Troll करेंगे लोग पर भावनाएं ही ताकत: CJP साथियों की Judicial Custody पर बोले Abhijeet Dipke

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अंकित सिंह । Oct 20 2026 2:22PM

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश मामले में हिरासत में बंद अपने साथियों सौरव दास और आशुतोष रांका के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि भावनाएं ही उनकी ताकत हैं। वहीं दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ने के बाद इस मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी है।

'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मंगलवार को अपनी पार्टी के साथियों सौरव दास और आशुतोष रांका के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि त्योहारों के इस मौसम में वे अपने परिवारों के साथ नहीं रह सके। जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले में CJP के सह-संयोजक दास और रंका न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी पांच दिन की हिरासत रविवार को खत्म हो गई थी, जिसे सोमवार को दो दिन और बढ़ा दिया गया।

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दिपके ने कहा कि भले ही कुछ लोग उन्हें "ट्रोल" करें, लेकिन वे भावुक हो रहे थे क्योंकि वे दास और रंका की परवाह करते हैं और उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। इंस्टाग्राम पर एक लाइव स्ट्रीम के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग मेरे भावुक होने पर मुझे ट्रोल करेंगे। लेकिन मेरी भावनाएं ही मेरी ताकत हैं। मैं ऐसा इसलिए करता हूं क्योंकि वे दोनों मेरे परिवार की तरह हैं। मैं उनकी परवाह करता हूं। यह उनके लिए मेरा प्यार है।" दिपके ने आगे कहा कि त्योहारों के समय अपने परिवारों के साथ रहें। लेकिन जब आप अपने परिवारों के साथ हों, तो कृपया सौरव और आशु को भी याद रखें, क्योंकि वे दोनों अपने परिवारों के साथ नहीं रह सकते।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने के तुरंत बाद उनके खिलाफ अनधिकृत प्रवेश के मामले को सोमवार को अपनी अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। कनॉट प्लेस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223ए (लोक सेवक द्वारा विधिवत लागू आदेश की अवहेलना), 332 (अपराध करने के लिए अनधिकृत प्रवेश) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। संसद मार्ग थाने में बीएनएस की धारा 221 (लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 132 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 121(1) (लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए स्वेच्छा से चोट या गंभीर चोट पहुंचाना) और 3(5) (समान मंशा) के तहत एक अन्य प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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पुलिस ने अब आगे की जांच के लिए मामले को अपराध शाखा की अंतरराज्यीय प्रकोष्ठ को सौंप दिया है। दास और रांका को जंतर-मंतर तक पहुंचने के लिए निजी परिसर में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने और शांति बनाए रखने के बॉण्ड का उल्लंघन करने के आरोप में 14 अक्टूबर को एक विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। उनके सहयोगी अजिंक्य शिंदे को छह महीने के लिए शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया तथा निजी मुचलके व जमानत पर रिहा कर दिया गया। तीनों और कॉजपा के अन्य सदस्यों को 13 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित तौर पर प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। 

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