लोगों तक पहुंचने से पहले क्यों बर्बाद हो रही वैक्सीन, जितनी डोज मिल रही उससे अधिक टीका कैसे लगवा रहा केरल?

लोगों तक पहुंचने से पहले क्यों बर्बाद हो रही वैक्सीन, जितनी डोज मिल रही उससे अधिक टीका कैसे लगवा रहा केरल?

कोरोना को काबू में करने का यही फॉर्मूला है कि लापरवाही ना बरती जाए और वैक्सीनेशन फुल स्पीड से हो। देश में 20 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो चुका है। जहां अभी भी देश की एक बड़ी आबादी का टीकाकरण करना बड़ी चुनौती है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के साथ देशभर में टीकाकरण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

अमेरिका के बाद भारत कोविड-19 टीकों की 20 करोड़ से अधिक खुराक लगाने वाला दुनिया का दूसरा देश बन गया है। भारत ने 130 दिन में यह टीकाकरण पूरा किया। ये मामूली बात नहीं है, लेकिन ये आंकड़ा और बढ़ सकता था। अगर वैक्सीन की बर्बादी न होती। जिससे कुछ राज्यों पर सवाल उठे। वैक्सीन वेस्टेड का पूरे देश में प्रतिशत औसतन साढ़े छह फीसद है। तो  झारखंड में 37.3 प्रतिशत वैक्सीन की बर्बादी हो रही है। वैक्सीन की बर्बादी के मामले में 30.2 प्रतिशत के साथ छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर है। तमिलनाडु-  15.5%, जम्मू कश्मीर- 10.8% और मध्य प्रदेश- 10.7% के साथ तीसरे, चौथे और पांचवे पायदान पर है। 

ये समझना भी जरूरी है कि ये वैक्सीन वेस्टेज क्यों हो रहा है? क्योंकि एक डोज का बर्बाद होने का मतलब ये है कि किसी एक व्यक्ति का वैक्सीनेशन नहीं होना। जो कि इस वक्त सही नहीं है जबकि कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन के मिशन पर सरकारें लगी हैं और तेजी से बढ़ते नए मामलों के बीच वैक्सीनेशन की स्पीड बढ़ाना भी जरूरी है। कोरोना को काबू में करने का यही फॉर्मूला है कि लापरवाही ना बरती जाए और वैक्सीनेशन फुल स्पीड से हो। देश में 20 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो चुका है। जहां अभी भी देश की एक बड़ी आबादी का टीकाकरण करना बड़ी चुनौती है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के साथ देशभर में टीकाकरण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स ने कयास लगाया है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर अपने अवसान के समीप है और तीसरी लहर को लेकर चर्चाओं का दौर भी जारी है। वहीं लगातार टीके की बर्बादी सरकार के लिए चिंता का कारण है। इस बर्बादी से बचने के क्या तरीके निकाले जा रहे हैं। ये भी हम आपको बताते हैं। सबसे पहले आपको वैक्सीन की बर्बादी में शीर्ष स्थान रखने वाले राज्यों से अवगत कराते हैं। 

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वैक्सीन बर्बाद करने वाले टॉप पांच राज्य

झारखंड- 37.3%

छत्तीसगढ़- 30.2%

तमिलनाडु-  15.5%

जम्मू कश्मीर- 10.8%

मध्य प्रदेश- 10.7%

वैक्सीन बर्बाद क्यों हो रही है?

जहां एक तरफ देश में कोरोना वैक्सीन की कमी की खबरें लगातार आ रही हैं और जिसकी वजह से 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण भी कई राज्यों में प्रभावित हो रहा है। लेकिन दूसरी तरफ वैकस्सनी की बर्बादी की खबर परेशान करने वाली है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर ये वैक्सीन बर्बाद क्यों हो रही है? ये जानना आपको बेहद ही जरूरी है। हम आपको बता देते हैं कि दरअसल, कोवीशील्ड की एक शीशी में 10 डोज होती हैं। यानी 1 शीशी के अंदर 10 डोज हैं। कोवैक्सीन की एक शीशी में 20 डोज हैं। आइस बॉक्स के अंदर शीशी को रखा जाता  है। जिसमें एक शीशी में दस डोज हैं और दूसरी शीशी में 20 डोज हैं। शीशी खुलने के बाद जल्द ही इसका इस्तेमाल करना जरूरी है। ये यहां पर मेडिकल साइंस के हिसाब से एक तकनीकि पेंच है। शीशी खुलने पर चार घंटे ही इस वैक्सीन को फ्रिज में रखा जा सकता है। यानी बहुत लंबे वक्त तक इस वैक्सीन को नहीं रखा जा सकता। शीशी के खुलने के चार घंटे के बाद ये वैक्सीन खराब हो जाती है। यानी कि अगर उन दस या बीस डोज का इस्तेमाल चार घंटे के भीतर नहीं हुआ तो वो वैक्सीन फिर खराब हो जाएगी। ऐसा ही हो रहा है देश के अलग-अलग हिस्सों में, थोड़ी मात्रा खराब होने पर कई डोज का नुकसान सामने आ रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से राज्य की सरकारों को टीके के भंडारण को लेकर निर्देश जारी किया गया था कि टीकों को दो से आठ डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच ही रखना जरूरी होगा। इसका सही अनुपालन न होना भी टीका बर्बादी का कारण बन रहा है। 

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केरल में वैक्सीन का 0 वेस्टेज मॉडल

केरल ने फिर देश को बता दिया है कि वह स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में बाकी राज्यों से बेहतर क्यों है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी केरल की तारीफ करनी पड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीकों की बर्बादी रोकने के लिए केरल की तारीफ की और कहा कि कोरोना के खिलाफ जंग को मजबूत करने के लिए वैक्सीन की बर्बादी कम करना सबसे अहम है। केरल को 73 लाख 38 हजार 806 वैक्सीन की डोज मिली थीं, जिनमें से उसने लोगों को 74 लाख 26 हजार 164 डोज दीं। इसका मतलब हुआ कि केरल ने 87 हजार 358 अतिरिक्त लोगों को वैक्सीन दी।

कैसे वैक्सीन की बर्बादी को रोका

ऐसा सिस्टमैटिक मैनेजमेंट और करेक्ट टाइमिंग से ही हो पाया है। हमारे यहां अभी दूसरी फेज का वैक्सीनेशन चल रहा है, लेकिन हम प्राथमिकता के हिसाब से लोगों को वैक्सीन लगा रहे हैं। मान लीजिए किसी सेंटर पर 100 लोगों को वैक्सीन लगनी है, तो उसमें से हम फिलहाल 70 से 80 ऐसे लोगों को चुन रहे हैं, जिन्हें सेकंड डोज लगानी है। बाकी हम फर्स्ट डोज लगाते हैं। जैसे कोविशील्ड की 5 एमएल की एक शीशी 10 डोज होती है। यानी एक शीशी में दस लोगों को वैक्सीन दी जा सकती है। एक व्यक्ति को 0.5 एमएल वैक्सीन की डोज दी जाती है। वैक्सीन की डोज कम न हो इसलिए कंपनियां हर शीशी में अतिरिक्त डोज भी डाल रही है। एक्योरेसी के साथ किसी को भी वैक्सीन लगाना सबसे कठिन काम है। ट्रेनिंग के आभाव में हर शीशी में 1.1 % वैक्सीन बर्बाद हो जाती है। इसलिए एक शीशी वैक्सीन से 8-9 लोगों को ही वैक्सीन लग पाती है। हर शीशी में 0.5 एमएल या 0.6 एमएल अतिरिक्त दवा होती है। जिससे एक-दो लोगों को अतिरिक्त डोज लग सकती है। केरल के हेल्थ वर्कर ने इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर एक्यूरेसी के साथ वैक्सीन लगातर एक्सट्रा डोज बनाए। -अभिनय आकाश