Calcutta High Court ने NEET पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए 5 त्वरित अदालतें गठित कीं

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने और समयबद्ध फैसले के लिए 29 जुलाई को पांच विशेष त्वरित अदालतों के गठन का प्रशासनिक आदेश जारी किया है। इनमें से तीन अदालतें कोलकाता में और दो अदालतें पोर्ट ब्लेयर में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम 2024 के तहत मामलों की सुनवाई करेंगी। ये अदालतें सीबीआई और राज्य पुलिस द्वारा दर्ज मामलों में आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाएंगी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामलों की सुनवाई के लिए पांच विशेष त्वरित अदालत गठित करने का आदेश दिया है, ताकि मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाते हुए समयबद्ध तरीके से निर्णय सुनाया जा सके। इनमें से तीन अदालत कोलकाता में और दो, पोर्ट ब्लेअर में गठित की जाएंगी। उच्च न्यायालय के एक आदेश के अनुसार, ये अदालतें लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत मामलों की सुनवाई पूरी करेंगी और आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर अंतिम आदेश या फैसला सुनाएंगी।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश भर में लोक परीक्षाओं में धोखाधड़ी के मामलों में मुकदमे में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, हाल में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर छात्रों का देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन भी हुआ था, जिसके कारण शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। इस विवाद के कारण केंद्र सरकार ने प्रश्नपत्र लीक को संगठित अपराध माना है, क्योंकि इससे लाखों छात्रों के भविष्य का निर्धारण करने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले हफ़्ते घोषणा की थी कि परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए त्वरित अदालतें गठित की जाएंगी। कलकत्ता उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार द्वारा 29 जुलाई को इस संबंध में एक प्रशासनिक आदेश जारी किया गया है। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि इन त्वरित अदालतों का दर्जा और पद, पश्चिम बंगाल में प्रशासन के स्थायी रूप से काम कर रही 88 त्वरित अदालतों के बराबर नहीं होगा।
ये अदालतें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राज्य पुलिस जैसी एजेंसियों द्वारा लोक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी। इससे उन मामलों में होने वाली देरी कम होगी, जिनमें कई आरोपी होते हैं, बहुत सारे दस्तावेज़ी सबूत और डिजिटल फोरेंसिक सामग्री रहती है और जिनकी कानूनी कार्यवाही अक्सर लंबे समय तक चलती है।
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