छठ महापर्व सम्पन्न, CM नीतीश से लेकर डिप्टी सीएम रेणु देवी तक ने अपने आवास में की पूजा

छठ महापर्व सम्पन्न, CM नीतीश से लेकर डिप्टी सीएम रेणु देवी तक ने अपने आवास में की पूजा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छठ पर्व के अंतिम दिन मुख्‍यमंत्री ने तमाम प्रदेशवासियों को छठ की शुभकामना देते हुए कोरोना संक्रमण का ध्‍यान रखते हुए पर्व मनाने की सलाह भी दी। उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद कटिहार शहर के बीएमपी छठ घाट पर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर की उपासना की और अर्घ्य दिया।

आराधना का दिन मन्नतें मांगने का दिन और भगवान के दिए गए मदों का शुक्रिया अदा करने का दिन यानि छठ। सूर्य उपासना और माता की षष्टी करने का एकलौता ऐसा पर्व। जिसमें न केवल उगते सूरज बल्कि डूबते सूरज की भी उपासना की जाती है। आस्था के महापर्व छठ के चौथे दिन आज सुबह व्रतियों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। इसी के साथ चार दिनों तक चले छठ पर्व का समापन हो गया। तड़के सुबह ही घाट पर श्रद्धालु पहुंचे उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। बिहार की राजधानी पटना के अलग-अलग गंगा घाटों, तालाबों, जलाशयों, घर और अपार्टमेंट की छतों पर व्रतियों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया और पूजा अर्चना की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में एक अणे मार्ग स्थित सीएम हाउस में परिवार के साथ छठ पूजा की। सीएम आवास परिसर में बने छोटे तालाब में उन्होंने अर्घ्य दिया। इस दौरान सीएम नीतीश कुमार ने परंपरागत रूप से जल देकर अर्ध्य दिया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छठ पर्व के अंतिम दिन मुख्‍यमंत्री ने तमाम प्रदेशवासियों को छठ की शुभकामना देते हुए कोरोना संक्रमण का ध्‍यान रखते हुए पर्व मनाने की सलाह भी दी। उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद कटिहार शहर के बीएमपी छठ घाट पर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर की उपासना की और अर्घ्य दिया। वहीं उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने भी अपने आवास पर छठ पूजा की। बिहार के साथ-साथ देश के अलग-अलग राज्यों में छठ पर्व की धूम देखने को मिली। भक्तों ने नदी, जलाशयों पर सुबह-सुबह पहुंचकर उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिया। 

इसे भी पढ़ें: सप्तमी तिथि को ऊषा अर्घ्य देकर सम्पन्न होता है छठ पर्व

पूरी दुनिया उगते हुए सूरज को प्रणाम करती है। यानी जो लोग बड़े हो रहे हैं, जिनके पास शक्ति है सामर्थ्य है उनको प्रणाम करती है। लेकिन भारत की संस्कृति बिहार के एक कोने से पूरे विश्व को ये समझा रही है कि जो हमारे लिए जले हैं, जो हमारे लिए तपे हैं। आज वो अगर नहीं हैं, काल के अंधकार में समा गए हैं तब भी वो हमारे प्रणाम के योग्य हैं।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept