CP Radhakrishnan: विभाजन की पीड़ा याद रखना जरूरी ताकि दोबारा न हो ऐसी विभीषिका

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' कार्यक्रम में कहा कि देश की आजादी 1947 में बुजुर्गों द्वारा झेली गई पीड़ा और बलिदानों की बदौलत मिली है। उन्होंने जोर दिया कि इतिहास से सीख लेकर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना सभी नागरिकों का कर्तव्य है। इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह ने भी विभाजन के दौरान जान गंवाने वालों को याद किया।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि विभाजन के दौरान लोगों द्वारा झेले गये कष्टों और बलिदानों को याद रखा जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी ‘‘विभीषिका’’ फिर कभी न दोहराई जाए। उन्होंने देश की एकता और सद्भाव को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलाधिपति राधाकृष्णन ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के मौके पर ‘सेंटर फॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टिशन स्टडीज’ (सीआईपीएस) और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

राधाकृष्णन ने कहा, “यह हमारे स्वतंत्रता दिवस मनाने से ठीक एक दिन पहले की बात है। हमें याद रखना चाहिए कि स्वतंत्रता की खुशी को 1947 में हमारे बुजुर्गों द्वारा झेली गई पीड़ा से कभी अलग नहीं किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विभाजन हमारे देश के इतिहास के सबसे दुखद और अमानवीय अध्यायों में से एक था।’’ उन्होंने कहा कि अतीत को याद करना ‘‘पुराने घावों को कुरेदना’’ नहीं है, बल्कि इतिहास से सीखना और अधिक सद्भाव की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा, ‘‘यह याद रखना जरूरी है कि स्वतंत्रता बिना किसी कीमत, पीड़ा या बलिदान के नहीं मिली।

हमारे बुजुर्गों द्वारा झेली गई पीड़ा ने भारत को स्वतंत्र देश बनाया। इस तरह की विभीषिका दोबारा कभी नहीं होनी चाहिए।’’ उपराष्ट्रपति ने देश की अखंडता की रक्षा करने और उसकी विविधता का सम्मान करने की नागरिकों की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘इस देश की अखंडता को बनाए रखना हम सभी का सर्वोच्च कर्तव्य है।

मेरी मातृमेरे लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं दूसरों की मातृसे नफरत करूं। हमें भारतीय होने पर बहुत गर्व होना चाहिए।’’ दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह ने कहा कि यह दिन उन परिस्थितियों पर विचार करने और उन लोगों को याद करने का मौका है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपनी जान गंवा दी। सिंह ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले देश के कई परिवारों के जीवन में अंधेरा छा गया था।

इसलिए हम इस दिन को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह सवाल पूछने और अपनी गलतियों से सीखने का दिन है।

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