उत्तर प्रदेश की बड़ी खबरें: निजी हॉस्पिटलों को कोविड हॉस्पिटल के रूप में अधिकृत होने वाली प्रक्रिया ऑनलाइन हुई

उत्तर प्रदेश की बड़ी खबरें: निजी हॉस्पिटलों को कोविड हॉस्पिटल के रूप में अधिकृत होने वाली प्रक्रिया ऑनलाइन हुई
प्रतिरूप फोटो

नोडल अधिकारी द्वारा बताया गया कि उक्त कमेटी के द्वारा जनपदवासी कोविड उपचार से सम्बंधित शिकायतों जैसे, सही उपचार न होना, अधिक धन की वसूली आदि/अन्य समस्याओं के निस्तारण के लिए उक्त कमेटी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकते है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार काम कर रही है। सरकार द्वारा आज भी कई बड़े निर्णय लिए गए। आइए पढ़ते हैं उत्तर प्रदेश की दिनभर की आज की बड़ी खबर।

निजी हास्पिटलों को कोविड हास्पिटल के रूप में अधिकृत होने वाली मैनुअल प्रक्रिया को नोडल अधिकारी ने किया ऑनलाइन

जनपदीय नोडल अधिकारी कोविड-19 लखनऊ डॉ रोशन जैकब द्वारा बताया गया कि कोविड 19 इलाज के लिए निजी अस्पतालों के चिन्हीकरण के सम्बंध में शासनादेश के अनुसार ऐसे निजी चिकित्सालय जो कोविड उपचार करने हेतु इच्छुक है, उनको शासन द्वारा अधिसूचित नही किया जाएगा, मात्र संज्ञान लिया जाएगा और प्रशासन द्वारा ऐसे सभी इच्छुक चिकित्सालयों की सूची तैयार की जाएगी। वर्तमान में जनपदों में प्रचलित व्यवस्था के अनुसार निजी चिकित्सालयों द्वारा कोविड चिकित्सालय बनाने हेतु अपना आवेदन पत्र जिला प्रशासन को दिया जाता है, जिसकी जांच सीएमओ कार्यालय द्वारा सम्पादित करते हुए जिलाधिकारी द्वारा अस्पताल को कोविड उपचार हेतु अधिकृत किया जाता है।

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उन्होंने बताया कि माह अप्रैल में व्यापक कोविड संक्रमण के समय देखा गया कि कुछ कोविड अस्पतालों द्वारा भर्ती नही ली जा रही थी, जबकि कई अस्पताल जो कि कोविड उपचार के लिए चिन्हित नही थे उसमे कुछ कोविड रोगी भर्ती थे। वर्तमान में जनपद में मात्र 59 निजी अस्पताल कोविड उपचार अधिकृत है जबकि जनपद में कुल पंजीकृत चिकित्सालयों की संख्या 691 है। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिस्थिति में  और भविष्य में तीसरी लहर की संभावना के दृष्टिगत तैयारी स्वरूप यह आवश्यक प्रतीत हो रहा है कि सक्षम एवं इच्छुक सभी चिकित्सालयों को कोविड इलाज हेतु अधिकृत किया जाए। ऐसे अस्पताल जो इलाज की क्षमता रखते हो और कोविड रोगियों के उपचार हेतु इच्छुक भी हो, को इलाज की अनुमति मिलने से मरीजों को बेहतर सुविधा और समय से इलाज उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने बताया की अपने नजदीकी व अच्छे चिकित्सालय में गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने से आम आदमी में तनाव की स्थिति कम होगी और घरेलू उपचार के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने जैसे स्थिति से बच पाएंगे।

जिसके लिए नोडल अधिकारी ने कोविड इलाज के लिए सीएमओ की जांचोपरांत प्रशासन द्वारा अस्पताल को अधिकृत करने की मैनुअल व्यवस्था में संशोधन करते हुए अस्पताल को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा पोर्टल पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराई जा रही है। जो भी अस्पताल कोविड इलाज हेतु अपने भवन का आंशिक अथवा सम्पूर्ण भाग उपलब्ध कराना चाहते है वह उक्त वेब साइट पर उपलब्ध उपचार लिंक पर स्वयं अपने अस्पताल को कोविड उपचार के लिए अधिकृत करने के लिए आवेदन कर सकते है। उन्होंने बताया कि सेल्फ रजिस्ट्रेशन की यह सुविधा सोमवार 24 मई 2021 से शुरू हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि पंजीकरण हेतु चिकित्सालय के पास निम्नवत अभिलेख उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।

1) मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय द्वारा  निर्गत चिकित्सालय के पंजीकरण प्रपत्र

2) उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्गत वैध पंजीकरण प्रपत्र

3) उत्तर प्रदेश फायर सेफ्टी विभाग द्वारा निर्गत फायर सेफ्टी अनुपालन का प्रमाण पत्र

4) बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण हेतु सेवा प्रदाता से अनुबंध प्रमाण पत्र

उपरोक्त प्रमाण पत्रों की प्रतियों को अपलोड किए जाने के उपरांत चिकित्सालय को कोविड 19 के प्रोटोकॉल/नियम/दिशानिर्देशों के अनुपालन तथा सभी अभिलेखों की सत्यता के सम्बंध में शपथ के साथ घोषणा पत्र पोर्टल पर भरा जाएगा। रजिस्ट्रेशन के अगले चरण में चिकित्सालय को पोर्टल पर चिकित्सालय में उपलब्ध संसाधनों की सूचना जैसे उपलब्ध शैय्या, उपलब्ध उपकरण, उपलब्ध मानव संसाधन व उपलब्ध अन्य चिकित्सकीय सेवाए यथा डाइलिसिस आदि की सूचना उपलब्ध करानी होगी। उक्त के उपरांत चिकित्सालय द्वारा अपना आवेदन सबमिट किया जाएगा। सबमिट होने के उपरांत चिकित्सालय को आवेदन संख्या प्राप्त होगी तथा आवेदन का प्रिंट भी निकाला जा सकेगा। चिकित्सालय द्वारा आवेदन किये जाने के उपरांत जिला प्रशासन द्वारा आवेदन का परीक्षण कर चिकित्सालय को कोविड 19 चिकित्सालय के रूप में अधिकृत कर दिया जाएगा। 

वातावरण के उतार-चढ़ाव के कारण पनपने वाले कीटों से गन्ना फसल की सुरक्षा किये जाने हेतु एडवाइजरी जारी

प्रदेश के आयुक्त, गन्ना एवं चीनी, श्री संजय आर. भूसरेड्डी ने गन्ना कृषकों के हितों के दृष्टिगत मौसम के उतार-चढ़ाव के दौरान उत्पन्न होने वाले विभिन्न कीटों जैसे पायरिला, ग्रास हॉपर, फॉल आर्मीवर्म, तथा काला चिकटा से गन्ना फसल की सुरक्षा एवं प्रबंधन हेतु समस्त विभागीय अधिकारी एवं चीनी मिलों के प्रबन्धन को एडवाइजरी जारी की है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए श्री भूसरेड्डी ने बताया कि वातावरण में अधिक नमी होने और तापमान में दिन-प्रतिदिन अत्यधिक उतार-चढ़ाव के कारण पनपने वाले विभिन्न कीट जैसे पायरिला, ग्रास हापर, फॉल आर्मी तथा काला चिकटा गन्ने की फसल हेतु एक अभिषाप हैं। गन्ना फसल मे इन कीटों की समयानुसार जांच एवं निरीक्षण कर तत्काल उनके रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाया जाना अति आवश्यक है अन्यथा पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। यही नहीं आस-पास के खेतों में खड़ी गन्ना फसल भी प्रभावित होती है जिससे गन्ना कृषकों की कड़ी मेहनत एवं लागत दोनों की क्षति हो जाती है।

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गन्ना आयुक्त ने एडवाइजरी के माध्यम से सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह अपने अधीनस्थ जनपदों में स्थलीय निरीक्षण कराते हुए कीटों की जाॅच गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों से कराकर रोकथाम की उचित व्यवस्था करायें। यह भी निर्देशित किया गया है कि गन्ना किसानों को इन कीटों के बारे में विस्तृत जानकारी एवं उनसे बचाव के उपायों के सम्बन्ध में जागरूक करते हुए प्राकृतिक नियंत्रण पर जोर भी दिया जाए। गन्ना आयुक्त द्वारा पायरिला कीट की रोकथाम के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया गया कि जिन क्षेत्रों में पायरिला का प्रकोप ज्यादा पाया जाए तो उन क्षेत्रों का विशेष ध्यान देते हुए उसकी तुरन्त रोकथाम के लिए उ.प्र. गन्ना शोध परिषद से तत्काल सम्पर्क स्थापित कर यथा आवष्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। जिन खेतों में पायरिला के प्राकृतिक शत्रु की संख्या नगण्य है वहां उ0प्र0 गन्ना शोध परिषद की संस्तुति के अनुरूप चीनी मिलों द्वारा पावर स्प्रेयर से वृहद स्तर पर सुरक्षात्मक कीटनाशी इमिडाक्लोप्रिड 150-200 मिली अथवा प्रोफेनोफास 750 मिली को 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करायें।

उन्होनें बताया कि काला चिकटा अधिकतर पेड़ी में पाया जाता है, इससे प्रभावित पौधों की पत्तियाँ पीली हो जाती हैं तथा उन पर कत्थई रंग के धब्बे पाये जाते हैं। इसके शिशु पत्रकंचुक एवं गोंफ के मध्य तक पाये जाते हैं। प्रौढ़ तथा शिशु दोनों पत्तियों का रस चुसते हैं जिससे गन्ने की बढ़वार रूक जाती है तथा उपज व शर्करा में कमी हो जाती है। ग्रीष्मकाल में प्रकोप होने पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत घोल दर 150-200 मि.ली/हे. अथवा क्वीनॉलफास 25 प्रतिशत ई.सी. दर 800 मि.ली./हे. या डाइक्लोरवास 76 प्रतिशत ई.सी. दर 250 मि.ली./हे. कीटनाशक का छिड़काव 625 ली. पानी में घोलकर कट नाजिल से करना चाहिए।

उन्होनें यह भी बताया कि किसी क्षेत्र विशेष में फॉल आर्मीवर्म कीट की उपस्थिति परिलक्षित होने पर प्रभावित पौधो को नष्ट करने, जमीन की गुड़ाई करने तथा इस क्षेत्र का गन्ना बीज, बुवाई हेतु प्रयोग में न लाने की सलाह दी गई है। इस कीट के प्रभाव के आरम्भिक चरण में नीम के तेल का प्रयोग कर अंडे देने की प्रक्रिया और लार्वा पोषण को रोका जा सकता है। इस कीट का प्रकोप होने पर क्लोरपाइरोफास एवं मोनोक्रोटोफास दवा का 2 से 3 मिली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। गन्ना आयुक्त  द्वारा  विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि काला चिकटा, ग्रास हॉपर, फॉल आर्मीवर्म तथा पायरिला प्रभावित क्षेत्रों में सघन अभियान चला कर कृषकों से जन सम्पर्क करके कीटों के बचाव के सम्बन्ध मे गोष्ठियों का आयोजन करायें, साथ ही एस.एम.एस. भेजकर एवं प्रचार साहित्य द्वारा गन्ना कृषकों को जागरूक करें।

जनपद लखनऊ में पैनडेमिक पब्लिक ग्रीवेंस कमेटी गठित

जनपदीय नोडल अधिकारी कोविड 19 डॉ0 रोशन जैकब द्वारा बताया गया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार प्रत्येक जिले में एक पैनडेमिक पब्लिक ग्रीवेंस कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए थे। जिसमें जनपदवासी कोविड उपचार से सम्बंधित समस्याओं/शिकायतों को दर्ज कराकर उसका निस्तारण करा सके। जिसके क्रम में जनपद लखनऊ में जिलाधिकारी द्वारा 3 सदस्ययी कमेटी का गठन किया गया है, जो कि निम्नवत है।

1) श्री सुनील कुमार -प्ट, स्पेशल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (कस्टम) 6387462917

2) डॉ समीर मिश्रा प्रो0 किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ 9839036117

3) कमाण्ड सेंटर प्रभारी श्री प्रभास कुमार मुख्य विकास अधिकारी 9454465461

नोडल अधिकारी द्वारा बताया गया कि उक्त कमेटी के द्वारा जनपदवासी कोविड उपचार से सम्बंधित शिकायतों जैसे, सही उपचार न होना, अधिक धन की वसूली आदि/अन्य समस्याओं के निस्तारण के लिए उक्त कमेटी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकते है।

प्रदेश के पुलों व नौघाटो के अनुरक्षण एवं मरम्मत हेतु 80 करोड़ रुपए की धनराशि विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के निवर्तन पर रखे जाने की स्वीकृत की गई प्रदान

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए अनुदान संख्या-57 राजस्व मद के अंतर्गत आयोजनेत्तर कार्यों हेतु प्रदेश के नावों के पुल और नौघाट के अनुरक्षण व मरम्मत हेतु रु0 30 करोड़ तथा प्रदेश के पुलों के अनुरक्षण व मरम्मत हेतु रु0 50 करोड़, कुल रु0 80 करोड़, प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के निवर्तन पर रखे जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस संबंध में आवश्यक शासनादेश उत्तर प्रदेश शासन, लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है। जारी शासनादेश में यह निर्देश दिए गए हैं कि व्यवस्थित धनराशि के सापेक्ष बजट मैनुअल एवं वित्तीय हस्त पुस्तिका से संबंधित नियमों, स्थाई आदेशों आदि मे उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबंधों का अनुवार्य रूप से अनुपालन सुनिश्चित करते हुए केवल स्वीकृत योजनाओं/मदों पर ही व्यय किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी दशा में इस धनराशि का उपयोग अन्य मदों के कार्यान्वयन में न किया जाए।





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