चीनी सैनिकों के मार्शल आर्ट से ज्यादा घातक हैं भारतीय सेना के घातक कमांडो, हथियारों के बिना भी लड़ाई में सक्षम

चीनी सैनिकों के मार्शल आर्ट से ज्यादा घातक हैं भारतीय सेना के घातक कमांडो, हथियारों के बिना भी लड़ाई में सक्षम

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव के बीच चीन ने यै पैतरा अपनाया है। मगर उसको पता नहीं है कि चीनी मार्शल आर्ट का सामना करने के लिए भारतीय सेना के घातक कमांडो तैनात हैं।

लद्दाख। भारत-चीन के बीच जारी गतिरोध के बीच अब चीन माइंड गेम खेलने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए वह मार्शल आर्ट ट्रेनर को तिब्बत भेजने वाला है। चीनी मीडिया के हवाले से सामने आई खबर के मुताबिक चीन अपने सैनिकों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने वाला है और इसके लिए 20 मार्शल आर्ट ट्रेनर को तिब्बत भेज रहा है। लेकिन चीन यह भूल गया कि उसका सामना किससे हो रहा है।

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव के बीच चीन ने यै पैतरा अपनाया है। मगर उसको पता नहीं है कि चीनी मार्शल आर्ट का सामना करने के लिए भारतीय सेना के घातक कमांडो तैनात हैं। भारतीय सेना के घातक कमांडो बिना किसी हथियार के दुश्मनों का खात्मा कर सकते हैं। 

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मिली जानकारी के मुताबिक, 43 दिन के कड़े प्रशिक्षण को पूरा करने के लिए एक घातक कमांडो तैयार होता है। प्रशिक्षण में जवान को 35 किलो वजन के साथ बिना रुके 40 किमी तक दौड़ना पड़ता है। जो उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत करता है। एक अधिकारी ने बताया कि हथियारों के अलावा घातक कमांडों को हाथों से भी युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता है और तो और वे मार्शल आर्ट में भी माहिर होते हैं।

दुश्मनों को चौंकाने में होते हैं माहिर

घातक कमांडों एक ही झटके में दुश्मनों पर हमला करते हैं और उन्हें चौंका देते हैं। इनका हमला इतना जोरदार होता है कि दुश्मन को जरा सा भी संभलने का मौका नहीं मिलता है। ऐसे में चीन को भारत के साथ माइंड गेम खेलने से पहले जरा सोचना चाहिए था। क्योंकि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना ने अपने घातक कमांडो को तैनात किया है। 

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LAC के आस-पास नहीं हो सकती फायरिंग

भारत और चीन के बीच साल 1996 में हुए समझौते के मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से 2 किमी के दायरे में न तो फायरिंग की जाएगी और न ही किसी भी तरह के खतरनाक रसायनिक हथियार, बंदूक या फिर विस्फोटक को इजाजत दी जाएगी। इसीलिए यहां पर हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

15 जून को भारत और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प से पहले भी चीन ने मार्शल आर्ट ट्रेनर को तिब्बत भेजा था और अभी भी भेजने वाला है। ऐसे में भारतीय सेना अपने सबसे बेहतरीन कमांडो यूनिट की तैनाती एलएसी पर कर दी है।





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