चंपत राय इस्तीफे के बाद नाराज नहीं, नई व्यवस्था का कर रहे समर्थन: गोविंद देव गिरि

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ANI

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद चंपत राय नाराज नहीं हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि राय मंदिर प्रबंधन की नई व्यवस्था का पूरा समर्थन कर रहे हैं। यह स्पष्टीकरण अयोध्या में राम मंदिर के दान में हुई कथित चोरी के विवाद के बीच आया है।

अयोध्या (उप्र)। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि चंपत राय दान में चोरी के विवाद को लेकर महासचिव पद से त्यागपत्र देने के बाद नाराज नहीं थे और मंदिर प्रबंधन के नये तंत्र का पूरा समर्थन कर रहे थे।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा, "मैं कल चंपत राय जी से मुख्य रूप से उनका हाल-चाल जानने के लिए मिला था। वह स्वस्थ हैं, समाधान खोजने वाले व्यक्ति हैं और उन्हें अपने इस्तीफे को लेकर कोई शिकायत नहीं है।"

गिरि ने बुधवार को राय के साथ अपनी मुलाकात के बारे में बताते हुए कहा, "वह (चंपत) एक अनुभवी व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया है। वे मंदिर प्रबंधन की नयी व्यवस्था का पूरा समर्थन कर रहे हैं और न तो नाराज हैं और न ही गुस्से में हैं।"

गिरि गत छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक के बाद से अयोध्या में ही हैं। इसी बैठक में राय और दूसरे ट्रस्टी अनिल मिश्रा का त्यागपत्र स्वीकृत किया गया था। बैठक के एक दिन बाद ही राय का एक पत्र वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दान में चोरी की जांच कर रहे विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वह अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देंगे।

पत्र के साथ-साथ एसआईटी को दिया गया राय का एक कथित बयान भी वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने राम मंदिर में दान की गिनती की प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

गिरि ने कहा कि उनकी नजर में चंपत राय बिल्कुल 'बेदाग' हैं लेकिन उन्होंने लंबे समय तक 'गलत लोगों' पर भरोसा किया, जिससे कथित गबन का पता नहीं चल पाया। उन्होंने कहा, "मैं अयोध्या के संतों से भी मिला, जो मंदिर के प्रबंधन की नयी व्यवस्था से सहमत हैं और खुश हैं।"

ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चुनने के लिए तीन सदस्यों की एक समिति भी बनाई गई है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और ट्रस्टी सुरेश हवारे शामिल हैं।

गिरि ने बताया कि आगामी 22 जुलाई को ट्रस्ट की एक बार फिर बैठक होगी, जिसमें उन कमियों को दूर करने के उपायों पर चर्चा होगी जिनकी वजह से दान की चोरी हुई। पिछले महीने अयोध्या में राम मंदिर में दान की गिनती में कथित गड़बड़ी का पता चलने के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इस मामले की जांच के लिये प्रदेश सरकार ने एक एसआईटी बनायी थी जिसकी शुरुआती रिपोर्ट के बाद आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

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