कोविड व्यस्ताओं के बीच पश्चिम बंगाल और असम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का स्ट्राइक रेट बेहतर

कोविड व्यस्ताओं के बीच पश्चिम बंगाल और असम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का स्ट्राइक रेट बेहतर

वही असम में शिवराज सिंह चौहान ने 04 सभाए की जिसमें से चार की चारों विधानसभाओं में बीजेपी ने जीत का परचम फैराया है। जहाँ असम की पलासबाड़ी में हिमांग ठाकुरिया जीते तो नाहरकटिया में तरंगा गोगोई, दुलियाजन में तेरस गोवाला और डिब्रूगढ़ में प्रशांत फुकन ने जीत दर्ज की है।

भोपाल। पश्चिम बंगाल सहित असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम सबके सामने है। जहाँ पश्चिम बंगाल में तीसरी बार ममता बनर्जी ने तीसरी बार राज्य में सरकार बनाई तो वही असम में बीजेपी ने एक बार फिर कमल खिला दिया, केरल में लेफ्ट तो तमिलनाडु में द्रमुक और पुडुचेरी में एनआर कांग्रेस वाले राजग गठबंधन ने अपना झंडा फहरा दिया है। जहाँ इन चुनावों में भाजपा, कांग्रेस सहित क्षेत्रिय पार्टीयों ने धूंआधार प्रचार किया और जनता के बीच पहुँचकर अपनी बात रखी उसी का परिणाम है कि जीत हासिल करने वाले राजनैतिक दलों के नेता इसका श्रेय लेने से पीछे नहीं हट रहे है। 

 

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जहाँ पश्चिम बंगाल में मोदी-शाह की जोड़ी फेल होती दिखी तो वही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर अजेय विजेता के रूप में इन प्रदेशों में हुए चुनाव में सबसे सामने है। शिवराज सिंह चौहान भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति के सदस्य और स्टार प्रचारक के रूप में पश्चिम बंगाल और असम के चुनावी मैदान में धूंआधार सभाए करते हुए नज़र आए। कोविड-19 को लेकर मध्य प्रदेश में व्यस्ताओं के बीच शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल में तीन सभाए की जिसमें मोयना,खेजुरी और जगतवल्लभपुर में उन्होंने पार्टी के लिए जी तोड़ प्रचार किया और सभाओं के साथ रोड़ शो भी किए। जिसमें से मोयना में वह भाजपा प्रत्याशी अशोक डिंडा और खेजुरी में शांतनु प्रमाणिक को जिताने में कामयाब रहे जबकि जगतवल्लभपुर में भाजपा प्रत्याशी अनुपम घोष जीत दर्ज नहीं कर सके। वही असम में शिवराज सिंह चौहान ने 04 सभाए की जिसमें से चार की चारों विधानसभाओं में बीजेपी ने जीत का परचम फैराया है। जहाँ असम की पलासबाड़ी में हिमांग ठाकुरिया जीते तो नाहरकटिया में तरंगा गोगोई, दुलियाजन में तेरस गोवाला और डिब्रूगढ़ में प्रशांत फुकन ने जीत दर्ज की है। 

 

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हालंकि  मध्य प्रदेश की एक मात्र दमोह विधानसभा पर हुए उप चुनाव में भाजपा जीत दर्ज कर पाने में कामयाब नहीं हो सकी। यहाँ बीजेपी संगठन ने मोर्चा सम्हाल रखा था। कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए राहुल लोधी को बीजेपी ने यहाँ से अपना उम्मीदवार बनाया था जिनको जिताने के लिए प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो से सांसद विष्णुदत्त शर्मा सहित केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र सिंह ने भाजपा प्रत्याशी को जिताने की भरकस कोशिश की। वही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच चुनाव प्रचार में तो गए लेकिन उन्होंने जायदा समय कोविड व्यवस्थाओं और फैल रहे  कोरोना संक्रमण को कम करने के लिए दिया जिसके सुखद परिणाम धीरे-धीरे दिख रहे है चाहे वह ऑक्सीजन की आपूर्ति हो या फिर रेमडेसिविर इंजेक्शन आपूर्ति के लिए किए गए प्रयास रहे हो। प्रदेश की जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को निभाते वही वह दमोह चुनाव के अंतिम दौर में वहाँ सभाए नहीं ले पाए शायद यही कारण रहा कि यहाँ भाजपा को हार का मुँह देखना पड़ा। 

 

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राजनीतिक जानकारों की माने तो अगर एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दूसरी तरफ संगठन से जुड़े नेताओं की सभाओं और प्रचार को रख दिया जाए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही भारी पड़ते हुए दिखाई देंगे इसका प्रमुख कारण उनका जनता से सीधा संवाद और लोगों के बीच पकड़ है। वह प्रदेश के लोगों की ह्दय में बसने वाले नेता है इसीलिए उन्हें जहाँ प्रदेश के बच्चे मामा तो महिलाएं अपना भाई तो लोगो उन्हें एक संवेदनशील व्यक्ति मानते है। यही कारण है कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों व नेताओं की इन विधानसभा चुनावों में स्ट्राइक रेट की बात करें तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का स्ट्राइक रेट अन्य भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्रियों से अच्छा रहा है। 





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