सक्रिय और सशक्त विपक्ष की भूमिका का फडणवीस मॉडल, बनेगा अन्य राज्यों के लिए नज़ीर

Devendra Fadnavis
अभिनय आकाश । Mar 24, 2021 6:15PM
देवेंद्र फडणवीस ही हैं जिन्होंने मनसुख हिरेन की मौत के मामले में सबसे पहले एंटीलिया केस एनआईए को सौंपने की मांग की थी और सचिन वाजे की गिरफ्तारी के साथ ही और मनसुख हिरेन की मौत की जांच को भी एनआईए को दिए जाने के मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक पूरे जम-खम से उठाया था।

बचपन में आपका कोई साथी जरूर रहा होगा जो हमेशा क्लास में आपको डांट खिलवाने के चक्कर में रहता होगा? यहां आपने कुछ भी भूल कि और बस उसकी बांछे खिल गई, वाह! अभी इसको मजा चखाता हूं। लाख प्रयत्न के बाद भी आप उससे पीछा नहीं छुड़ा पाते। उस वक्त आपको ये साथी बड़ा अप्रिय लगता होगा और आप सोचते होंगे कि ये क्यों मेरे पीछे पड़ा है और आप उससे दूरी बनाकर भी रखने की कोशिश करते होंगे। लेकिन जाने-अनजाने में ये साथी आपको वक्त का पाबंद, नियम का पक्का और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह बना जाता है और इस बात का आपको पता भी नहीं चलता है। इस पूरे क्रम को सत्ता के संदर्भ से जोड़ कर देखें तो आपका बचपन शासन राज है, आप सत्ताधारी हैं...मतलब फुल पावर के साथ और यही पर आपके साथ आपका वो बचपन वाला कांटेदार साथी विपक्ष के रोल में है। जब सत्ता कुछ गलती करती है, विपक्ष उस पर सवाल उठाता है और सत्ताधारी होने की वजह से आप जवाबदेह हैं। साथ ही साथ सत्ताधारी के मन में ये बात रहती है एक किस्म का डर रहता है कि अगर कुछ गलत हुआ तो विपक्ष है, वो बवाल काट देगा। महाराष्ट्र में बीजेपी विपक्ष में है और पूर्व मुख्यमंत्र देवेंद्र फडणवीस विपक्ष के नेता की भूमिका में हैं। लेकिन बीते कुछ वक्त में फडणवीस ने जिस तरह से राज्य में हुए घटनाक्रम को को सड़क से लेकर सदन तक जिस अंदाज में न केवल उठाया बल्कि अनसुलझी समझे जाने वाली कई वारदातों को सही जांच के दिशा में भी पहुंचाया। 

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नवंबर 2019 जब उद्धव ठाकरे ने अपने पिता बाला साहेब ठाकरे से किये वादे को अमली जामा पहनाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। महाराष्ट्र में बने महाअघाड़ी सरकार को लगभग पंद्रह महीने का वक्त हो गया है और इस दौरान राज्य के सीएम उद्धव को कभी पालघर में साधुओं की ह्त्या पर उठे बवाल और कोरोना वायरस से जूझना पड़ा तो कभी सुशांत केस की जांच को लेकर उठे सवाल, टीआरपी स्कैम के बाद अन्वय नायक सुसाइड केस में अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी, कंगान रनौत के ऑफिस में बीएमसी का बुलडोजर। ये कई मामले हैं जिसके लेकर लगातार महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन एंटीलिया केस उद्धव ठाकरे की गठबंधन सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। इससे भी बड़ी चुनौती के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का सदन से सड़क का दिखा रूप ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 

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सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के दबाव को मुंबई पुलिस कमिश्नर के बदले जाने से समझा जा सकता है। लेकिन उद्धव सरकार की मुसीबतें दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। जिस तरह से परमबीर सिंह द्वारा राज्य के गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए गए और इन आरोपों के साथ वो कोर्ट के दरवाजे पर भी पहुंच चुके हैं। वहीं राज्य में ट्रांसफर और पोस्टिंग के खेल का भी खुलासा देवेंद्र फडणवीस के द्वारा किया गया। गौरतलब है कि ये देवेंद्र फडणवीस ही हैं जिन्होंने मनसुख हिरेन की मौत के मामले में सबसे पहले एंटीलिया केस एनआईए को सौंपने की मांग की थी और सचिन वाजे की गिरफ्तारी के साथ ही और मनसुख हिरेन की मौत की जांच को भी एनआईए को दिए जाने के मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक पूरे जम-खम से उठाया था। लेकिन इसमें सबसे दिलचस्प बात ये है कि फडणवीस केवल महाराष्ट्र सरकार पर सवाल ही नहीं उठा रहे हैं बल्कि मामले से संबंधित डिटेल का पूरा ब्यौरा भी बता रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव से मिलकर सीलबंद लिफाफे में ट्रांसफर पोस्टिंग के रैकेट से संबंधित कॉल रिकार्ड्स एवं दस्तावेज सौंपे। 

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विपक्ष द्वारा महाराष्ट्र सरकार को घेरने के बाद शिवसेना नेता संजय राउत द्वारा केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग कर सरकार को अस्थिर करने के पुराने आरोप लगाना। साथ ही राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश पर धमकाना और चेतावनी देते हुए ये कहना कि ये आग उन्हें भी जला देगी। लेकिन शाश्वत सत्य ये है कि मुख्यमंत्री बनने के छह महीने बाद ही किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने की सूरत में कुर्सी पर खतरा मंडराने के बाद उद्धव ठाकरे को प्रधानमंत्री मोदी से ही मदद मांगने की नौबत आ गई थी। 

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