दिल्ली सरकार का बड़ा संकल्प: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अगले 4 वर्षों में प्रदूषण कम करने के लिए पेश किया मास्टर प्लान

रेखा गुप्ता ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कई विभागों को शामिल करते हुए एक कार्य योजना प्रस्तुत की और अधिकारियों को ‘स्पष्ट और परिणामों पर केंद्रित’ तरीके से काम करने का निर्देश दिया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को राजधानी में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्य योजना की घोषणा की। एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद, उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अगले चार वर्षों के भीतर दिल्ली के वायुमंडल में मौजूद PM 2.5 के स्तर को न्यूनतम स्तर पर लाना है।
रेखा गुप्ता ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कई विभागों को शामिल करते हुए एक कार्य योजना प्रस्तुत की और अधिकारियों को ‘स्पष्ट और परिणामों पर केंद्रित’ तरीके से काम करने का निर्देश दिया। पीएम 2.5 हवा में मौजूद सूक्ष्म कण होते हैं जो सांस के साथ शरीर में फेफड़ों तक जा सकते हैं और ये स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करते हैं। गुप्ता ने कहा, ‘‘प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लंबी है; हमारी सरकार चार साल की अवधि में वायु प्रदूषण (पीएम 2.5) के स्तर को काफी हद तक कम करने के लिए एक स्पष्ट, और परिणामों पर केंद्रित कार्य योजना पर काम कर रही है।
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प्रदूषण के खिलाफ 'परिणाम-केंद्रित' रणनीति
मुख्यमंत्री ने दिल्ली के विभिन्न विभागों (लोक निर्माण विभाग, परिवहन, और पर्यावरण मंत्रालय) के अधिकारियों के साथ बैठक कर एक सख्त रोडमैप तैयार किया है।
कार्य योजना के मुख्य बिंदु:
PM 2.5 पर प्रहार: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि PM 2.5 जैसे सूक्ष्म कण, जो फेफड़ों के लिए सबसे घातक माने जाते हैं, सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं।
अंतर-विभागीय समन्वय: विभिन्न विभागों को 'स्पष्ट और परिणामों पर केंद्रित' (Clear and Result-oriented) तरीके से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
समय सीमा: सरकार ने अगले चार वर्षों की एक निश्चित अवधि तय की है, जिसके दौरान प्रदूषण नियंत्रण के उपायों का प्रभाव जमीन पर दिखना चाहिए।
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PM 2.5: स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा
PM 2.5 (Particulate Matter 2.5) हवा में मौजूद वे सूक्ष्म कण हैं जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है।
जोखिम: ये कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए फेफड़ों की गहराई तक चले जाते हैं और रक्त प्रवाह (Bloodstream) में भी मिल सकते हैं। इससे हृदय रोग, अस्थमा और सांस संबंधी अन्य गंभीर बीमारियाँ होने का खतरा रहता है।
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