Ayodhya Deepotsav में बोलीं Anandiben Patel, श्रीराम भारत की आत्मा और सुशासन का आधार

अयोध्या के 10वें दीपोत्सव में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रभु श्रीराम केवल नाम नहीं बल्कि विचार और भारतीय संस्कृति के जीवन-मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि रामराज्य की परिकल्पना तभी साकार होगी जब समाज के हर वंचित, गरीब और महिला को न्याय व सम्मान मिले।
अयोध्या (उप्र), सात नवंबर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भगवान श्रीराम को भारत की राष्ट्रीय चेतना की नींव बताते हुए शनिवार को कहा कि उन्होंने ही यह संदेश दिया कि समाज में कोई भी व्यक्ति उपेक्षित नहीं रहना चाहिए। यहां रामकथा पार्क में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में भगवान श्रीराम के प्रतीकात्मक राजतिलक के बाद 10वें दीपोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए पटेल ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विचार और जीवन-मूल्य हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भगवान राम सिर्फ एक नाम नहीं हैं।
राम एक विचार हैं, राम एक जीवन-मूल्य व्यवस्था हैं, राम भारत की आत्मा हैं और हमारी राष्ट्रीय चेतना की नींव हैं।’’ पटेल ने राम के आदर्शों को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और सुशासन का आधार बताते हुए कहा प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्ता से बड़ा कर्तव्य, अधिकार से बड़ा दायित्व और वैभव से बड़ा चरित्र है। उन्होंने कहा रामराज्य की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब समाज में गरीब को सम्मान, वंचित को अवसर, महिलाओं को सुरक्षा, युवाओं को रोजगार और प्रत्येक नागरिक को न्याय प्राप्त होगा। शासन का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सुख, सुरक्षा और सम्मान पहुंचाना होना चाहिए।
राज्यपाल ने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली ‘‘डबल इंजन’’ की सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि आज अयोध्या अपनी आध्यात्मिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या का विकास हो रहा है। यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।’’ पटेल ने कहा कि अयोध्या की पहचान अब केवल मंदिरों और तीर्थस्थलों तक सीमित नहीं है।
यहां रामलीला, संस्कृति, संगीत, साहित्य, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक विरासत को भी महत्व मिल रहा है। सरयू नदी की धारा हमारी सांस्कृतिक चेतना की साक्षी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि दीपोत्सव का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा, जब दीपों का प्रकाश प्रकृति के संरक्षण और समाज के कल्याण का माध्यम भी बने।
राज्यपाल ने कहा, ‘‘आज केंद्र और प्रदेश सरकार का लक्ष्य यही है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज परिस्थितियां बदल रही हैं। पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है, उसकी बात सुन रहा है और उसे स्वीकार कर रहा है। यह परिवर्तन 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास का प्रतीक है।’’ राज्यपाल ने कहा, “महर्षि वाल्मीकि ने रामायण और गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया।
श्रीराम केवल आराध्य नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के आधार हैं। रामराज्य न्याय, समानता, संवेदना, लोककल्याण और सुशासन पर आधारित समाज की परिकल्पना है।” पटेल ने सरयू नदी को अयोध्या की जीवनधारा बताते हुए घाटों की स्वच्छता, नदी के निर्मल जल और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त वातावरण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। राज्यपाल ने युवाओं से राम के जीवन से अनुशासन, नेतृत्व, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा सीखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “एक दीप से हजारों दीप प्रज्ज्वलित हो सकते हैं, लेकिन उसका प्रकाश कम नहीं होता।
यही भारतीय संस्कृति की विशेषता है। हमारी खुशियों की रोशनी दूसरों के जीवन में भी आशा और प्रसन्नता का संचार करे, यही दीपावली का वास्तविक संदेश है।”
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