अखिलेश यादव ने Azam Khan के ठिकानों पर ED की छापेमारी पर उठाए सवाल, भाजपा पर बोला हमला

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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने मांग की कि एजेंसी को भाजपा सरकार और उसके अधिकारियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों में भी छापेमारी करनी चाहिए। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने ईडी की कार्रवाई का बचाव किया है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जेल में बंद वरिष्ठ सपा नेता आजम खान के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई पर सवाल उठाया और मांग की कि ईडी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार एवं उसके अधिकारियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों में छापेमारी करे। हालांकि, उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने ईडी की कार्रवाई का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि आजम खान के मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे के भ्रष्टाचार की परतें उजागर हो रही हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सरकार पर वरिष्ठ सपा नेता को परेशान करने का आरोप लगाया।

यादव ने बुधवार को खान के मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े ठिकानों पर ईडी की छापामारी पर पर आरोप लगाया कि एजेंसी उन लोगों को निशाना बना रही है जिन्होंने विश्वविद्यालय बनाया, जबकि कई दूसरे मामलों में कथित भ्रष्टाचार को नजरअंदाज कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘शिक्षा, शिक्षक एवं शिक्षार्थी विरोधी, स्कूलबंद करवाने वाले भाजपाई और उनके संगी-साथी विश्वविद्यालय बनानेवालों के ख़िलाफ़ ईडी की छापेमारी कर रहे हैं ताकि उनके एक-दो प्रतिशत बचे हुए साम्प्रदायिक संकीर्ण सोच के कुतर्की समर्थकों को संतुष्ट किया जा सके, जबकि उन भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जो आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हैं। ’’ यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी मामले में शामिल लोगों, कथित तौर पर सत्ता से जुड़े अपराधियों और कोडीन युक्त कफ सिरप के धंधे से जुड़े भाजपा के लोगों के खिलाफ ईडी के छापे मारने की मांग की।

उन्होंने मूलभूत परियोजनाओं को लेकर भी निशाना साधा और कहा कि भाजपा राज में बने खस्ताहाल बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गड्ढों से भरे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे और टूटे हुए ग्रीन कॉरिडोर को लेकर कार्रवाई की जानी चाहिए जो कथित तौर पर भाजपा सरकार के समय में बने। ईडी ने बुधवार को धनशोधन जांच के तहत उत्तर प्रदेश के रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली के जामिया नगर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट एवं जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े करीब 10 ठिकानों पर तलाशी ली। एजेंसी ने यह कार्रवाई धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज एक मुकदमा दर्ज होने के बाद की है।

ईडी अधिकारियों ने निजी ठेकेदारों के जरिये सरकारी ठेके के धन को दूसरी जगह भेजे जाने और उसके बाद ट्रस्ट एवं विश्वविद्यालय की सम्पत्तियां बनाये जाने और उनमें उसके इस्तेमाल किये जाने का आरोप लगाया है। तलाशी का बचाव करते हुए अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री अंसारी ने कहा कि जांच एजेंसी अपना काम कर रही है और अगर गलत काम साबित हुआ तो कार्रवाई की जाएगी। अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मंत्री ने कहा, ‘‘जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे के भ्रष्टाचार की नई कहानियां अब उजागर हो रही हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया और गरीब लोगों एवं सरकार की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘जब आप बबूल का पेड़ बोते हैं, तो आप मीठे फल की उम्मीद नहीं कर सकते।’’ अंसारी ने यह भी आरोप लगाया कि सपा नेताओं ने वक्फ संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि ऐसी संपत्तियों का दुरुपयोग न हो। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राय ने बलिया में एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में आरोप लगाया कि सरकार खान को निशाना बना रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा, आजम खान को सरकार परेशान कर रही है। पूर्व सपा लोकसभा उम्मीदवार असीम राजा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय को ईडी ने घेर लिया है और दावा किया कि छात्रों पर भय का माहौल बनाने एवं प्रवेश को हतोत्साहित करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ सपा नेता सतनाम सिंह मट्टू ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाया तथा आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के अंदर कुछ लोगों ने ईडी अधिकारी होने का दावा किया लेकिन अपनी पहचान नहीं बताई।

उन्होंने आरोप लगाया कि परिसर में प्रवेश करने वाले छात्रों से उनके मोबाइल नंबर मांगे जा रहे थे और इस कार्रवाई को अवैध बताया। ईडी अधिकारियों के अनुसार, जांच निजी ठेकेदारों के माध्यम से सरकारी अनुबंध निधि के कथित हेरफेर और उसके बाद के उपयोग से संबंधित है, जिसमें लखनऊ मुख्यालय वाले ट्रस्ट और विश्वविद्यालय की संपत्ति बनाना भी शामिल है। विश्वविद्यालय हाल में एक और विवाद में उलझ गया था जब रामपुर विकास प्राधिकरण ने अनुमोदित भवन योजना के बिना निर्माण का आरोप लगाते हुए इसकी 40 इमारतों में से 38 को ध्वस्त करने का निर्देश दिया था।

प्रस्तावित विध्वंस पर बाद में संभागीय आयुक्त ने रोक लगा दी।

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