Congress ने महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न मामले में उठाया सवाल, मांगा PM Modi और Shah का इस्तीफा

जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल एफआईआर दर्ज कराने और कार्रवाई की मांग की है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की शिकायत निष्पक्ष जांच के लिए अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दी है।
नयी दिल्ली, चार अक्टूबर कांग्रेस ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न पर उन्होंने संज्ञान क्यों नहीं लिया? विपक्षी पार्टी ने कहा कि शाह को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिला आरक्षण कानून को जल्द से जल्द लागू किया जाये; अन्यथा उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि महिला पत्रकारों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दर्जनों पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन के बावजूद न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई। प्रियंका ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने यह आरोप भी लगाया है कि पुलिस उनके साथ बहुत अभद्र तरीके से पेश आ रही है।
उन्होंने कहा कि जिस पुलिस का काम सुरक्षा देना है, उससे ही महिलाएं खतरा महसूस कर रही हैं। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि कॉलेज की छात्राओं से लेकर पत्रकारों तक, हर जगह महिलाएं असुरक्षा का सामना कर रही हैं। प्रियंका ने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी जी, अमित शाह जी, क्या महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार उचित है?
अगर नहीं, तो आप इस पर संज्ञान क्यों नहीं लेते?’’ कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि एक बार फिर दिल्ली पुलिस पर एक महिला की गरिमा का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। खेड़ा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमित शाह चुप हैं। ऐसा पहले भी हो चुका है, खासकर छात्र आंदोलनों के दौरान।
उन्होंने कहा कि अगर कोई राह चलता बदमाश महिला के साथ गलत हरकत करे तो उसे उम्मीद रहती है कि पुलिस उसकी मदद करेगी, लेकिन अगर पुलिस पर ही ऐसे आरोप लगें तो महिलाएं न्याय के लिए कहां जाएंगी?’’ उन्होंने कहा, ‘‘महिलाएं इस देश की आधी आबादी हैं। सड़कों से लेकर संसद तक, हर जगह उनका अधिकार है। गृह मंत्री अमित शाह को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाए और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिला आरक्षण कानून को जल्द से जल्द लागू किया जाए ताकि महिलाएं संसद में अपना उचित और समान स्थान प्राप्त कर सकें।’’ खेड़ा ने कहा, ‘‘महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और सत्ता में समान भागीदारी चाहिए।
अगर यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता, तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के लिए इस्तीफा दे देना ही बेहतर होगा। वैसे भी, वे चीजों को संभाल नहीं पा रहे हैं।’’ एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि तीन महिला पत्रकारों ने तीन अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने निष्पक्ष जांच के लिए उनकी शिकायतें अपराध शाखा को भेज दी हैं।
इन महिला पत्रकारों में से एक ने शनिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने कथित तौर पर उसका यौन उत्पीड़न किया। अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कथित घटनाओं को लेकर नयी दिल्ली जिला पुलिस को शिकायतें मिली हैं। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
भारतीय प्रेस परिषद ने प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार पर हैरानी और चिंता जताई तथा दिल्ली पुलिस से शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया।
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