जिसमें जम्मू कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं वो अब धीरे-धीरे बिखरने लगी हैं। पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद लोन ने गुपकार गठबंधन से अलग होने का एलान कर दिया है। गुपकार घोषणापत्र गठबंधन के घटक दलों में जारी वर्चस्व और कलह के बारे में उल्लेखित करते हुए कहा कि कोई दल एक-दूसरे को देखना नहीं चाहते। जिसके बाद सज्जाद लोन ने गुपकार गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। बता दें कि डीडीसी चुनावों के परिणाम आने के बाद महबूबा मुफ्ती भी गुपकार गठबंध से किनारा कर रही हैं। वो गुपकार की किसी बैठक में भी शामिल नहीं हुईं। जिसके बाद सज्जाद लोन का ये बड़ा फैसला आया। ऐसे में आज के विश्वेषण में बात करेंगे जम्मू कश्मीर की और कश्मीर के नेता सज्जाद लोन की। जिन्हें पीएम मोदी का करीबी भी माना रहा है। कभी फारूक अब्दुल्ला द्वारा उनके पिता पर कश्मीर में बंदूक लाने का जिम्मेदार भी ठहराया जाता है। तो कभी सूबे के राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा लोन को बीजेपी की तरफ से सीएम बनाने की तैयारी की बात भी कह दी जाती है। कौन हैं कश्मीर का लोन परिवार जो मुफ्ती का भी करीबी रहा और मोदी का भी। 

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सज्जाद लोन को जानने से पहले उनके पिता अब्दुल गनी लोन को जानना बहुत जरूरी है। एक गरीब परिवार में जन्में अब्दुल गनी लोन की चाह शुरू से ही वकील बनने की थी। अपने मकसद में उन्हें कामयाबी भी मिलती है। लेकिन ये उन्हें तो राजनीति में आना था और यही चाह अब्दुल गनी लोन को कांग्रेस के दरवाजे पर लेकर आती है। वो साल 1967 में कांग्रेस से जुड़ते हैं और फिर धीरे-धीरे अपनी सियासत को मजबूत करने की चाह लिए 1978 में जम्मू कश्मीर पीपुल्स काॅन्फ्रेंस का गठन किया। जम्मू कश्मीर में अब्दुल गनी लोन ने राजनीति तब शुरू की जब शेख अब्दुल्ला की लोकप्रियता चरम पर थी। उसी वक्त लोन कश्मीर को और अधिक दिलाने की मांग लिए अब्दुल्ला की सत्ता को चुनौती देने की कोशिश में लग गए। लेकिन शुरुआती दो चुनाव में उन्हें पराजय ही मिलती है। 1983 में 10 वोट से और 1987 को 430 वोटों से। जिसके बाद अब्दुल गनी लोन अलगाववाद के रास्ते पर चल पड़ते हैं। उनके साथ मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के भी लोग साथ आ जाते हैं। अब्दुल गनी लोन कश्मीर को एक स्वतंत्र राज्य के तौर पर देखना चाहते थे। अपनी अलगाववादी कार्यों और बयानों की वजह से उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। पूर्व राॅ चीफ एएस दुलत की किताब कश्मीर द वाजपेयी इयर्स के मुताबिक 1992 में जब लोन जेल से बाहर आए तो उनके दिमाग में बस अलगाववादियों का एक संगठन बनाने की बात थी। कश्मीर द वाजपेयी इयर्स के अनुसार लोन इसके लिए आईएसआई से भी सलाह मशवरा किया था। घाटी में 13 जुलाई 1993 को ऑल पार्टीज हुर्रियत कांफ्रेंस की नींव रखी गई। हुर्रियत कांफ्रेंस का काम पूरी घाटी में अलगाववादी आंदोलन को गति प्रदान करना था। यह एक तरह से घाटी में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के विरोध स्वरूप एकत्रित हुई छोटी पार्टियों का महागठबंधन था। इस महागठबंधन में केवल वही पार्टियां शरीक हुईं जो कश्मीर को वहां के लोगों के अनुसार जनमत संग्रह कराकर एक अलग पहचान दिलाना चाहती थीं। हालांकि इनके मंसूबे पाक को लेकर काफी नरम रहे। ये सभी कई मौकों पर भारत की अपेक्षा पाक से अपनी नजदीकियां दिखाते रहे हैं। 90 के दशक में जब घाटी में आतंकवाद चरम पर था तब इन्होंने खुद को वहां एक राजनैतिक चेहरा बनने की कोशिश की लेकिन लोगों द्वारा इन्हें नकार दिया गया। एपीएचसी  की एग्जिक्‍यूटिव कांउसिल में सात अलग-अलग पार्टियों के सात लोग बतौर सदस्‍य शामिल हुए। जमात-ए-इस्‍लामी से सैयद अली शाह गिलानी, आवामी एक्‍शन कमेटी के मीरवाइज उमर फारूक, पीपुल्‍स लीग के शेख अब्‍दुल अजीज, इत्‍तेहाद-उल-मुस्लिमीन के मौलवी अब्‍बास अंसारी, मुस्लिम कांफ्रेंस के प्रोफेसर अब्‍दुल गनी भट, जेकेएलएफ से यासीन मलिक और पीपुल्‍स कांफ्रेंस के अब्‍दुल गनी लोन शामिल थे। अब्दुल गनी लोन कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के काफी नजदीक हो जाते हैं। ओल्ड टाउन श्रीनगर की ईदगाह में मीरवाइज मौलवी फारुख की 12वीं मेमोरियल सर्विस में शरीक हुए थे तभी 21 मई 2002 को अब्दुल गनी लोन की आतंकिों द्वारा हत्या कर दी जाती है। जब अब्दुल गनी लोन की हत्या हुई तो उनके पुत्र सज्जाद लोन ने अपने पिता की हत्या में आईएसआई का हाथ होने की बात कही थी। लेकिन बाद में अपनी मां के कहने पर उन्होंने अपने आरोप वापस ले लिए थे। सज्जाद की मां हनीफा का कहना था कि मैंने अपने पति को खोया है और अब अपना बेटा नहीं खोना चाहती। बाद में सज्जाद लोन ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया और अलगाववाद की राजनीति की वकालत शुरू कर दी।

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फारूक ने लोन को कश्मीर में बंदूक लाने का जिम्मेदार ठहराया

नेशनल काॅन्फ्रें, के नेता फारूक अब्दुल्ला ने एक बार अब्दुल गनी लोन को कश्मीर में बंदूक लाने का जिम्मेदार ठहराया था। जिसके पीछे अब्दुल्ला ने इतिहास की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व राज्यपाल जगमोहन ने जब उन्हें निलंबित किया था, उस वक्त अब्दुल गनी लोन उनके पास आए थे। उन्होंने कहा था कि वह पाकिस्तान से बंदूक लाएंगे। अब्दुल्ला ने कहा कि उस वक्त मैंने लोन को बहुत समझाया था, लेकिन वह माने नहीं। 

मुशर्रफ से कहा- पाकिस्तान के बारे में चिंता करें

कश्मीर द वाजपेयी इयर्स के अनुसार एक बार अब्दुल गनी लोन पाकिस्तान के जनरल परवेज मुशर्रफ से मिले तो उन्होंने गनी लोन से पूछा कि कश्मीर के हालात कैसे हैं तो इस पर लोन ने फट से जवाब देते हुए कहा कि कश्मीर के बारे में चिंता मत कीजिए, पाकिस्तान को देखिए। आपके कट्टरपंथी उसी हाथ को काट लेंगे जो उन्हें खिलाते हैं। 

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सज्जाद लोन की कश्मीर की सियासत में एंट्री

सज्जाद लोन कश्मीर की आजादी की बात करते रहे लेकिन पाकिस्तान के बिना और हिन्दुस्तान के साथ। मतलब आसान भाषा में समझें तो कश्मीर की और स्वायतता की मांग। साल 2002 में सज्जाद लोन के खिलाफ अलगाववादी उम्मीदवारों के खिलाफ डमी उम्मीदवार उतारने के आरोप भी लगे। बाद में उन्होंने हुर्रियत से अलग होना शुरू कर दिया। कश्मीर को लेकर सज्जाद हमेशा से मुखर रहे और साल 2006 में उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात भी की। 2008 में अमरनाथ हिंसा के बाद खुद को सज्जाद लोन ने अलगाववाद से अलग कर लिया। साल 2008 और 2009 के दौरान सज्जाद लोन ने विधानसभा का चुनाव भी लड़ा लेकिन दोनों बार ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2014 में बारामूला में निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए भी उन्हें हार ही मिली। साल 2014 में उनकी पार्टी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की और बीजेपी-पीडीपी गठबंधन वाली सरकार में मंत्री बने। बाद में कश्मीर में विधानसभा भंग हो गई थी और सूबे में राष्ट्रपति शासन लग गया था। हाल ही में हुए डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव में जेकेपीसी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की है। सज्जाद लोन को पीएम मोदी का करीबी भी माना जाता है। पीएम मोदी के कश्मीर दौरे के दौरान वह उनके साथ नजर भी आ चुके हैं। सज्जाद लोन की एक बहन हैं जिनका नाम शबनम लोन है। वह सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं और कश्मीर मुद्दे को लेकर काॅलम लिखती हैं। -अभिनय आकाश







जानें कौन हैं एलेक्सी नवालनी, जिसे दो बार जहर देकर मारने की साजिश रचने के आरोप रूस के राष्ट्रपति पर लगे

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 19, 2021   18:10
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जानें कौन हैं एलेक्सी नवालनी, जिसे दो बार जहर देकर मारने की साजिश रचने के आरोप रूस के राष्ट्रपति पर लगे

एलेक्सी नवालनी को जर्मनी से मास्को आने पर हिरासत में ले लिया गया है और फिर अदालत ने उन्हें 30 दिन के लिए जेल भेज दिया है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपियन काउंसिल और ब्रिटेन सहित पश्चिम देशों ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

2011 का साल और दिल्ली के रामलीला मैदान का वो शोर। जब गांधी की टोपी पहले अन्ना हजारे रघुपति राघव राजा राम के बोल के साथ अनशन पर बैठे थे। पूरा देश उस वक्त मैं भी अन्ना तू भी अन्ना अब तो सारा देश है अन्ना के नारे के साथ अन्नामय हो गया था। लेकिन ठीक उसी वक्त दिल्ली से 4195 किलोमीटर दूर रूस में एक संगठन की नींव रखी जा रही थी। नाम- एंटी करप्शन फाउंडेशन। मकसद- रूस की ब्लादिमीर पुतिन सरकार के कथित भ्रष्टाचार को उजागर करना। आज की कहानी है एक ऐसे नेता कि जिसके पोस्टर 2017 में पुतिन विरोधी आंदोलन में दिखे। उसी राजनेता को दो बार जहर देकर मारने की कोशिश की गई और आरोप रूस के राष्ट्रपति पर लगे। वो नेता जिसके इलाज की पेशकश फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने की। वो नेता जिसके बारे में अमेरिकी अखबार के एक बार लिखा कि The Man vladimir Putin fears most यानी वो आदमी जिससे ब्लादिमीर पुतिन को सबसे ज्यादा डर लगता है। ये कहानी है पुतिन के खिलाफ प्रदर्शन के लिए 3 बार जेल जाने वाले और चुनाव लड़ने की कोशिश में ईसी द्वारा अयोग्य करार दिए जाने वाले पुतिन विरोधी रूस के सबसे बड़े नेता एलेक्सी नवालनी की।

सबसे पहले बात वर्तमान की करते हैं। एलेक्सी नवालनी को जर्मनी से मास्को आने पर हिरासत में ले लिया गया है और फिर अदालत ने उन्हें 30 दिन के लिए जेल भेज दिया है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका. यूरोपियन काउंसिल और ब्रिटेन सहित पश्चिम देशों ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मास्को कोर्ट द्वारा नवलनी को निलंबित जेल की शर्तों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए 15 फरवरी तक जेल में रखने का आदेश दिया। नवालनी को गबन के आरोप में यह सजा सुनाई गई थी और उनके खिलाफ तीन और आपराधिक मामले दर्ज हैं। 

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रूस के कई दशकों से राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के जन्मदिन वाले दिन यानी सात अक्टूबर 2017 की बात है। रूस की राजधानी मास्को के पुश्किन स्क्वायर पर सैकड़ों लड़के-लड़कियां इकट्ठे हुए। पुतिन के विरोध वाली तख्तियां हाथों में लिए ये लोग जिसमें लिखा था पुतिन इज ए थीफ, पुतिन को राष्ट्रपति पद से हटाओ। पुतिन और उनकी सरकार के खिलाफ 20 से ज्यादा रूस के शहरों में हो रहा था। उन प्रदर्शनकारियों के पास एक पोस्टर में युवा चेहरे वाला पोस्टर भी लहराया जा रहा था और उसकी जिंदाबाद के नारे भी लगाया जा रहा था। 

पेश से वकील एलेक्सी नवालनी का रूस की राजनीति में उभार 2008 से दिखता है । जब वो रूस सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलना शुरू करते हैं। राष्ट्रवादी नेता के तौर पर उनकी छवि बन जाती है। सरकारी कांट्रैक्ट में भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाते हैं। ब्लाॅगिंग और यूट्यूब के जरिये इन तमाम मुद्दों को उठाते हुए रूस में लोकप्रिय हो जाते हैं। एलेक्सी ने एंटी करप्शन फाउंडेशन नाम का संगठन बनाया। और इसके जरिये भ्रष्टाचार पर पुतिन सरकार को सीधे ललकारने लगे। आलम ये हुआ कि साल 2012 में अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल ने अपने खबर की शीर्षक में एलेक्सी का परिचय देते हुए एक खबर प्रकाशित की The Man vladimir Putin fears most यानी वो आदमी जिससे ब्लादिमीर पुतिन को सबसे ज्यादा डर लगता है। इस लेख के मुताबिक सरकार के समर्थक टीवी और अखबार एलेक्सी को सीआईए का एजेंट बताते हैं। हिटलर से उसकी तुलना करते हैं। रूस के सरकारी चैनलों पर तो एलेक्सी को दिखाने पर भी पाबंदी है। 2013 में उन्होंने मास्को में मेयर का चुनाव लड़ने का ऐलान किया। वो लड़े लेकिन पुतिन के उम्मीदवार से हार गए। एलेक्सी ने चुनाव में धांधली का इल्जाम लगाया। उसके बाद उनपर कई केस लगाए। एक में एलेक्सी को पांच साल की सजा हुई और दूसरे में साढ़े तीन साल की। कुछ साल जेल में रहने के बाद एलेक्सी नजरबंद कर दिए गए। 2016 में बाहर आए तो फिर प्रदर्शन जारी कर दिया। 2017 में उन्हें पुतिन के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए 3 बार जेल हुई। साल 2017 में ही उन पर हमला हुआ और इस हमले की वजह से एलेक्सी की दाहिनी आंख केमिकल बर्न से प्रभावित हुई। 2018 में रूस के राष्ट्रपति के चुनाव के वक्त एलेक्सी के पुतिन को तगड़ी चुनौती देने के कयास लगाए जा रहे थे। तभी चुनाव आयोग ने एलेक्सी को अयोग्य घोषित कर दिया गय। लेकिन जुलाई 2019 में रूस में विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने की वजह से उन्हें 30 दिन की जेल हुई। जेल में ही उनकी तबीयत बिगड़ी और आरोप लगे कि एलेक्सी को जहर देने की कोशिश हुई है। 20 अगस्त 2020 को रूस के साइबेरिया से एक विमान मास्को के लिए उड़ान भरता है।

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विमान के उड़ान भरने के दौरान ही उसमें बैठे पैसेंजर एलेक्सी नवालनी बीमार हो गए। मामला गंभीर हुआ तो प्लेन की इमरजेंसी लैंडिग करनी पड़ी और नवालनी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पता चला कि नवालनी को जहर दिया गया। जिसके बाद शक जताया गया कि एयरपोर्ट पर जिस कैफे में एलेक्सी नवालनी ने चाय पी थी उसमें जहर मिला थ। एलेक्सी की प्रेस सेक्रेटरी ने ट्वीट करके बताया कि एलेक्सी को जहर दिया गया है। लेकिन डक्टर कहते हैं कि एलेक्सी को जहर नहीं दिया गया है। जर्मनी ने तो अपना एक एयर एंबुलेंस भी रूस के साइबेरिया में भेज दिया। जिसके बाद उन्हें जर्मनी लाया गया। जहां वे कोमा में रहे। वहीं जर्मनी ने रूस पर आरोप लगाया कि रूस ने एलेक्सी को नोविचोक नाम का जहर दिया। 

वैसे रूस की राजनीति में विरोधियों को जहर देकर मारने जैसे कई तथ्य और रिपोर्ट समय-समय पर सामने आते रहते हैं। विकीपीडिया में भी List of soviet and Russian Assassinations लिखने पर उन नामों का उल्लेख मिलता है जिन्हें कथित तौर पर सत्ता पार्टी द्वारा जहर देकर मारने की कोशिश हुई। साल 2006 में अलेक्जेंडर लिटनिवेनको को रेडियो एक्टिव त्तव पोलोनियम 210 देकर मारने जैसी खबरें स्काई न्यूज की एक रिपोर्ट मं प्रकाशित की गई। वहीं 1978 में जाॅर्जी मार्कोव नाम के लेखक की मौत हो गई, जिसके सालों बाद ये खुलाया हुआ कि रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी ने जहर देकर जाॅर्जी की हत्या करवाई थी।- अभिनय आकाश







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