स्मृति ईरानी के परिवार से जुड़ी कंपनी और गोवा के बार मालिक के बीच पट्टा समझौता हुआ था: रॉड्रिग्स

 Smriti Irani
ANI
सामाजिक कार्यकर्ता आयर्स रॉड्रिग्स ने सोमवार को गोवा आबकारी आयुक्त के समक्ष सुनवाई के दौरान एक पट्टा समझौता पेश किया, जिसपर उत्तरी गोवा में स्थित एक विवादित रेस्तरां के मालिकों और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के परिवार से कथित तौर पर जुड़ी कंपनी के हस्ताक्षरथे।

पणजी। सामाजिक कार्यकर्ता आयर्स रॉड्रिग्स ने सोमवार को गोवा आबकारी आयुक्त के समक्ष सुनवाई के दौरान एक पट्टा समझौता पेश किया, जिसपर उत्तरी गोवा में स्थित एक विवादित रेस्तरां के मालिकों और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के परिवार से कथित तौर पर जुड़ी कंपनी के हस्ताक्षरथे। हालांकि, उत्तरी गोवा के असगाओ में सिली सोल्स कैफे एंड बार के मालिक दिवंगत एंथनी डिगामा के परिवार के एक वकील ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि “पट्टा समझौता कभी भी पट्टा विलेख में परिवर्तित नहीं हुआ, इसलिए इसके तहत पक्षों को कोई अधिकार नहीं मिल पाया।”

इसे भी पढ़ें: गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर जोरदार हमला, बोले- 7 जन्म लेंगे तब भी RSS की बराबरी नहीं कर पाएंगे

ईरानी ने अपनी बेटी का नाम रेस्टोरेंट से जोड़ने के लिए कांग्रेस के तीन नेताओं के खिलाफ मानहानि का दीवानी मुकदमा दायर किया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पाया था कि ईरानी और उनकी बेटी न तो गोवा में रेस्तरां की मालिक हैं और न ही उन्होंने कभी भोजन व पेय पदार्थों के लाइसेंस के लिए आवेदन किया, जैसा कि आरोप लगाया गया है। रॉड्रिग्स ने 29 जून को एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मापुसा में आबकारी कार्यालय ने दिवंगत व्यक्ति एंथनी डिगामा के नाम पर रेस्तरां के उत्पाद लाइसेंस को अवैध रूप से नवीनीकृत किया था। सोमवार को आबकारी आयुक्त नारायण गाड के समक्ष सुनवाई के दौरान, रॉड्रिग्स ने दावा किया कि असगाओ गांव के सर्वेक्षण संख्या 236/22 के तहत संपत्ति, जहां सिली सोल्स बार एंड कैफे स्थित बताया गया है, वह डिगामा ने अपने बेटे के माध्यम से ‘एटॉल फूड एंड बेवरेजेज एलएलपी’ को 1 जनवरी, 2021 से 50,000 रुपये के मासिक किराए पर 10 साल की अवधि के लिए पट्टे पर दिया था।

इसे भी पढ़ें: एशिया कप 2022: श्रीलंकाई फैन का मुरीद हुआ पाकिस्तान का ये गेंदबाज, गिफ्ट में दे दी जर्सी

‘एटॉल फूड एंड बेवरेजेज एलएलपी’ कथित तौर पर ईरानी के परिवार से जुड़ी हुई है। रॉड्रिग्ज ने एक हलफनामे के जरिए जांच अधिकारी के सामने यह पट्टा समझौता पेश किया। आबकारी आयुक्त के समक्ष सुनवाई के बाद, डिगामा परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता बेनेडिक्ट नाजरत ने कहा कि पट्टा समझौता कभी भी पट्टा विलेख में परिवर्तित नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “पट्टा समझौते और पट्टा विलेख के बीच अंतर है। पट्टा समझौते में कहा गया है कि पार्टियां यदि चाहें तो संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के तहत पट्टा विलेख बनवा सकती हैं।

Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


अन्य न्यूज़