Chhattisgarh Heavy Rainfall | छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात के बीच स्कूलों में छुट्टी का ऐलान, जानें कब फिर से खुलेंगे स्कूल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इसकी जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि स्थिति सामान्य होने और बाढ़ का प्रभाव कम होने के बाद ही नियमित कक्षाएं दोबारा शुरू की जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव हो सकता है, नदियों और नालों में जलस्तर बढ़ सकता है और आवागमन में दिक्कतें आ सकती हैं।
छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश और नदियों-नालों के उफान पर होने के कारण उपजे बाढ़ जैसे हालात के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। छात्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए शनिवार को प्रदेश के सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इसकी जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि स्थिति सामान्य होने और बाढ़ का प्रभाव कम होने के बाद ही नियमित कक्षाएं दोबारा शुरू की जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव हो सकता है, नदियों और नालों में जलस्तर बढ़ सकता है और आवागमन में दिक्कतें आ सकती हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि बच्चों को किसी भी तरह के जोखिम का सामना न करना पड़े।
CM ने अधिकारियों को बचाव कार्य करने के निर्देश दिए
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने ज़िला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ और जलभराव को देखते हुए पूरी सतर्कता के साथ राहत और बचाव कार्य करें। इसमें बस्तर संभाग भी शामिल है, जिसमें सात ज़िले आते हैं।
रिलीज़ में साय के हवाले से कहा गया, "प्रभावित इलाकों में ज़रूरतमंद लोगों को मदद पहुंचाने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, प्रशासन को हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।"
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्थिति पर नज़र रखने का भी निर्देश दिया, जिसमें निचले इलाकों और नदियों व नालों के पास बसे गांवों और बस्तियों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में लगातार भारी बारिश हुई, जिससे निचले इलाके जलमग्न हो गए, नदियों का जलस्तर बढ़ गया और बस्तर क्षेत्र में दूर-दराज़ की बस्तियां कट गईं।
इस बीच, उन्होंने राहत और बचाव टीमों को ज़रूरी संसाधनों के साथ तैयार रहने को कहा और ज़िला प्रशासन, पुलिस, शहरी स्थानीय निकायों, पंचायतों और अन्य विभागों को आपसी तालमेल से काम करने का निर्देश दिया ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ज़रूरत के हिसाब से सुरक्षित आश्रय, भोजन, पीने का पानी, दवाएं और अन्य ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध हों।
कोंडागांव ज़िले में भारी बारिश से एक व्यक्ति की मौत
अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण कोंडागांव ज़िले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। शुक्रवार को पानी से भरे धान के खेत में मछली पकड़ते समय 40 साल का एक किसान पानी से भरे नाले में गिरकर डूब गया।
गौरतलब है कि 1 जून से 25 सितंबर के बीच राज्य में औसतन 1,082.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 10 साल के मौसमी औसत (1,081.5 मिमी) का 100.1 प्रतिशत है। अकेले पिछले 24 घंटों में राज्य में औसतन 52.8 मिमी बारिश हुई।
बलरामपुर में सबसे ज़्यादा बारिश
IMD ने बताया कि बलरामपुर में मौसमी औसत के मुकाबले सबसे ज़्यादा बारिश (169.4 प्रतिशत या 1,527.7 मिमी) दर्ज की गई, जबकि नारायणपुर में सबसे ज़्यादा कुल बारिश (1,600.4 मिमी) दर्ज की गई।
हालांकि, कुछ ज़िलों में सामान्य से कम बारिश हुई, जैसे सरगुजा में 606.6 मिमी (75.5 प्रतिशत), जशपुर में 828.7 मिमी (79.7 प्रतिशत), कबीरधाम में 672 मिमी (82.2 प्रतिशत), बेमेतरा में 597.1 मिमी (74.5 प्रतिशत) और कांकेर में 1,110.7 मिमी (75.9 प्रतिशत) बारिश दर्ज की गई। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में सामान्य बारिश का 74.7 प्रतिशत और बीजापुर में 78.7 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोरबा, जांजगीर-चांपा, दुर्ग और राजनांदगांव में बारिश सामान्य के करीब रही।
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