CEC ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा क्यों टाला गया? चुनाव आयोग ने SIR विवाद से संबंध होने से किया इनकार

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मेरठ और वाराणसी दौरे लॉजिस्टिकल कारणों और आधिकारिक कार्यक्रमों में बदलाव के चलते टाल दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि इसका आंतरिक मतभेदों से कोई लेना-देना नहीं है। इसके अलावा हिमाचल, उत्तराखंड और लद्दाख के दौरे भी स्थानीय परिस्थितियों के कारण स्थगित किए गए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मेरठ और वाराणसी के दौरे टाल दिए गए हैं। चुनाव आयोग के वरिष्ठ सूत्रों ने बताया कि यह फ़ैसला 21 सितंबर को लिया गया था और इसका चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों की खबरों से कोई लेना-देना नहीं है।
सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के इन दोनों शहरों के ज़िला अधिकारियों को ईमेल से इसकी जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिकल और स्थानीय कारणों के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के आधिकारिक कार्यक्रमों में बदलाव की वजह से इन दौरों का समय बदला गया है।
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चुनाव आयोग के फैसलों पर विवाद
यह घटनाक्रम चुनाव आयोग के भीतर असहमति की खबरों के बीच सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 और अगस्त 2026 के बीच मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR), वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने, अपीलों और कमीशन के वोटर डेटा सॉफ़्टवेयर तक पहुँच से जुड़े फ़ैसले शामिल थे। उस दौरान तीन सदस्यों वाले कमीशन ने संयुक्त रूप से प्रेस ब्रीफ़िंग करना जारी रखा। संधू और जोशी ने उन कार्यक्रमों में अपनी आपत्तियाँ नहीं उठाईं। इसके अलावा, इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कमीशन ने 2024 के साइकल के बाद से वोटर लिस्ट का स्पेशल समरी रिविज़न (SSR) नहीं किया है। इस प्रक्रिया के तहत नए योग्य वोटर, जिनमें 18 साल के होने वाले लोग भी शामिल हैं, अपना नाम रजिस्टर करवा सकते हैं। कांग्रेस ने इस देरी की आलोचना की है।
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आयोग ने टालने की वजह बताई
सूत्रों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रमों में 1,000 तक युवा शामिल हो सकते हैं, इसलिए इनका समय मौसम, स्थानीय हालात और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करता है। मुख्य चुनाव आयुक्त के भूटान दौरे की वजह से भी कुछ कार्यक्रम टाल दिए गए थे। इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कि एक दौरे पर 1.5 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है, सूत्रों ने कहा कि यह खर्च तभी होता है जब कोई कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। आयोग के सूत्रों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के दौरे भी टाल दिए गए हैं। हिमाचल प्रदेश का कार्यक्रम टूरिस्ट सीज़न और परीक्षाओं की वजह से टाला गया। उत्तराखंड में युवाओं के साथ बातचीत का कार्यक्रम SIR पूरा होने के बाद होगा, जबकि लद्दाख का कार्यक्रम मानसरोवर में हुई आपदा के बाद टाल दिया गया।
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