5 अगस्त को क्या बड़ा होने वाला है? डोभाल की एंट्री, गेम सेट, 40 मिनट में कैसे पलट दिया पूरा गेम

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अभिनय आकाश । Jul 31 2026 2:37PM

जिस वक्त संसद के भीतर बवाल अपने चरम पर था। विपक्ष के सांसद वेल तक पहुँच चुके थे, ज़ोरदार नारेबाजी हो रही थी और स्पीकर बार-बार शांति की अपील कर रहे थे। एंटी-पेपर लीक बिल पर किसी भी तरह चर्चा आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही थी और पूरा देश अपने टीवी स्क्रीन पर इस राजनीतिक शोर-शराबे को टकटकी लगाए देख रहा था।

5 अगस्त की तारीख से पहले देश के सुरक्षा और रणनीतिक चक्रव्यूह में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठकों का दौर लगातार जारी है। इस हलचल के दो बड़े मायने निकाले जा रहे हैं-पहला यह कि क्या सरकार किसी बहुत बड़े नीतिगत या रणनीतिक कदम की तैयारी में है? या फिर खुफिया इनपुट्स के आधार पर किसी बड़ी चुनौती को नाकाम करने के लिए यह आपातकालीन मीटिंग्स बुलाई जा रही हैं? इंटेलिजेंस एजेंसियों का अलर्ट और बैठकों की यह रफ्तार बता रही है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़ा होने वाला है। इस रणनीतिक हलचल का सबसे बड़ा सबूत तब देखने को मिला, जब संसद भवन के अंदर टॉप लीडरशिप की यह महा-बैठक शुरू हुई। दरअसल, जिस वक्त संसद के भीतर बवाल अपने चरम पर था। विपक्ष के सांसद वेल तक पहुँच चुके थे, ज़ोरदार नारेबाजी हो रही थी और स्पीकर बार-बार शांति की अपील कर रहे थे। एंटी-पेपर लीक बिल पर किसी भी तरह चर्चा आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही थी और पूरा देश अपने टीवी स्क्रीन पर इस राजनीतिक शोर-शराबे को टकटकी लगाए देख रहा था। लेकिन ठीक उसी पल कैमरे के फ़्रेम में एक ऐसी एंट्री होती है, जिसने लुटियंस दिल्ली के बड़े-बड़े सियासी पंडितों से लेकर विदेशी खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए! देश के सबसे बड़े 'जेम्स बॉन्ड'—यानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बिल्कुल खामोशी से संसद भवन में दाखिल होते हैं। बाहर से देखने पर यह बेहद सामान्य-सी रूटीन विजिट लग रही थी, जिसे सरकारी सूत्रों ने भी सामान्य दौरा ही बताया। लेकिन... जो लोग अजीत डोभाल की कार्यशैली और उनके ट्रैक रिकॉर्ड को जानते हैं, उन्हें यह समझने में एक सेकंड भी नहीं लगा कि इस हंगामे के शोर के पीछे किसी बहुत बड़े, बेहद सीक्रेट कोवर्ट ऑपरेशन की फ़ाइल पर मोहर लग रही है!असल में संसद के वेल में हो रहा हंगामा सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा था। जबकि असल एक्शन संसद भवन के एक बंद कमरे के अंदर चल रहा था। यह कमरा देश के गृह मंत्री अमित शाह का था। जंतर-मंतर पर हुआ हालिया विरोध प्रदर्शन और उसके अंदर भड़की सोची समझी हिंसा के बाद में अमित शाह ने एक मैराथन सिक्योरिटी मीटिंग बुलाई थी। करीब 40 मिनट तक चली इस हाई लेवल मीटिंग के अंदर इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी कि आईबी के चीफ, केंद्रीय गृह सचिव और तमाम पैरामिलिट्री फोर्सेस के डायरेक्टर जनरल मौजूद थे। इसके तुरंत बाद अमित शाह और अजीत डोभाल की एक एकांत मुलाकात भी हुई। 

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पहली बार आईबी चीफ को दिल्ली की कमान

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल शामिल हुए हैं। इनके अलावा बैठक में उपस्थित रहने वाले अन्य मंत्रियों में स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल शामिल हैं। यह बैठक किस विषय पर हो रही है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। नीट (NEET) के प्रश्नपत्र लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन से पूरा देश दहल उठा था। जनमत के भारी दबाव के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। इस माहौल में सरकार पर दबाव बनाए रखने के लिए विपक्ष भी पूरी तरह मताबिभूत है। आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिसिया बर्बरता और दमन का आरोप लगाते हुए विरोधी सांसद लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से माफी मांगने की मांग भी उठी है। इस पूरे घटनाक्रम से पहले अगर थोड़ा पीछे जाएं तो 21 जुलाई को कमिश्नर ऑफ पुलिस दिल्ली चेंज होते हैं और पहली बार दिल्ली की पुलिस की हिस्ट्री में एक आईबी का ऑफिसर पुलिस कमिश्नर बनता है। अचानक दिल्ली में एक आवश्यकता पड़ी ऐसे चीफ की जिसके पास में इंटेलिजेंस का बैकअप है।  दिल्ली हमेशा से एक टारगेट रही है आतंकवाद का। क्योंकि जिसने दिल्ली में एक सनसनी पैदा कर दी उसने पूरे भारत को हिला दिया और पूरे भारत को हिला दिया। 

अचानक संसद क्यों पहुंचे NSA अजीत डोभाल

डोभाल का वहां होना कोई इत्तेफाक नहीं था। भारत का एजुकेशन सिस्टम और उसके अंदर होने वाली सेंधमारी अब सीधे तौर पर इंटरनल सिक्योरिटी का मामला बन चुकी है। विदेशी ताकतें और उनके लोकल प्यादे अच्छी तरीके से जानते हैं कि अगर भारत के युवाओं को भड़काना है तो उन्हें उनके भविष्य को लेकर के डरा दिया जाए। पेपर लीक माफिया सिर्फ पैसे नहीं कमा रहा है बल्कि वो अनजाने में ही देश के भीतर फ्रस्ट्रेशन और गुस्से का एक ऐसा बारूद तैयार कर रहा है जिससे कोई भी विदेशी टूलकिट एक माचिस की तिल्ली से उड़ा सकती है। दोस्तों युवाओं के अंदर असंतोष फैला करके उन्हें सड़कों पर उतारने की साजिशों को रोकने के लिए यह एंटी पेपर लीक बिल एक ब्रह्मास्त्र की तरह लाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली उपद्रवियों को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर पब्लिक प्रॉपर्टी को जलाना, हिंसा करना और कानून तोड़ना किसी भी हाल के अंदर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दंगाई चाहे किसी भी विचारधारा का हो उसे रियायत नहीं मिलेगी। कोर्ट के इस स्पष्ट आदेश के बाद में सीजीपी के वो नेता जो मंच से सीना ठोक के कह रहे थे कि हम एक-एक प्रदर्शनकारी के ऊपर से केस वापस करवा लेंगे वो अचानक से गायब हो चुके हैं। अब हालात यह हैं कि जोश में आकर के गालियां देने वाले युवा स्टेशनों के चक्कर काट रहे हैं, रो रहे हैं, माफी मांग रहे हैं और उनका पूरा करियर दांव पर लग चुका है। उन्हें समझ में आ गया है कि उनके राजनीतिक आकाओं ने सिर्फ अपने एजेंडे के लिए उनका इस्तेमाल किया और अब उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। 

खुफिया एजेंसियों के हाथ ऐसा कौन सा डिजिटल सबूत लग गया है?

मोदी सरकार और अजीत डोभाल का गेम प्लान सिर्फ सड़क पर पत्थर फेंकने वाले मोहरों तक सीमित नहीं है। असली स्ट्राइक उन लोगों पर हो रही है जो एयर कंडीशन कमरों के अंदर बैठकर के पूरी हिंसा की स्क्रिप्ट लिख रहे थे। इसी कड़ी के अंदर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल यानी कि आईएफएसओ ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने डिजिटल दुनिया के अंदर तहलका मचा दिया है। Facebook, एक्स, YouTube और Instagram जैसी दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को दिल्ली पुलिस ने सीधा और कड़ा अल्टीमेटम भेजा है। रिपोर्ट्स और इंटेलिजेंस इनपुट इशारा कर रहे हैं कि जंतरमंतर की हिंसा और देश भर के अंदर फैलाए जा रहे फैक्ट नैरेटिव के पीछे एक बहुत बड़ा इंटरनेशनल मनी ट्रेल है। करोड़ों रुपए की विदेशी फंडिंग के जरिए एक खास इकोसिस्टम इंटरनेट के ऊपर भ्रामक वीडियोस और हेट स्पीच की बाढ़ ला रहा है। 

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