DU Syllabus Change: दिल्ली यूनिवर्सिटी ने PG History से हटाया Delhi Sultanate का पेपर, 22 कोर्स बाहर

दिल्ली विश्वविद्यालय ने पीजी इतिहास के संशोधित पाठ्यक्रम से दिल्ली सल्तनत पर आधारित महत्वपूर्ण पेपर को हटा दिया है, जिससे मध्यकालीन भारतीय इतिहास के शोधपरक अध्ययन की गहराई पर प्रभाव पड़ेगा। यह बदलाव उच्च शिक्षा में विषयों के अकादमिक विश्लेषण और पाठ्यक्रम संरचना की चुनौतियों को रेखांकित करता है। दिल्ली विश्वविद्यालय पीजी सिलेबस दिल्ली सल्तनत मध्यकालीन भारत इतिहास शिक्षा।
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) हिस्ट्री के नए सिलेबस से दिल्ली सल्तनत पर आधारित एक अहम पेपर हटा दिया है। यह पेपर - "दिल्ली सल्तनत: मध्यकालीन उत्तर भारत में सत्ता का ढांचा (13वीं-14वीं सदी)" - तीसरे सेमेस्टर में पढ़ाया जाता था और कई दशकों से मध्यकालीन भारत के मुख्य पेपर्स में से एक रहा है।
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दिल्ली सल्तनत वाले पेपर में क्या पढ़ाया जाता था?
इस पेपर में 13वीं और 14वीं सदी के दौरान उत्तर भारत का इतिहास शामिल था। इसमें मुख्य रूप से ये बातें शामिल थीं:
मध्यकालीन राज्य का गठन कैसे हुआ?
सत्ता और प्रशासन की व्यवस्था कैसी थी?
शासक अपनी राजनीतिक शक्ति का इस्तेमाल कैसे करते थे?
उस दौर के राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में क्या बदलाव आए?
यह पेपर एक सामान्य इतिहास कोर्स है, लेकिन इसमें मध्यकालीन भारत के इतिहास का खास अध्ययन किया जाता है।
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एक्सपर्ट की राय
दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक हिस्ट्री प्रोफेसर के अनुसार, पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) लेवल पर पढ़ाए जाने वाले 'दिल्ली सल्तनत' पेपर की तुलना अंडर-ग्रेजुएट (UG) लेवल पर पढ़ाए जाने वाले 'दिल्ली सल्तनत' पेपर से नहीं की जा सकती।
PG पेपर में किसी खास विषय की गहराई से पढ़ाई होती है, जबकि UG पेपर में भारतीय इतिहास की व्यापक और सामान्य पढ़ाई कराई जाती है। इसी तरह, "History of North India, c. 1400–1550" (उत्तरी भारत का इतिहास, लगभग 1400–1550) नाम का पोस्ट-ग्रेजुएट पेपर उस क्षेत्र के इतिहास की एक खास पढ़ाई थी, जबकि अंडर-ग्रेजुएट लेवल पर इसी विषय को ज़्यादा विस्तार से पढ़ाया जाता है।
MA हिस्ट्री सिलेबस से कई और पेपर हटाए गए
DSE पेपर क्या हैं?
इतिहास विभाग ने तीसरे सेमेस्टर के लिए कुल 38 DSE (डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव) पेपर का प्रस्ताव दिया था। हालाँकि, इनमें से केवल 16 पेपर ही फ़ाइनल नोटिफ़ाइड सिलेबस में शामिल किए गए। दूसरे शब्दों में, प्रस्तावित 38 पेपरों में से 22 पेपर फ़ाइनल सिलेबस में जगह नहीं बना पाए।
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