1984 Anti Sikh Riot Case: सज्जन कुमार के मामले में कोर्ट का फैसला सुरक्षित, 22 जनवरी को आएगा निर्णय

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अभिनय आकाश । Dec 22 2025 3:57PM

सज्जन कुमार को 2023 में हत्या के आरोपों से बरी कर दिया गया था। जनकपुरी मामला 1 नवंबर, 1984 को दो सिखों, सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित है। दूसरा मामला 2 नवंबर, 1984 को गुरचरण सिंह को जलाने से संबंधित है, जो विकासपुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।

राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के सिख दंगों के एक मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला जनकपुरी और विकासपुरी पुलिस स्टेशनों में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अदालत ने इस मामले पर फैसला सुनाने के लिए 22 जनवरी की तारीख तय की है। सज्जन कुमार को 2023 में हत्या के आरोपों से बरी कर दिया गया था। जनकपुरी मामला 1 नवंबर, 1984 को दो सिखों, सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित है। दूसरा मामला 2 नवंबर, 1984 को गुरचरण सिंह को जलाने से संबंधित है, जो विकासपुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।

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विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने आरोपी सज्जन कुमार के वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) मनीष रावत अभियोजन पक्ष की ओर से पेश हुए। अधिवक्ता अनिल कुमार शर्मा, अपूर्व शर्मा और एस ए हाश्मी सज्जन कुमार की ओर से पेश हुए। अधिवक्ता सुरप्रीत कौर दंगा पीड़ितों की ओर से पेश हुईं। 7 जुलाई को अपना बयान दर्ज कराते समय पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि वे दंगों के स्थल पर मौजूद नहीं थे और उन्हें झूठा फंसाया गया है।

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अदालत ने 23 अगस्त, 2023 को सज्जन कुमार को हत्या के आरोप से बरी कर दिया था। न्यायालय ने सज्जन कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 147 (दंगा करने का दंड), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना), 149 (गैरकानूनी सभा के किसी सदस्य द्वारा उस सभा के सामान्य उद्देश्य की पूर्ति में किया गया अपराध), 153 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 295 (किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को चोट पहुंचाना या अपवित्र करना), 307 (हत्या का प्रयास), 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के लिए दंड), 395 (डकैती का दंड) और 426 (उपद्रव का दंड) आदि के तहत आरोप तय किए थे।

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