Facebook और X पर एंटी नेशनल कंटेंट हटाने की मांग खारिज, Supreme Court का दखल से इनकार

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अभिनय आकाश । Sep 23 2026 1:14PM

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया से कथित राष्ट्र-विरोधी सामग्री, मीम्स और भड़काऊ भाषणों को हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को अन्य विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी। याचिका में आरोप था कि ऐसे कंटेंट से सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक PIL पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस PIL में केंद्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट और मीम्स की पहचान करने, उन्हें हटाने और ब्लॉक करने के निर्देश देने की मांग की गई थी, जिन्हें याचिकाकर्ता ने देश-विरोधी नारे और भाषण बताया था। चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने अहमदाबाद के रहने वाले याचिकाकर्ता हितेंद्र कुमार परसोत्तमभाई गाधिया की ओर से पेश वकील बरुण सिन्हा की दलीलों को नहीं माना। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से दूसरे विकल्पों पर विचार करने को कहा। सुनवाई के दौरान, बेंच ने इस याचिका को सोशल मीडिया कंटेंट से जुड़े किसी दूसरे लंबित मामले के साथ जोड़ने से भी इनकार कर दिया। कोर्ट में दी गई दलीलों के मुताबिक, चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत ने याचिकाकर्ता से कहा आप दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। याचिका में केंद्र और कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को उन पोस्ट के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिनके बारे में याचिकाकर्ता का आरोप था कि वे सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था और न्यायिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं। 

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PIL में क्या मांग की गई थी?


याचिकाकर्ता ने कहा कि यह याचिका X Corp, Facebook, YouTube, Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर दिखाए और फैलाए जा रहे उन नारों, भाषणों या बयानों के खिलाफ दायर की गई थी, जिन्हें उन्होंने 'राष्ट्र-विरोधी' बताया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि SMS और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए झूठे मैसेज फैलाने और "CJP" के बैनर तले बेकाबू भीड़ से पैदा हुए सुरक्षा खतरों के कारण राष्ट्रीय राजधानी और कई राज्यों की राजधानियां "बंधक" जैसी स्थिति में आ गई थीं। इसमें यह भी कहा गया कि फेक न्यूज़ और भड़काऊ बयानों व भाषणों के प्रसार से सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा हुआ, जिससे अशांति और अव्यवस्था फैली। 

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याचिका में सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक करने की मांग की गई


याचिकाकर्ता ने 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (अदालत का आदेश) की मांग की, जिसमें प्रतिवादियों को X Corp, YouTube, Facebook, Instagram और WhatsApp पर पब्लिश सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक करने या हटाने का निर्देश देने को कहा गया। याचिका के अनुसार, जिन पोस्ट को हटाने की मांग की गई, वे ऐसी थीं जिनसे जनता को सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय अखंडता और न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ भड़काने और संवैधानिक अधिकारियों के अधिकार को कमजोर करने की आशंका थी।याचिका में ऐसे कंटेंट और मीम्स का भी ज़िक्र किया गया, जिनके बारे में याचिकाकर्ता का आरोप था कि वे राष्ट्र-विरोधी नारों और भाषणों से जुड़े थे।

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