शाह का चंडीगढ़ प्लान, भगवंत मान हैरान, 1 अप्रैल से लागू होंगे केंद्रीय सेवा नियम

शाह का चंडीगढ़ प्लान, भगवंत मान हैरान, 1 अप्रैल से लागू होंगे केंद्रीय सेवा नियम

केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के कर्मचारी वर्तमान में पंजाब सेवा नियमों के तहत काम करते हैं। अमित शाह ने कहा कि केंद्रीय नियमों में बदलाव से उन्हें 'बड़े पैमाने पर' फायदा होगा क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी जाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऐलान ने इन दिनों पंजाब की सियासत और नई नवेली मान सरकार को परेशान कर दिया है। गृहमंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ दौरे में घोषणा की थी कि अब चंडीगढ़ के 23 हजार कर्मचारियों पर सेंट्रल सर्विस रूल्स लागू होंगे। इसका नोटिफिकेशन जल्द हो जाएगा। गृह मंत्री के इस ऐलान के साथ ही आम आदमी पार्टी की तरफ से बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा आम आदमी पार्टी (आप) के ‘‘बढ़ते कदमों’’ से डर गई है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इसे पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 की भावना के खिलाफ बताया है। 

अमित शाह ने क्या ऐलान किया 

केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के कर्मचारी वर्तमान में पंजाब सेवा नियमों के तहत काम करते हैं। अमित शाह ने कहा कि केंद्रीय नियमों में बदलाव से उन्हें "बड़े पैमाने पर" फायदा होगा क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी जाएगी। महिला कर्मचारियों को वर्तमान एक वर्ष के बजाय दो साल का चाइल्डकेयर अवकाश मिलेगा। चंडीगढ़ कर्मचारियों के लिए केंद्रीय सेवा नियम लागू करने की मांग 20-25 साल से लंबित थी।

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आप की आपत्ति

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए दावा किया कि यह (फैसला) पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की भावनाओं के विरुद्ध है। शाह की इस घोषणा पर भाजपा के कुछ विरोधी दलों ने त्वरित प्रतिक्रिया जतायी है। मान ने ट्वीट करके कहा, ‘‘केंद्र सरकार चंडीगढ़ प्रशासन में अन्य राज्यों एवं सेवाओं के अधिकारियों और कर्मियों को चरणबद्ध तरीके से ला रही है। यह पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 की भावना के खिलाफ है। चंडीगढ़ पर अपने अधिकारपूर्ण दावे के लिए पंजाब संघर्ष करेगा। मनीष सिसोदिया ने इस फैसले को लेकर कहा कि जब पंजाब में कांग्रेस का शासन था, तब शाह ने ‘‘चंडीगढ़ की शक्तियां नहीं छीनीं।’’ उन्होंने कहा कि लेकिन जैसे ही पंजाब में ‘आप’ ने सरकार बनाई तो गृह मंत्री ने इस कदम का ऐलान कर दिया, क्योंकि ‘‘भाजपा ‘आप’ के बढ़ते कदमों से डरी हुई है।

राजनीति क्यों होने लगी

पंजाब में पार्टियां अमित शाह की घोषणा को चंडीगढ़ में दिसंबर में हुए नगरपालिका चुनावों के संदर्भ से जोर कर देख रही है, जिसमें भाजपा आप से स्तब्ध थी। चंडीगढ़ को बीजेपी का गढ़ माना जाता है लेकिन दिसंबर में आप ने 14 में से ज्यादातर सीटों पर कब्जा कर लिया था। भाजपा महापौर पद जीतने में सफल रही थी, लेकिन एक वोट को अमान्य घोषित किए जाने के बाद यह एक विवादित निर्णय था। भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों को लुभाने की कोशिश कर रही है, यह महसूस करते हुए कि उसे हाल के विधानसभा परिणामों को देखते हुए मदद की जरूरत है।

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बीजेपी का तर्क

वरिष्ठ नेता और चंडीगढ़ के पूर्व सांसद सत्य पाल जैन ने दावा किया कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों के लिए विभिन्न वेतन आयोगों की सिफारिशों को स्वीकार करने में सक्षम नहीं थी, जबकि केंद्र ने एक बार में यूटी कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांग को स्वीकार कर लिया था। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों को पंजाब की तर्ज पर वेतन, भत्ते आदि मिलते थे, लेकिन केंद्र सरकार की तर्ज पर उन्हें वही मिलेगा, जो उनके लिए ज्यादा फायदेमंद होगा। जैन ने यह भी कहा कि इस फैसले से पंजाब पर कोई असर नहीं पड़ेगा। “जब वे हमारे कर्मचारी हैं, तो घोषणा का पंजाब पर क्या प्रभाव पड़ता है? हम पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ मामले को आगे बढ़ा रहे थे। यह फैसला किसी राज्य के हित के खिलाफ नहीं है।'

पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, चंडीगढ़ 

चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है जो पंजाब व हरियाणा दोनों की राजधानी है और साथ ही केंद्र शासित प्रदेश भी है। 1996 में पंजाब से अलग होकर 1 नवंबर को हरियाणा अलग राज्य बना था। दोनों राज्यों ने चंडीगढ़ को अपनी राजधानी के रूप में दावा किया। पंजाब को यहां की संपत्तियों में 60 फीसदी हिस्सा मिला, जबकि ​हरियाणा को 40 फीसदी हिस्सा हाथ लगा। इसके अलावा, केंद्रशासित प्रदेश के तौर पर यहां केंद्र के पास सीधा नियंत्रण रहा।  शुरुआत में इसके शीर्ष अधिकारी मुख्य आयुक्त थे जिन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट किया, बाद में अधिकारियों को एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेशों) कैडर से लिया गया। 1984 में, पंजाब के राज्यपाल को उस समय शहर का प्रशासक बनाया गया था जब यह क्षेत्र आतंकवाद से जूझ रहा था। अब, 'एडवाइजर टू एडमिनिस्ट्रेटर' का पद एजीएमयूटी-कैडर के आईएएस अधिकारियों को दे दिया गया है। बीजेपी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने अब तक शाह के इस ऐलान पर चुप्पी साध रखी है।

पहले के विवाद

2018 में केंद्र को चंडीगढ़ पुलिस के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पदों को DANIPS (दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन और दीव और दादरा और नगर हवेली) कैडर में विलय करने की अधिसूचना को निलंबित करना पड़ा था। 





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