राज्यसभा में बहुमत के लिए BJP के इस एक्शन प्लान से छोटे दलों की चिंता बढ़ी

By नीरज कुमार दुबे | Publish Date: Jul 2 2019 12:19PM
राज्यसभा में बहुमत के लिए BJP के इस एक्शन प्लान से छोटे दलों की चिंता बढ़ी
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हाल ही में तेदेपा के छह सांसदों में से चार ने भाजपा का दामन थामा तो उन पर दल बदल कानून लागू नहीं हा पाया। इसी तरह इनेलो के एकमात्र राज्यसभा सांसद भाजपा में आये तो वह भी दल बदल विरोधी कानून से बच गये।

भारतीय जनता पार्टी अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए राज्यसभा में अपना बहुमत हासिल करने के मिशन पर तेजी से काम कर रही है। लोकसभा चुनावों के परिणाम के बाद तेलुगू देशम पार्टी के चार और इंडियन नेशनल लोकदल के एकमात्र राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो चुके हैं और अब इस तरह संसद के ऊपरी सदन में पार्टी के सांसदों की संख्या बढ़कर 76 हो गयी है। राज्यसभा की वेबसाइट के मुताबिक वर्तमान में सदस्यों की कुल संख्या 239 है जिसमें भाजपा 76 सांसदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद कांग्रेस का नंबर आता है जिसके पास 48 सदस्य हैं। तीसरे नंबर पर तीन पार्टियां- समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्नाद्रमुक हैं जिनके पास 13-13 सांसद हैं।



भाजपा इस बारे में आश्वस्त है कि जिन राज्यों में इस साल के अंत में या अगले साल चुनाव होने हैं वह वहां विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करेगी और राज्यसभा में उसकी अंक तालिका में और सुधार आयेगा तथा अगले वर्ष नवंबर माह में उसे अपने बलबूते राज्यसभा में बहुमत मिल जाने की उम्मीद है। लेकिन पार्टी इतना इंतजार करने के मूड में नहीं है और पिछली लोकसभा के जिन अहम विधेयकों को राज्यसभा में विपक्ष ने लटकाया था उन्हें इस बार जल्द से जल्द दोनों सदनों की मंजूरी दिलाने की जुगत में लग गयी है। भाजपा की नजर एक, दो या तीन-चार सांसदों वाली पार्टियों पर लग गयी है। राज्यसभा में वर्तमान में 8 राजनीतिक दल ऐसे हैं जिनके सांसदों की संख्या 1-1 है। भाजपा के इस एक्शन प्लान की भनक लगने से छोटे दलों में हाहाकार मच गया है और यह पार्टियां अपने सांसदों को अपने साथ बनाए रखने की कोशिश में लग गये हैं। इस तरह की खबरें भी हैं कि एक नई पार्टी जिसके तीन राज्यसभा सांसद हैं उनमें से दो भाजपा के साथ जल्द ही जा सकते हैं।
हाल ही में तेदेपा के छह सांसदों में से चार ने भाजपा का दामन थामा तो उन पर दल बदल कानून लागू नहीं हा पाया। इसी तरह इनेलो के एकमात्र राज्यसभा सांसद भाजपा में आये तो वह भी दल बदल विरोधी कानून से बच गये। वर्तमान में राज्यसभा में छह निर्दलीय और चार मनोनीत सांसद हैं। एनडीए के सहयोगी दलों के सांसदों की बात करें तो शिवसेना और अकाली दल के तीन-तीन, असम गण परिषद का 1, जनता दल युनाइटेड के 6, लोक जनशक्ति पार्टी का 1, आरपीआई-ए का 1 सांसद शामिल है। इसके अलावा भाजपा को समय-समय पर मुद्दों के आधार पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 2 और बीजू जनता दल के 7 सांसदों का समर्थन मिलता रहा है।


एनडीए के कुल सांसदों की बात करें तो राज्यसभा में वर्तमान में यह आंकड़ा 111 का हो गया है और वर्तमान में दस स्थान रिक्त हैं। राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों के बाद 5 जुलाई को सदन की दलीय स्थिति में कुछ परिवर्तन होगा और एनडीए के सांसदों की संख्या 115 हो जायेगी। 245 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 123 सदस्य चाहिए और एनडीए लगातार बहुमत के करीब पहुँचता नजर आ रहा है। लेकिन भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि तीन तलाक और नागरिकता संशोधन विधेयक ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर एनडीए में शामिल जनता दल युनाइटेड को आपत्ति है इसलिए सदस्यता बढ़ाओ अभियान सिर्फ पार्टी के स्तर पर नहीं राज्यसभा में भी आगे बढ़ता दिख रहा है।


 

 

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