'महाराजा' के जाने के बाद सिंधिया के पास सिर्फ नाम का रह गया राज-पाट? जानें सिविल एविएशन मिनिस्ट्री क्या-क्या काम करती है

'महाराजा' के जाने के बाद सिंधिया के पास सिर्फ नाम का रह गया राज-पाट? जानें सिविल एविएशन मिनिस्ट्री क्या-क्या काम करती है

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास देश में हवाई अड्डों से लेकर हवाई यातायात तक का पूरा नियंत्रण होता है। देश में उड़ान भरने वाली हर एयरलाइंस को लेकर नीतियां बनाना, उसके रूट का निर्धारण करना, टाइम टेबल आदि सभी कुछ इसी मंत्रालय द्वारा तय किया जाता है। इस मंत्रालय के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण हिस्से हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाते हैं।

टाटा सन्स ने बीते दिनों एयर इंडिया की बोली जीती ली। विनिवेश सचिव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 18,000 करोड़ रुपये में एयर इंडिया की बोली जीती है। 4 अक्टूबर को टाटा सन्स की बोली को मंजूरी दी गई। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल जो इन दिनों मजाकिया लहजे में ही सही लेकिन चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब भारत सरकार के पास एक भी एयर लाइन्स नहीं बची। फिर इससे जुड़े मंत्रालय जिसे हम नागरिक उड्डयन मंत्रालय और अंग्रेजी में कहे तो सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के नाम से जानते हैं। उनके पास और कोई काम नहीं रह गया? क्या एयर इंडिया के सरकारी हाथों से जाने के बाद इस मंत्रालय का जिम्मा संभालने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अब खाली हो गए हैं? दरअसल, कांग्रेस नेता समेत कई लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर इससे संबंधित पोस्ट किए जा रहे हैं और इसके साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया का मजाक भी बनाया जा रहा है। कांग्रेस के नेता उदित राज ने ट्विटर पर लिखा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जी किस बात के जहाजरानी मंत्री रह गए जब नैशनल ऐरलाइन ही बिक गई।

वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि एक बात पूछनी थी ..!! जब एयर इंडिया बिक ही गया है तो फिर, "ज्योतिरादित्य सिंधिया" जी किस चीज़ के मंत्री है..?

ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि क्या सच में एयर इंडिया के बिकने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय और इसके मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास कोई काम नहीं बचा है? 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास देश में हवाई अड्डों से लेकर हवाई यातायात तक का पूरा नियंत्रण होता है। देश में उड़ान भरने वाली हर एयरलाइंस को लेकर नीतियां बनाना, उसके रूट का निर्धारण करना, टाइम टेबल आदि सभी कुछ इसी मंत्रालय द्वारा तय किया जाता है। इस मंत्रालय के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण हिस्से हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाते हैं। 

  • डॉयरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए)
  • एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (एईआऱए)
  • ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस)
  • कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस)
  • एयरक्रॉफ्ट एक्सीडेंट इनवेंस्टीगेशन ब्यूरो (एएआईबी)
  • एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया
  • पवन हंस हेलीकॉप्टर लिमिटेड (पीएचएल)

डॉयरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी डीजीसीए

18 फरवरी 1911 को कुंभ मेला के अवसर पर पहली एयरमेल सेवा भारत में इलाहाबाद में शुरू की गई थी। इसके परिणामस्वरूप भारत में नागरिक उड्डयन की शुरुआत हुई। नागरिक उड्डयन का अलग विभाग अप्रैल 1927 में स्थापित किया गया था। भारत के अंदर हवाई जहाज और उड्यन का संचालन प्रोएक्टिव और सेफ रखना ही इसका मुख्य विजन है। अगर सरल भाषा में समझे तो जिस तरीके से रोड पर चलने वाले वाहनों के लिए जो हेड ऑफिस होती है वो आरटीओ ऑफिस होती है। उसी तरह हवा में उड़ने वाले विमानों का हेड ऑफिस डीजीसीए होता है। इसका मुख्य काम होता है हवाई जहाजों या उड्यन से जुड़ी घटना या दुर्घटना की जांच पड़ताल करना और फिर उससे जुड़ी रिपोर्ट को जारी करना। इसके अलावा ये पीपीएल यानी प्राइवेट पायलट लाइसेंस व स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (एसपीएल) और कॉमर्सियल पायलट लाइसेंस को जारी करने का काम करती है। ये विभाग सिविल एविएशन मिनिस्ट्री को ही रिपोर्ट करता है। 

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एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (एईआऱए)

भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 (एईआरए अधिनियम) पारित किया गया जिसने AERA को एक वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया। यह इस बात को ध्यान में रखते हुए स्थापित किया गया था कि देश को एक ऐसे स्वतंत्र नियामक की आवश्यकता है जिसके पास पारदर्शी नियम हों और जो सेवा प्रदाताओं के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हितों का भी ध्यान रख सके। एईआरए प्रमुख हवाई अड्डों पर वैमानिकी सेवाओं (हवाई यातायात प्रबंधन, विमान की लैंडिंग एवं पार्किंग, ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएँ) के लिये टैरिफ और अन्य शुल्क (विकास शुल्क तथा यात्री सेवा शुल्क) नियंत्रित करता है। सरल भाषा में कहे तो ये एयरपोर्ट पर खर्च-पानी का हिसाब-किताब रखता है। जिसके बाद संबंधित खर्च का हिसाब-किताब लगाकर सिविल एविएशन मिनिस्ट्री को बताया जाता है।

ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस)

10 सितम्बर 1976 को इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण होने पर गठित पाण्डेय समिति की सिफारिशों के उपरांत जनवरी 1978 में नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो की स्थापना नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) में एक प्रकोष्ठ के रुप में की गयी थी। इस प्रकोष्ठ का मुख्य उत्तरदायित्व नागर विमानन सुरक्षा संबंधी मामलों का समन्वय, निगरानी, निरीक्षण तथा कार्मिकों का प्रशिक्षण कार्य था। जून 1985 में कनिष्का हादसे के परिणाम स्वरुप 01 अप्रैल 1987 को नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो को नागर विमानन मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वतंत्र विभाग के रुप में मान्यता प्रदान की गयी। सुरक्षा नियमों तथा विनियमों के अनुपालन का अनुरक्षण करना तथा सुरक्षा आवश्यकताओं का सर्वेक्षण करना। यह सुनिश्चित करना कि सुरक्षा नियंत्रणों का अनुपालन करने वाले व्यक्ति पूर्णतया प्रशिक्षित हैं तथा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने हेतु सभी अपेक्षित दक्षताएं रखते हैं। विमानन सुरक्षा मानकों की योजना बनाना तथा समन्वयन करना। सुरक्षा कर्मियों की कार्य दक्षता तथा सतर्कता की जांच करने के लिए औचक निरीक्षण करना। विभिन्न एजेंसियों की आकस्मिक योजनाओं की पर्याप्तता और प्रचालनात्मक तैयारियों का परीक्षण करने हेतु छद्म अभ्यास कराना।

कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस)

कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी नागर विमानन मंत्रालय तथा भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्यरत है। ये रेल प्रचालन की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर कार्य करता है और रेल अधिनियम(1989) में निर्धारित कतिपय सांविधिक कार्यों से प्रभारित है। आसान भाषा में कहे तो एविएशन मिनिस्ट्री के पास रेल की भी एक जिम्मेदारी है। सीआरएस का काम किसी भी रूट पर रेल चलने से पहले ये जांच करना कि सब कुछ सही है कि नहीं। सीआरएस से हरी झंडी मिलने के बाद ही रेल पटरी पर दौड़ती है। दरअसल, इसके पीछे की वजह है कि जिन इंजीनियरों ने पटरी बिछाई और उस पर रेल चलाने की तैयारी कर रहे हैं, वो अपने ही बनाए प्रोजेक्ट की सुरक्षा जांच कैसे कर पाएंगे। इसलिए ये काम कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी के जिम्मे आता है। आयोग का सर्वाधिक महत्वापूर्ण दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि यात्री यातायात के लिए आरंभ होने वाली कोई नई लाइन यात्री यातायात के वहन के हर दृष्टिकोण से सुरक्षित है। यह अन्यआ कार्यों पर भी लागू है जैसे आमान परिवर्तन, लाइन दोहरीकरण तथा मोजूदा लाइनों का विद्युतीकरण। आयोग भरतीय रेलों में हुई गंभीर रेल दुर्घटनाओं की सांविधिक जांच भी करता है और भारत में रेल की सुरक्षा में सुधार के लिए सिफारिशें भी करता है।

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एयरक्रॉफ्ट एक्सीडेंट इनवेंस्टीगेशन ब्यूरो (एएआईबी)

एएआईबी नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार का एक प्रभाग है जो भारत में विमान दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच करता है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के मानकों और अनुशंसित प्रथाओं (एसएआरपी) का पालन करने के लिए एक अलग जांच एजेंसी की स्थापना की गई थी।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण या एएआई एक वैधानिक निकाय है, जो नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। किसी भी सिविल एय़रपोर्ट का डिजाइन, रखरखाव व ऑपरेशन कैसे होगा, ये अथॉरिटी ही तय करती है।

यात्री टर्मिनलों का निर्माण, आशोधन एवं प्रबंधन

अंतरराष्ट्रीय तथा घरेलू हवाईअड्डों पर कार्गो का विकास तथा प्रबंधन।

हवाईअड्डों पर यात्री टर्मिनलों पर यात्री सुविधाओं तथा सूचना प्रणाली का प्रावधान।

प्रचालनिक क्षेत्र यथा रनवे, एप्रन, टैक्सीर वे आदि का विस्तारर तथा सुदृढ़ीकरण।

विजुअल एैड्स का प्रावधान

रडार और कम्युनिकेशन की दूसरी तकनीक कैसे, कहां इस्तेमाल करनी है। 

पवन हंस हेलीकॉप्टर लिमिटेड

हेलीकॉप्टर सेवाएं अब भारत में नागरिक उड्डयन का एक महत्वपूर्ण घटक हैं। भारत सरकार के प्रमुख हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता, पवन हंस दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी हेलीकॉप्टर कंपनी के रूप में विकसित हो गया है, जो 43 हेलीकॉप्टरों के बेड़े का रखरखाव और संचालन करती है।  इन्हें पर्सनल इस्तेमाल के लिए किराए पर लिया जा सकता है, दुर्गम इलाकों में बचाव के काम भी आते हैं, वीआईपी मूवमेंट और कॉर्पोरेट सर्विसेज आदि का काम भी ये हेलिकॉप्टर कंपनी करती है।

कुल मिलाकर देखें तो  एक सिविल एविएशन मिनिस्टर का काम किसी विमान कंपनी से कहीं ज्यादा बड़ा है। ऐसे में अगर कोई एयर लाइन्स कंपनी के जाने के बाद मंत्रालय से जुड़े काम को लेकर अज्ञानता दिखाए तो उसे आप सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के काम बता भी सकते हो और इससे जुड़े मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के काम गिनवा भी सकते हो। 

-अभिनय आकाश