स्पेन में जबरन क्यों घुसे हजारों मुस्लिम? डरा देगी इसके पीछे की कहानीस मेलोनी ने दी धमकी, मोदी हुए अलर्ट

आखिर क्या वजह है कि मोरक्को की सीमा से अचानक इतनी बड़ी इंसानी लहर स्पेन में उमड़ पड़ी? क्या यह महज बेहतर जिंदगी की तलाश है या फिर यूरोप की दहलीज पर खेला जा रहा एक बड़ा जिओपॉलिटिकल गेम। आंकड़ों को ध्यान से देखिए। सोटा की कुल आबादी है 83,000 के आसपास और सिर्फ एक दिन के भीतर वहां 60,000 लोग घुस आते हैं। यानी शहर की कुल आबादी का 70%।
गरीबी और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं टकराती हैं तब सीमाओं के मानचित्र धुंधले पड़ जाते हैं। और जब कोई देश मानव आबादी को एक जियोपॉलिटिकल हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगे तो मंजर वही होता है जो इस वक्त स्पेन के अफ्रीकी एनक्लेव सोटा में नजर आ रहा है। भूमध्य सागर का वो मुहाना जो अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापार का सेतु होना चाहिए था। पिछले 24 घंटों में एक अंतहीन मानवीय और सुरक्षा संकट का गवाह बन चुका है। नागरिक तैर कर बाढ़ फांदकर चट्टानों को पार कर स्पेनिश सरजमी पर दाखिल हो चुके हैं। कम से कम 34 जिंदगियां समुद्र के खारे पानी में खामोश हो गई। सड़कें इस वक्त सहमी हुई है। दुकानें बंद हैं और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांजेस को इसे देश की प्रादेशिक अखंडता पर हमला करार देकर सेना उतारनी पड़ी। लेकिन सवाल सिर्फ हजारों प्रवासियों का नहीं है। सवाल यह है कि आखिर क्या वजह है कि मोरक्को की सीमा से अचानक इतनी बड़ी इंसानी लहर स्पेन में उमड़ पड़ी? क्या यह महज बेहतर जिंदगी की तलाश है या फिर यूरोप की दहलीज पर खेला जा रहा एक बड़ा जिओपॉलिटिकल गेम। आंकड़ों को ध्यान से देखिए। सोटा की कुल आबादी है 83,000 के आसपास और सिर्फ एक दिन के भीतर वहां 60,000 लोग घुस आते हैं। यानी शहर की कुल आबादी का 70%। समुद्र के रास्त मीलों दूर तक तैर कर आते युवा चट्टानों के सहारे आगे बढ़ते बच्चे और महिलाएं और फिर थिएटर के बाजारों में पसरती दहशत। वहां के लोकल्स का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा उग्र और अनकंट्रोल्ड मंजर पहले कभी नहीं देखा। अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों से लेकर आम नागरिकों तक में डर का माहौल है। स्पेन की सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक फैसला दिया था कि समुद्र में रोके गए प्रवासियों को बिना कानूनी प्रक्रिया के तुरंत मुरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता। और इसी फैसले की आड़ में आपराधिक नेटवर्क और अफवाहों ने ऐसा तहलका मचाया कि हजारों लोग एक साथ सीमा पर टूट पड़े।
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स्पेन में क्यों बने इमरजेंसी जैसे हालात?
मोरक्को के तटीय शहर फनीदेक से स्पेन की जो दूरी है यह सिर्फ 3 से 5 किमी है। एक तरफ मोरक्को है जहां पर बेरोजगारी है, भुखमरी है, बदहाली है। वहीं दूसरी तरफ थोड़ी ही दूरी पर ताकतवर यूरोपीय संघ और विकसित देश स्पेन मौजूद है। स्पेन में इस टाइम पर आपको बता दें कि इमरजेंसी जैसी सिचुएशन बन चुकी है। हजारों लोग स्विमिंग करते हुए स्पेन के कोस्टल टाउन की तरफ पहुंच रहे हैं ताकि वह बॉर्डर्स के अंदर घुसकर सीधे यूरोपियन यूनियन में फैल सके। फेवरेबल वेदर का फायदा उठाकर यह लोग धड़ल्ले से समंदर पार कर रहे हैं। इस दौरान कई लोग डूबे भी हैं। लेकिन भीड़ की रफ्तार जो है यह कम नहीं हो रही। इसमें से कई सारे लोग मोरक्को के हैं। कई अफ्रीकी युवा भी शामिल हैं। इन्हें यह सही वक्त क्यों लगता है बॉर्डर पार करने के लिए? अब आप उसे समझिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ऑफ स्पेन ने हाल ही में एक रूलिंग पास की थी कि जो भी लोग समंदर के रास्ते आ रहे हैं स्पेन के अंदर आप उनको तुरंत के तुरंत वापस नहीं भेजोगे। आपको बकायदा लीगल प्रोसेस देना होगा। बस अदालत की इसी फैसले ने इन घुसपैठियों के लिए खुला दरवाजा खोल दिया। स्थाई लोग यह कह रहे हैं कि लीडर्स नेशनल इमरजेंसी लगाओ। हम इन माइग्रेंट्स को हैंडल नहीं कर सकते हैं। हमारे पास रिसोर्सेज खत्म हो चुके हैं। दबाव 1000% बढ़ चुका है। लेकिन स्पेन की सरकार कोई स्ट्रांग एक्शन क्यों नहीं ले पा रही है? अब आप उसे समझिए क्योंकि वहां है कोलीजन गवर्नमेंट।
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48 घंटे के अंदर 8000 से ज्यादा माइग्रेंट्स
यूरोप में पहले भी देखा गया है मई 202 में 2021 में ऐसा हुआ था कि 48 घंटे के अंदर 8000 से ज्यादा माइग्रेंट्स पहुंच गए यानी कि पहले भी इस तरीके से ओवरवेल्म हो चुका है। वहां का जो पूरा सिस्टम है, जो अपरेटस है वो बहुत ज्यादा ओवरवेल्म हो चुका है। लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन बन चुकी है। जो हुवा जीसस हैं उन्होंने भी ये इस बार भी अपील करी है कि फोर्सेस को भेजा जाए। यानी कि एक सिक्योरिटी फोर्सेस को भेजकर एक आर्म्ड उनको मदद दी जाए ताकि कोई सुरक्षा को लेकर कोई स्थिति ना बने। अगर इस तरीके से मोरक्को के रास्ते लोग आते हैं तो दिक्कत हो सकती है। इस बीच स्पेन के जो प्राइम मिनिस्टर हैं पेड्रो सशेस उन्होंने भी एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने बताया है कि जो गवर्नमेंट है स्पेन की वो पूरी तरीके से कमिटेड है में जो स्थिति बनी है उस पर एक इमीडिएट रिस्पांस देने के लिए। उन्होंने बताया है कि जितने भी जरूरी रिसोर्सेज हैं उन्हें मोबिलाइज कर दिया गया है। मुरक्को के साथ में भी बातचीत चल रही है। इंटरनेशनल अथॉरिटीज के साथ में बातचीत चल रही है और जैसी जरूरत पड़ेगी नॉर्मल को इस्टैब्लिश करने की उसके लिए कदम उठाए जाएंगे।
स्पेन के पड़ोसी देशों की उड़ी नींद
सोशलिस्ट पार्टी लेफ्ट और सेंटर लेफ्ट सब ने मिलकर यहां पर सरकार बना रखी है सबके अपने-अपने ओपिनियंस हैं। इसका खामियाजा भुगत रहे हैं वहां के नागरिक नेटिव्स। उधर पोलैंड जैसे देश का रवैया भी अलग है। पोलैंड साफ यह कहता है कि हम माइग्रेशन को अपने देश के खिलाफ हथियार नहीं बनने देंगे। बेलारूस बॉर्डर पर उसने इलेक्ट्रिफाइड सर्विलांस और आर्मी बिठा रखी है। कहा है कि ड्रामा यहां पर नहीं चल सकता। लेकिन स्पेन के इस कोहराम को देखकर यूरोप के जो बाकी देश हैं इनकी नींदें उड़ चुकी। इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सीधा अल्टीमेटम दे दिया है स्पेन को। मेलोनी ने यह साफ कहा है ट्वीट करते हुए कि अगर स्पेन बॉर्डर संभालने में नाकामयाब रहा तो इटली यहां पर मुख दर्शक बनकर नहीं रहेगा। जरूरत पड़ी तो स्पेन के साथ जो एग्रीमेंट हुआ है एरिया की व्यवस्था को संभालने का उसे यह निलंबित भी कर सकते हैं। आखिर सेटा इतना अहम क्यों है उसे समझिए क्योंकि यह अफ्रीका और यूरोप के बीच का इकलौता लैंड बॉर्डर है। इस बार हजारों की संख्या में युवा और नाबालिक बॉर्डर के गेट को तोड़ते हुए स्पेन के अंदर घुस आए हैं। कुछ ने मोरको की तरफ से वाटर कैनन का सामना भी किया तो कुछ ने समंदर में लाशों के बीज तैर कर अपनी जान को जोखिम में डालकर बॉर्डर पार। रिपोर्ट्स जो कहती है उसके मुताबिक इस रूट पर दर्जनों लोगों की जान अब तक जा चुकी है। लेकिन इसके बावजूद भी यह स्पेन में घुस रहे हैं।
स्पेन इन सब में मजबूर क्यों है?
स्पेन की जो जन दर दुनिया में है वो सबसे कम है और हर साल 1 लाख ज्यादा लोग जो हैं वो यहां पर रिटायर हो रहे हैं। कृषि पर्यटन और निर्माण क्षेत्रों को जिंदा रखने के लिए स्पेन को हर साल लाखों विदेशी कामगारों की जरूरत पड़ती है। यहां के जो प्रधानमंत्री हैं इनकी जो सरकार है यह प्रवासियों को कानूनी दर्जा और वर्क परमिट देने की योजना पर काम कर रही है ताकि देश की जो अर्थव्यवस्था है यह ठप ना पड़े। एक तरफ अपनी इकॉनमी को बचाने के लिए स्पेन मजबूर है तो दूसरी तरफ बेकाबू होती हुई यह भीड़ और टूटती हुई सीमाएं। सवाल यह है कि क्या यूरोप अपनी नीतियों के चक्कर में खुद अपने ही विनाश का रास्ता खोल रहा है या फिर स्पेन का यह नर्क से स्वर्ग वाला खेल यूरोप के बाकी देशों को भी तबाह कर देगा।
मेलोनी ने दी स्पेन को धमकी
सेउटा संकट पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्पेन के साथ शेंगेन फ्री-ट्रैवेल (बिना वीजा यात्रा) को रोकने दी धमकी दे डाली। मेलोनी ने कहा कि सेउटा से आ रही तस्वीरें चौंकाने वाली हैं और एक बार फिर यह दिखाती हैं कि बेकाबू आप्रवासन यूरोप की सीमाओं के लिए एक ठोस खतरा है।
भारत के लिए अलर्ट रहने की जरूरत
भारत के संदर्भ में असम और पश्चिम बंगाल दोनों राज्य लंबे समय से अवैध घुसपैठ की समस्या से प्रभावित रहे हैं। स्पेन के इस घटनाक्रम से सीख लेते हुए भारत को इन राज्यों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। पश्चिम बंगाल और असम की बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा का एक बड़ा हिस्सा नदियों, दलदल और जंगलों से घिरा है। यहाँ भौतिक रूप से कंटीली बाड़ लगाना कठिन होता है, जिससे घुसपैठियों और मानव तस्करों को घुसपैठ का आसान अवसर मिल जाता है। उत्तर-पूर्व भारत को शेष भारत से जोड़ने वाला सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के पास स्थित है। इस क्षेत्र के आसपास अनियंत्रित घुसपैठ भारत की अखंडता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। स्पेन का संकट यह संदेश देता है कि घुसपैठ केवल एक मानवीय या क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़ा विषय है। भारत को असम और बंगाल की सीमाओं पर स्मार्ट फेंसिंग, ड्रोन निगरानी, BSF का सशक्तिकरण और अवैध दस्तावेजों पर सख्त कार्रवाई के जरिए सीमा तंत्र को अभेद्य बनाने की आवश्यकता है।
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