Delhi Master Plan 2047: 100 मंजिल से ऊंची इमारतें बनेंगी, रिहायशी इलाकों में व्यापार की छूट

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केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित मास्टर प्लान दिल्ली-2047 के तहत राष्ट्रीय राजधानी में 100 मंजिल से अधिक ऊंची इमारतों के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि शहर के ज्यादातर हिस्सों में इमारतों की ऊंचाई पर लगी पाबंदियां हटा दी गई हैं और 30 मीटर या उससे चौड़ी सड़कों पर भूतल पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होगी।

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में राष्ट्रीय राजधानी में 100 मंजिल से अधिक ऊंची इमारतों के निर्माण का प्रस्ताव किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को अधिसूचित मास्टर प्लान दिल्ली-2047 के अनुसार, पर्याप्त बुनियादी ढांचे वाले क्षेत्रों में ऊंची इमारतों को बढ़ावा दिया जाएगा, इनमें खास तौर पर बड़े पैमाने के सार्वजनिक परिवहन गलियारों और प्रमुख वाणिज्यिक तथा ‘मिश्रित उपयोग’ वाले केंद्रों के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। ‘मिश्रित उपयोग’ वाले केंद्रों का मतलब है ऐसी जगह जहां अलग-अलग तरह की गतिविधियां एक साथ होती हैं।

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के मुताबिक, ‘‘इनका विकास सघन शहरी विकास को बढ़ावा देने, शहर के अनियंत्रित विस्तार को कम करने और भूमि के प्रभावी उपयोग में मदद करेगा। 100 मंजिल से अधिक ऊंची इमारतों को ऐसी विशिष्ट इमारतों के रूप में विकसित किया जाएगा, जो दिल्ली की पहचान और स्वरूप को मजबूत करेंगी। इनका डिजाइन आसपास के शहरी परिवेश के अनुरूप होगा, सार्वजनिक स्थानों की गुणवत्ता बेहतर करेगा और दिल्ली के विशिष्ट क्षितिज के निर्माण में योगदान देगा।’’ केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मास्टर प्लान में शहर के ज्यादातर हिस्सों में आवासीय और वाणिज्यिक इमारतों की ऊंचाई पर लगी पाबंदियां हटा दी गई हैं।

मास्टर प्लान के अनुसार, प्लॉटेड हाउसिंग, इन-सीटू पुनर्वास, मिश्रित भूमि उपयोग, गोदाम और ग्रुप हाउसिंग क्षेत्रों में विभिन्न श्रेणियों की इमारतों के लिए अधिकतम ऊंचाई निर्धारित नहीं की गई है। इमारतों के नक्शों को संबंधित वैधानिक निकायों से मंजूरी लेनी होगी। यह मंजूरी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा संबंधित भूमि श्रेणी के लिए निर्धारित फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) के आधार पर दी जाएगी।

मास्टर प्लान में 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों के किनारे स्थित रिहायशी इलाकों में भूतल पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है। मौजूदा नियमों के तहत व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति केवल दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा पहले से अधिसूचित ‘मिश्रित उपयोग’ वाली और वाणिज्यिक सड़कों पर ही है। ‘मिश्रित उपयोग’ वाली सड़कों का मतलब है ऐसी सड़कें या सड़क के किनारे के इलाके जहां अलग-अलग तरह की गतिविधियां एक साथ होती हैं।

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