Baramati का 'दादा' खामोश: Plane Crash में अजित पवार का निधन, एक राजनीतिक युग का हुआ दुखद अंत।

Ajit Pawar
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ANI
Ankit Jaiswal । Jan 28 2026 8:45PM

बारामती के दिग्गज नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान हादसे में निधन हो जाने से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। 2023 में एनसीपी विभाजन के बाद स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने वाले अजित पवार की मृत्यु ने महाराष्ट्र में सत्ता के समीकरण और पवार परिवार की राजनीतिक दिशा को अनिश्चित बना दिया है।

आज सुबह महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक सन्न कर देने वाली खबर सामने आई। बारामती, जिसने आठ बार अपने प्रतिनिधि को सत्ता तक पहुंचाया, आज अपने सबसे प्रभावशाली नेता को खो बैठी। मौजूद जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित अनंतराव पवार का बुधवार (28 जनवरी 2026) को एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। वे 66 वर्ष के थे और हादसा उनके गृह क्षेत्र बारामती से जुड़े इलाके में हुआ। 

अजित पवार बारामती से लगातार आठ बार विधायक रहे और पवार परिवार की राजनीति की सबसे मजबूत कड़ी माने जाते थे। उनके अचानक चले जाने से न सिर्फ बारामती बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में गहरा शून्य पैदा हो गया है। वे एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे और सांसद सुप्रिया सुले के चचेरे भाई थे।

अजित पवार ने राजनीति की बारीकियां अपने चाचा शरद पवार से ही सीखीं। लंबे समय तक उनकी राजनीति शरद पवार की छाया में ही देखी गई। हालांकि, 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विभाजन के बाद उन्होंने पहली बार पूरी तरह स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनी। पार्टी के भीतर उत्तराधिकार को लेकर वर्षों से चल रही खामोश खींचतान में उनका सामना शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले से माना जाता रहा। सार्वजनिक रूप से दोनों यह कहते रहे कि राज्य की राजनीति अजित पवार और राष्ट्रीय राजनीति सुप्रिया सुले देखेंगी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह संतुलन हमेशा सवालों में रहा। 

बताया जाता है कि अजित पवार बेहद अनुशासित और सीमित निजी जीवन जीने वाले नेता थे। वे सुबह जल्दी काम शुरू करने के लिए जाने जाते थे और प्रशासन पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। वित्त मंत्री के रूप में ‘माझी लाडकी बहिण योजना’ के क्रियान्वयन को लेकर उन्हें सराहना भी मिली, हालांकि बजट आवंटन को लेकर सहयोगी दलों की नाराजगी भी झेलनी पड़ी।

उनका राजनीतिक जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा। विदर्भ सिंचाई घोटाले में आरोप लगने के बाद 2012 में उन्हें उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। भाजपा ने उस समय उनके खिलाफ बड़े आंदोलन किए थे। हालांकि, 2019 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से उन्हें क्लीन चिट मिली। इसके अलावा महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले और हाल में उनके बेटे पार्थ पवार से जुड़े भूमि विवाद के आरोप भी चर्चा में रहे।

बारामती, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में अजित पवार का राजनीतिक दबदबा माना जाता था। हालांकि भाजपा के बढ़ते प्रभाव से पुणे क्षेत्र में उनका दायरा सीमित हुआ, लेकिन बारामती पर पवार परिवार का नियंत्रण बना रहा। पार्टी के भीतर उपेक्षा को लेकर वे कई बार असंतोष जता चुके थे। 2023 में पार्टी विभाजन के बाद दिए गए उनके भावुक भाषण को उनकी राजनीति का सबसे मानवीय क्षण माना जाता है।

आज उनके आकस्मिक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में खड़ी है। बारामती शोक में डूबी है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर भविष्य की दिशा को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। यह सवाल भी उठने लगे हैं कि पवार परिवार की राजनीति अब किस मोड़ पर जाएगी, लेकिन फिलहाल प्रदेश एक ऐसे नेता को विदाई दे रहा है, जिसने सत्ता, संघर्ष और अनुशासन तीनों को बेहद करीब से जिया है और जिनकी अनुपस्थिति लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

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