• दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग रिश्वत मामले के आरोपी की अंतरिम हिरासत जमानत बढ़ायी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2017 में निर्वाचन आयोग रिश्वत मामले में गिरफ्तार किए गए एक व्यक्ति की अंतरिम हिरासत जमानत अवधि को उसकी बीमार मां की चेन्नई में सर्जरी कराने के लिए बृहस्पतिवार को बढ़ा दिया।

नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2017 में निर्वाचन आयोग रिश्वत मामले में गिरफ्तार किए गए एक व्यक्ति की अंतरिम हिरासत जमानत अवधि को उसकी बीमार मां की चेन्नई में सर्जरी कराने के लिए बृहस्पतिवार को बढ़ा दिया। इस मामले में अन्ना द्रमुक नेता टीटीवी दिनाकरण और अन्य लोग कथित तौर पर शामिल थे। न्यायमूर्ति सी. हरी शंकर और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की अवकाशकालीन पीठ ने इस तथ्य के मदेनजर सुकेश चंद्रशेखर की अंतरिम हिरासत जमानत अवधि 12 जुलाई तक बढ़ा दी कि उसकी मां की सर्जरी की तारीख बदलकर अब सात जुलाई कर दी गयी है।

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चंद्रशेखर के वकील ने अदालत को बताया कि सर्जरी 24 जून को होनी थी लेकिन उसकी मां के स्वास्थ्य मापदंड सही नहीं होने के कारण सर्जरी नहीं की जा सकी। अदालत ने उसके वकील की उन दलीलों पर गौर किया कि वह अंतरिम हिरासत जमानत अवधि और बढ़ाने की मांग नहीं करेगा चाहे सर्जरी हो या नहीं हो। पीठ ने कहा, ‘‘अंतरिम हिरासत जमानत उसी शर्तों और परिस्थितियों पर 12 जुलाई तक बढ़ायी जाती है।’’ चंद्रशेखर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और पराग त्रिपाठी ने जमानत अवधि दो हफ्ते के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया था।

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चंद्रशेखर को पहले चार जून को अंतरिम हिरासत जमानत दी गयी थी और इसके बाद 18 जून को इसे दो जुलाई तक इस आधार पर बढ़ाया गया कि आरोपी की मां गंभीर रूप से बीमार है और उसे अस्पताल में भर्ती कराने तथा इलाज कराने की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अवि सिंह ने याचिका का विरोध किया और कहा कि कई पुलिसकर्मियों को सामान्य ड्यूटी के बजाए चेन्नई भेजा गया और चंद्रशेखर अंतरिम हिरासत जमानत पर अपने आचरण के ही कारण है और उसे अंतरिम जमानत के लिए आवेदन देना चाहिए। गौरतलब है कि चंद्रशेखर को 2017 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वह 20 मामलों में आरोपी है, जिनमें से 17 मामलों में उसे जमानत मिल चुकी है वहीं तीन मामलों में वह हिरासत में हैं। पुलिस ने 14 जुलाई 2017 में निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था जिसमें आरोप लगाए गए थे कि पार्टी के लिए ‘दो पत्ती’ का चिह्न पाने के लिए दिनाकरण और चंद्रशेखर ने आयोग के अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रची थी।