Surya Chauhan Murder Case में Asad Encounter के बाद अब उसके घर पर Bulldozer Action की तैयारी

bulldozer action
ANI

प्रशासन ने भी सख्त रुख अपना लिया है। नवनीत विहार स्थित असद के घर पर तहसीलदार की मौजूदगी में मुनादी कराकर और ढोल बजवाकर अवैध निर्माण का नोटिस चस्पा किया गया है। प्रशासन ने 15 दिन के भीतर जवाब देने और कब्जा स्वयं हटाने का निर्देश दिया है।

गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में सूर्या चौहान हत्याकांड ने जिस तरह पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, उसी तरह इस मामले के मुख्य आरोपी असद के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद अब यह प्रकरण कानून, राजनीति और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया है। रविवार तड़के खोड़ा और इंदिरापुरम पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में असद ढेर हो गया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पुलिस टीम को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। मुठभेड़ के दौरान करीब सात राउंड गोलियां चलीं और एक सिपाही भी घायल हुआ।

सूर्या चौहान की निर्मम हत्या के बाद जहां पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा था, वहीं असद के मारे जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इसे अपराध के खिलाफ कठोर कार्रवाई बताते हुए उचित ठहराया है। दूसरी ओर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं ने मुठभेड़ पर सवाल उठाए हैं।

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इस बीच जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। गिरफ्तार आरोपी फरहान ने पुलिस पूछताछ में बताया कि बाइक चलाने को लेकर हुए विवाद के बाद असद ने अपने पिता नवाब और साथियों को पूरी बात बताई थी। इसके बाद सूर्या को सबक सिखाने की साजिश रची गई। नवनीत विहार की गली नंबर चार में सूर्या को घेर लिया गया। आरोप है कि इसी दौरान असद के पिता नवाब ने उकसाते हुए कहा, "आज इसकी कहानी खत्म कर देते हैं।" इसके बाद असद ने सूर्या के पेट में चाकू घोंप दिया। गंभीर रूप से घायल सूर्या को आरोपी मृत समझकर फरार हो गए थे।

पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि सूर्या और असद पहले से एक-दूसरे को जानते थे। बकरीद के दिन दोनों के बीच बाइक को लेकर विवाद हुआ था। बाद में सूर्या को कुर्बानी दिखाने के बहाने बुलाया गया और उस पर हमला कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक चाकू करीब चार इंच तक शरीर में धंस गया था। इस मामले में नवाब, आतिफ और फरहान को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है।

मामले में एक और कोण तब सामने आया जब समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने दावा किया कि सूर्या की दोस्ती असद की बहन से थी और यही विवाद की जड़ बना। उन्होंने कहा कि दोनों परिवारों के बीच पहले से तनाव था और इसी कारण असद का परिवार मोहल्ला बदलकर रहने लगा था, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ।

उधर प्रशासन ने भी सख्त रुख अपना लिया है। नवनीत विहार स्थित असद के घर पर तहसीलदार की मौजूदगी में मुनादी कराकर और ढोल बजवाकर अवैध निर्माण का नोटिस चस्पा किया गया है। प्रशासन ने 15 दिन के भीतर जवाब देने और कब्जा स्वयं हटाने का निर्देश दिया है। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा के बाद बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया जाएगा।

इसी बीच, प्रदेश सरकार भी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी दिखाई दी। कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, सांसद अतुल गर्ग और जिलाधिकारी रवींद्र कुमार मांदड़ ने परिवार से मुलाकात कर पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता सौंपी। साथ ही परिवार के एक सदस्य को नगर पालिका में नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया।

देखा जाये तो सूर्या हत्याकांड में जहां मुख्य आरोपी का अंत हो चुका है, वहीं अब पूरा प्रदेश इस बात पर नजर टिकाए हुए है कि बाकी आरोपियों को कितनी जल्दी और कितनी कड़ी सजा मिलती है।

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