CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की बढ़ी मुश्किलें: तिहाड़ से रिहाई के तुरंत बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच ने भेजा समन

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, CJP के सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी समन भेजा गया है। यह जांच बिना अनुमति कहीं घुसने (trespassing) और किसी सरकारी अधिकारी के आदेश की अवहेलना करने के आरोपों से जुड़ी है। दास और रंका को गुरुवार दोपहर 12 बजे राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच के दफ्तर में पेश होने के लिए कहा गया है।
तिहाड़ जेल से एक हफ्ते की न्यायिक हिरासत के बाद हाल ही में रिहा हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के सह-संयोजकों-सौरव दास (Sourav Das) और आशुतोष रंका (Ashutosh Ranka) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (Crime Branch) ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़े दो मामलों में पूछताछ और बयान दर्ज कराने के लिए दोनों नेताओं को औपचारिक समन जारी किया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, CJP के सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी समन भेजा गया है। यह जांच बिना अनुमति कहीं घुसने (trespassing) और किसी सरकारी अधिकारी के आदेश की अवहेलना करने के आरोपों से जुड़ी है। दास और रंका को गुरुवार दोपहर 12 बजे राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच के दफ्तर में पेश होने के लिए कहा गया है। यह समन तब आया है, जब ये दोनों नेता एक हफ्ते तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद तिहाड़ जेल से रिहा हुए हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्राइम ब्रांच उन दो मामलों की जांच कर रही है, जो CJP सदस्यों द्वारा जंतर-मंतर में घुसने और विरोध-प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश से जुड़े हैं। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। यह मांग मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर की गई थी।
दो मामले क्राइम ब्रांच को सौंपे गए
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर की घटना से जुड़े दोनों मामलों को आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। इनमें से एक मामला कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में, जबकि दूसरा संसद मार्ग (पार्लियामेंट स्ट्रीट) पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
पुलिस के अनुसार, दास, रंका और CJP के अन्य सदस्यों ने जंतर-मंतर इलाके में घुसने की कोशिश की, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह (designated protest site) नहीं माना जाता है। बताया जा रहा है कि यह समूह बैरिकेड्स पार करके एक निजी प्रतिष्ठान के रास्ते इलाके में दाखिल हो गया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में सरकारी अधिकारी के आदेश की अवहेलना, बिना अनुमति कहीं घुसने (house trespass) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश रचने जैसे आरोप शामिल हैं।
संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज दूसरी FIR में सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने, उन पर हमला करने और घटना के दौरान पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचाने के आरोप हैं।
इन दोनों मामलों को विशेष जांच इकाई (क्राइम ब्रांच) को सौंपे जाने से, इस विरोध-प्रदर्शन की जांच में एक नया मोड़ आ गया है। न्यायिक हिरासत में सात दिन बिताने के बाद रिहाई
बुधवार को दास और रंका तिहाड़ जेल से बाहर आ गए। इससे पहले, एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दिल्ली पुलिस की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत को तीन दिन और बढ़ाने की मांग की गई थी।
ये दोनों नेता 14 अक्टूबर से हिरासत में थे। उन पर शांति भंग करने और पहले दिए गए 'शांति बॉन्ड' (पीस बॉन्ड) का उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई शुरू की गई थी। मजिस्ट्रेट ने उन्हें रिहा करने का आदेश तब दिया, जब उन्होंने 50,000-50,000 रुपये के निजी बॉन्ड और जमानत राशि जमा की। साथ ही, उन्होंने शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का लिखित वचन भी दिया।
इस वचन के तहत, दोनों ने सहमति जताई कि जब तक जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक वे वहां किसी प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में होने वाले कोई भी विरोध-प्रदर्शन संवैधानिक दायरे के भीतर ही होंगे। अदालत ने माना कि दोनों नेताओं द्वारा दिए गए आश्वासनों को देखते हुए, उन्हें और अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपने बॉन्ड और वचनों का पालन करने और आगे की कानूनी कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन
CJP के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) में गड़बड़ियां की गई हैं और कई मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
इससे पहले, 10 अक्टूबर को एक प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से ठीक पहले, इन दोनों को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। तब उन्हें 50,000-50,000 रुपये के 'शांति बॉन्ड' भरने के बाद रिहा कर दिया गया था। 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद उन्हें फिर से हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने उन पर 'शांति बॉन्ड' के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू की।
अब, दो FIR की जांच के सिलसिले में दास और रंका को क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए समन भेजा गया है। जब ये दोनों नेता जांच टीम के सामने पेश होंगे, तो इस मामले में आगे क्या होता है, यह देखना होगा।
Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
अन्य न्यूज़














