Congress 29 सितंबर को Delhi में करेगी Dalit Adivasi Swabhiman Baithak

Congress 29 सितंबर को Delhi में करेगी Dalit Adivasi Swabhiman Baithak
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उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए कथित शुद्धीकरण कार्यक्रम के विरोध में कांग्रेस ने यह बैठक बुलाई है। पार्टी का एससी और एसटी सांसद मंच मावलंकर हॉल में इस राष्ट्रीय मंथन का आयोजन करेगा। इसमें दोनों सदनों के सांसद, पूर्व सांसद, राज्यों के मंत्री और विधायक मिलकर भविष्य की रणनीति तय करेंगे।

कांग्रेस ने रविवार को मोदी सरकार पर ‘‘दलित विरोधी’’ और ‘‘आदिवासी विरोधी’’ होने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी उत्तराखंड में पिछले महीने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद किए गए ‘‘शुद्धीकरण’’ कार्यक्रम को लेकर 29 सितंबर को ‘दलित-आदिवासी स्वाभिमान बैठक’ आयोजित करेगी। यह बैठक कांग्रेस अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी) सांसद मंच की ओर से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विभागों के सहयोग से कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर हॉल में आयोजित की जाएगी। कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा, ‘‘बैठक में अगस्त में उत्तराखंड के हल्द्वानी में खरगे जी की जनसभा के बाद हुए शुद्धीकरण कार्यक्रम पर चर्चा की जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि पूरे देश में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का उल्लंघन हुआ है।

रवि ने कहा कि बैठक भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक रूपरेखा तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के सभी कांग्रेस सदस्य, पूर्व सांसद, कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्री, विधायक और एआईसीसी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। रवि ने कहा कि यह बैठक मुख्य रूप से हल्द्वानी में खरगे की जनसभा के बाद किए गए शुद्धीकरण कार्यक्रम पर चर्चा के लिए बुलाई जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह केवल खरगे जी का अपमान नहीं था, बल्कि पूरे एससी/एसटी समुदाय का अपमान था।’’ रवि ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज नहीं की। उन्होंने कहा कि सांसदों के संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन करने के बाद हल्द्वानी में प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा शासित राज्य में यही हो रहा है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस घटना का समर्थन कर रही है, क्योंकि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कथित तौर पर ‘‘शुद्धीकरण’’ कार्यक्रम करने वाले राम सेना के सदस्यों का खुलकर समर्थन किया।

रवि ने दावा किया कि भाजपा जानबूझकर जाति के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करना चाहती है। कांग्रेस नेताओं मनोज कुमार, तनुज पुनिया, कर्मवीर बौद्ध, भजन लाल जाटव और विक्रांत भूरिया के साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रवि ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी), गृहमंत्री (अमित शाह) और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (पुष्कर सिंह धामी) ने अब तक इस घटना की निंदा नहीं की है।’’ कुमार ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ‘‘दलित विरोधी’’ और ‘‘आदिवासी विरोधी’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार में दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं।

उन्हें पीटा जाता है, अपमानित किया जाता है। इसलिए मेरा देश के सभी दलित-आदिवासी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों से आग्रह है कि वे 29 तारीख को होने वाली दलित-आदिवासी सम्मान बैठक में शामिल हों और अन्याय के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करें।’’ बैठक में देशभर में एससी और एसटी समुदायों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा की उन घटनाओं पर भी चर्चा होगी, जो नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के उल्लंघन से जुड़ी हैं। मंच ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को आत्मसम्मान, गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का अधिकार देता है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के नागरिक भी शामिल हैं।

एससी/एसटी समुदायों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के लगातार उल्लंघन पर चिंता जताते हुए मंच ने कहा कि इन समुदायों से आने वाले जनप्रतिनिधियों को संसद, राज्य विधानसभाओं और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से भेदभाव एवं सामाजिक पूर्वाग्रह के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना चाहिए। यह पहल एससी, एसटी, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और अल्पसंख्यक विभागों के राष्ट्रीय समन्वयक एवं झारखंड के कांग्रेस प्रभारी के राजू, कांग्रेस एससी विभाग के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ से विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के सहयोग से आयोजित की जा रही है। हल्द्वानी में आठ अगस्त को खरगे की जनसभा के बाद 11 अगस्त को रामलीला मैदान में कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर ‘‘शुद्धीकरण यज्ञ’’ किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 29 अगस्त को नयी दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में इस घटना की आलोचना की थी और ‘‘शुद्धीकरण’’ के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।

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