कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर फैसला झाबुआ चुनाव के बाद, अब सिंधिया नहीं मीनाक्षी नटराजन आगे

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर फैसला झाबुआ चुनाव के बाद, अब सिंधिया नहीं मीनाक्षी नटराजन आगे

मीनाक्षी नटराजन का नाम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सामने आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमें में निराशा छा गई है। सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष के बनाने के लिए उनके समर्थकों ने जमकर लाबिंग की थी। यही नहीं प्रदेश के चंबल संभाग में तो सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए बैनर पोस्टरों के अलावा होर्डिंग भी लगाए गए थे। लेकिन प्रदेश के दिग्गज नेताओं के बीच सिंधिया के नाम को लेकर एक राय न होने से अभी तक उनके नाम पर सहमति नहीं बन पाई है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर उहपोह की स्थिति बनी हुई है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने नौ माह से अधिक का समय बीत गया है लेकिन अभी तक पार्टी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर फैसला नहीं कर पायी है। वर्तमान में मुख्यमंत्री कमलनाथ ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के तौर पर काम सम्हाल रहे है। वही कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व पार्टी में एक पद एक व्यवस्था पर जोर दे रहा है। लेकिन मध्यप्रदेश के राजनीतिक हालातों को देखते हुए अभी तक आसामंजस्य की स्थिति बनी हुई है। बीच में कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रदेश अध्यक्ष पद पर ताजपोशी को लेकर खूब सियासी ड्रामा हुआ लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद सब शांत हो गया।

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वही अब प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और महासचिव दीपक बाबरिया ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष का फैसला अब झाबुआ उपचुनाव के बाद ही होगा। दीपक बाबरिया की माने तो नई कार्यकारिणी में एक व्यक्ति एक पद पर जोर दिया जाएगा। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही कावायत अब नए सिरे से शुरू होगी। दीपक बाबरिया ने अपने तीन दिन के भोपाल प्रवास के दौरान प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए नेताओं से मुलाकात कर है। जिसमें आदिवासी नेताओं के नाम के अलावा मीनाक्षी नटराजन का नाम भी प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर समाने आया है। मीनाक्षी नटराजन को राहुल गांधी ने अपनी कार्यकारिणी में सचिव बनाया था। वह मध्यप्रदेश के रतलाम से 2014 और 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है। एनएसयूआई और युवक कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रही मीनाक्षी नटराजन युवक कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रही है।

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मीनाक्षी नटराजन का नाम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सामने आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमें में निराशा छा गई है। सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष के बनाने के लिए उनके समर्थकों ने जमकर लाबिंग की थी। यही नहीं प्रदेश के चंबल संभाग में तो सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए बैनर पोस्टरों के अलावा होर्डिंग भी लगाए गए थे। लेकिन प्रदेश के दिग्गज नेताओं के बीच सिंधिया के नाम को लेकर एक राय न होने से अभी तक उनके नाम पर सहमति नहीं बन पाई है। तो दूसरी ओर आदिवासी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर भी गृहमंत्री बाला बच्चन का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है जबकि उमंग सिंघार का दिग्विजय सिंह के खिलाफ बयानबाजी के बाद उनके नाम को लेकर अब पार्टी चर्चा करने को तैयार नहीं है। जबकि मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने सबसे विश्वस्त व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए लाबिंग कर रहे है ताकि प्रदेश में सत्ता के दो केन्द्र न हो। कुल मिलाकर बात की जाए तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर जहाँ मीनाक्षी नटराजन का नाम सिंधिया के बाद सबसे आगे है तो वहीं प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया के बयान के बाद यह तो निश्चित हो गया है कि झाबुआ उपचुनाव के बाद ही मध्यप्रदेश कांग्रेस को अपना नया अध्यक्ष मिलेगा।

 





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