AFT ने Poonch मामले में पूर्व कमांडर की याचिका खारिज की, सैन्य अनुशासन जरूरी

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ में दिसंबर 2023 में तीन नागरिकों की हिरासत में मौत से जुड़े मामले में राष्ट्रीय राइफल्स के पूर्व सेक्टर कमांडर को दी गई निंदा को बरकरार रखा है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद रोधी अभियानों के दौरान भी सुरक्षा बलों को मानवाधिकारों और सैन्य अनुशासन का पालन करना अनिवार्य है। पीठ ने कहा कि विद्रोहियों से निपटते समय भी नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) ने यह माना है कि नागरिकों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायाधिकरण ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में दिसंबर 2023 में हिरासत के दौरान तीन नागरिकों की मौत के मामले में राष्ट्रीय राइफल्स के एक पूर्व सेक्टर कमांडर को दी गई सख्त नाराजगी वाली निंदा को बरकरार रखा है। ब्रिगेडियर पद्मसंभव आचार्य की याचिका खारिज करते हुए न्यायाधिकरण ने कहा कि आतंकवाद रोधी अभियानों में साथियों की मौत के बाद भावनाएं भले ही बहुत तीव्र हो जाएं, लेकिन ऐसी स्थिति में भी सैनिकों को सैन्य अनुशासन, संविधान के नियमों और मानवाधिकारों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखना होगा।
एएफटी ने कहा, विद्रोहियों से निपटते समय सुरक्षा बलों को मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। अनावश्यक बल का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और न ही कानून के शासन को कमजोर होने दिया जा सकता है। लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए यह आवश्यक है।
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