Union Budget से पहले Congress की बड़ी चेतावनी, Jairam Ramesh बोले- नाजुक दौर में है Economy

Jairam Ramesh
प्रतिरूप फोटो
ANI
अंकित सिंह । Jan 12 2026 12:08PM

जयराम रमेश ने चेतावनी दी है कि आगामी बजट से पहले राज्य और अर्थव्यवस्था एक नाजुक दौर में हैं, क्योंकि राज्य नए वित्तीय फार्मूले से आशंकित हैं और देश में निवेश व बचत की दरें गिर रही हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह "सांख्यिकीय भ्रम" से परे जाकर वास्तविक आर्थिक चुनौतियों का सामना करे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोमवार को आगामी केंद्रीय बजट को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि संसद के अगले सत्र की तैयारियों के बीच राज्य सरकारें और व्यापक अर्थव्यवस्था एक नाजुक दौर में प्रवेश कर रही हैं। संसदीय कार्यक्रम की घोषणा के बाद X पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट लगभग 20 दिनों में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बजट में अनिवार्य रूप से 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल होंगी, जिसने 17 नवंबर, 2025 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

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रमेश ने कहा कि ये सिफारिशें 2026-27 से 2031-32 तक की अवधि को कवर करती हैं और केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे के साथ-साथ राज्यों के बीच इस राजस्व के वितरण से संबंधित हैं। राज्य सरकारों में बढ़ती बेचैनी को उजागर करते हुए, कांग्रेस नेता ने वीबी-जी आरएएम जी अधिनियम, 2025 में नए लागत-साझाकरण फार्मूले की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें "नए कानून में लागू 60:40 के लागत-साझाकरण फार्मूले से पहले से ही बहुत चिंतित हैं, जो एमजीएनआरईजीए को खत्म कर देगा। उन्होंने आगे कहा कि बजट नजदीक आने के साथ ही वे और भी ज्यादा आशंकाओं के साथ चिंतित होंगी।

रमेश ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद तीन प्रमुख चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, कर कटौती और मजबूत लाभ मार्जिन के बावजूद निजी कंपनियों का निवेश सुस्त बना हुआ है; घरेलू बचत दरें तेजी से गिरी हैं, जिससे निवेश क्षमता सीमित हो गई है; और धन, आय और उपभोग में असमानताएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, और कहा कि ये मुद्दे विकास और रोजगार सृजन की स्थिरता के लिए खतरा हैं।

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सरकार के दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए रमेश ने कहा कि यह देखना बाकी है कि आगामी बजट "सांख्यिकीय भ्रमों के आरामदायक दायरे" से बाहर निकलकर आर्थिक वास्तविकताओं को स्वीकार करता है और सार्थक सुधारात्मक कदम उठाता है या नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि उच्च जीडीपी वृद्धि दर, जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है, तब तक कायम नहीं रह सकती जब तक आगामी बजट में इन संरचनात्मक चुनौतियों का तत्काल समाधान नहीं किया जाता।

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