Nandigram Bypoll: Congress उम्मीदवार Milan Pradhan को राहत, Calcutta High Court से मिली जमानत

कलकत्ता हाई कोर्ट ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को सभी छह मामलों में 28 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दे दी है। उनके वकील ने इस कार्रवाई को चुनाव प्रचार से रोकने की साजिश बताया, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अदालत के इस फैसले को ईमानदारी की जीत करार दिया।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम और खेजुरी में उनके खिलाफ दर्ज सभी छह मामलों में अंतरिम ज़मानत दे दी। प्रधान के वकील ने इन छह मामलों में ज़मानत के लिए हाई कोर्ट में अर्ज़ी दी थी। वकील अशफ़ाक अहमद ने ANI को बताया कि राज्य सरकार ने ज़मानत अर्ज़ी का कड़ा विरोध किया, लेकिन बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इनमें से एक मामला 19 साल पुराना है और नंदीग्राम आंदोलन से जुड़ा है। उनके खिलाफ़ सभी छह मामलों में उन्हें ज़मानत मिल गई है। उन्हें कुछ शर्तों के साथ अंतरिम ज़मानत दी गई है, जो 28 अक्टूबर तक लागू रहेगी। राज्य की ओर से इसका कड़ा विरोध किया गया, लेकिन हमारी दलील थी कि इनमें से एक मामला 19 साल पुराना है और एक आंदोलन से जुड़ा है," अहमद ने कहा। अहमद ने आगे आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का मकसद प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव में प्रचार करने से रोकना था। उन्होंने कहा सरकार कांग्रेस से डरी हुई है। अगर कांग्रेस उम्मीदवार को बड़ी बढ़त मिलती है, तो वोट की चोरी का मामला सामने आ जाएगा। इसलिए, वोट की चोरी का सच सामने आने से रोकने के लिए, वे कांग्रेस उम्मीदवार को इतना डराना चाहते थे कि वह प्रचार न कर पाए और लोकतंत्र कमज़ोर हो जाए।" अहमद ने आरोप लगाया कि प्रधान के खिलाफ़ 19 साल पुराने मामले में कार्रवाई की गई, जबकि इसी तरह के मामलों में आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों, जिनमें बीजेपी नेता भी शामिल हैं, का नाम भी था।
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उन्होंने कहा कि इसके बाद, उसी आंदोलन से जुड़े मामलों में बीजेपी के लोग भी शामिल हैं और मौजूदा मुख्यमंत्री का नाम भी उन मामलों में है। फिर भी, 19 साल बाद पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। इसका मतलब है कि यह राजनीतिक बदले की भावना थी। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने अपनी अंतरिम ज़मानत पर कहा कि "ईमानदारी की जीत हुई है"। ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी कानूनी व्यवस्था, कांग्रेस का सम्मान और उसकी प्रतिष्ठा... ईमानदारी की जीत हुई है। यह लड़ाई कांग्रेस के साथ हुए अन्याय के खिलाफ थी। उन्होंने कहा कि मिलन प्रधान कांग्रेस उम्मीदवार बने और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जो लोग इस मामले में शामिल थे, वे मुख्यमंत्री बन गए, जबकि कुछ लोग बाहर घूम रहे हैं।
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