मराठी मानुष बाहर, घुसपैठिए अंदर? क्या MVA ने वोट बैंक के लिए शहर की पहचान दांव पर लगाई?

Mumbai Politics
प्रतिरूप फोटो
CANVA PRO
एकता । Jan 9 2026 12:22PM

मुंबई में चुनावों से पहले महाविकास आघाड़ी पर वोट बैंक के लिए शहर का जनसांख्यिकीय संतुलन बदलने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिसमें अवैध बस्तियों को नियमित कर एक समुदाय विशेष को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है। यह राजनीतिक विवाद मुंबई की मराठी पहचान, सामाजिक ताने-बाने और भविष्य के चुनावी परिणामों पर केंद्रित है।

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इन दिनों राजनीति काफी गर्म है। चुनाव करीब आते ही शहर की आबादी में हो रहे बदलावों पर बहस तेज़ हो गई है। महाविकास आघाड़ी (MVA) पर आरोप लग रहे हैं कि उनकी नीतियों के कारण मुंबई की असली पहचान संकट में है और एक खास समुदाय का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। बेहरामपाड़ा, मालवणी और कुर्ला जैसे इलाकों की अवैध बस्तियां इस विवाद के केंद्र में हैं। विरोधियों का कहना है कि इन बस्तियों को कानूनी दर्जा देना सुधार नहीं, बल्कि वोट बैंक बनाने की एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है।

आबादी का संतुलन और वोट बैंक की राजनीति

जानकारों का मानना है कि किसी भी शहर का विकास वहां की जनसंख्या के हिसाब से तय होता है। आरोप है कि MVA के शासन के दौरान अवैध निर्माणों को नियमित करने की कोशिश की गई, ताकि एक बड़ा वोट बैंक तैयार किया जा सके। आलोचकों का तर्क है कि यह सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि मुंबई के 'जनसांख्यिकीय संतुलन' (Demographic Balance) को बदलने की कोशिश है। अगर ऐसा होता है, तो भविष्य में मुंबई के चुनावी नतीजे पूरी तरह बदल सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: ED vs Mamata Banerjee live update: दिल्ली से लेकर कोलकाता तक TMC का दंगल, निशाने पर BJP

मराठी पहचान और सुरक्षा का सवाल

मुंबई हमेशा से मराठी भाषियों की पहचान से जुड़ी रही है। लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए मराठी लोगों की अनदेखी की जा रही है। बढ़ती महंगाई और महंगे घरों की वजह से मध्यमवर्गीय मराठी परिवार ठाणे, कल्याण और विरार जैसे बाहरी इलाकों में बसने को मजबूर हो गए हैं। वहीं दूसरी ओर, शहर में अवैध घुसपैठियों को पनाह देने और उन्हें राशन या आधार कार्ड जैसे दस्तावेज मुहैया कराने के आरोप लग रहे हैं। विपक्ष इसे 'वोट जिहाद' का नाम दे रहा है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बता रहा है।

तुष्टीकरण और समाज का बंटवारा

मुंबई के महापौर (मेयर) पद के लिए मुस्लिम चेहरे की चर्चा को भी कुछ लोग 'तुष्टीकरण' की राजनीति मान रहे हैं। पिछले कुछ समय में याकूब मेमन की कब्र के सौंदर्याकरण और अजान प्रतियोगिताओं जैसे मुद्दों ने काफी विवाद पैदा किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह एक दोहरा खेल है, एक तरफ हिंदू समाज को जाति और भाषा के नाम पर बांटा जा रहा है, और दूसरी तरफ अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट कर सत्ता हासिल करने की कोशिश हो रही है।

इसे भी पढ़ें: जयराम रमेश का PM Modi पर तंज, US Trade Deal पर पूछा- 'क्या से क्या हो गया बेवफा...'

मुंबई का भविष्य और नागरिकों की जिम्मेदारी

मुंबई सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक धुरी है। यहां की शांति और संस्कृति को बचाए रखना बहुत जरूरी है। महाविकास आघाड़ी पर लगे ये आरोप काफी गंभीर हैं। अब मुंबई के नागरिकों को यह तय करना है कि उन्हें विकास वाली राजनीति चाहिए या ऐसी राजनीति जो शहर की मूल पहचान को ही बदल दे। किसी भी राजनीतिक दल को सत्ता के लिए समाज के ढांचे से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि मुंबई की असली पहचान बचाए रखना ही सबसे बड़ा कर्तव्य है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़