Election Commission पर DK Shivkumar का बड़ा हमला, CEC की गिरफ्तारी और SIR रद्द करने की मांग

Prabhasakshi Image
Prabhasakshi

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान निर्वाचन आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मामले में हस्तक्षेप करने और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की अपील की।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने शनिवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में शामिल होते हुए निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘‘इशारे पर काम कर रहा है’’ व सत्तारूढ़ दल के साथ मिलकर ‘‘वोट चोरी’’ कर रहा है। शिवकुमार ने कांग्रेस की कर्नाटक इकाई की ओर से फ्रीडम पार्क में आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने आयोग को भंग करने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करने, ‘‘अवैध रूप से कराए गए’’ चुनावों को रद्द करने और जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को रोककर इसे नए सिरे से कराने की मांग की।

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने इस दौरान हाथों में तख्तियां लेकर आयोग के खिलाफ नारे लगाकर विरोध जताया। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और वीरप्पा मोइली, कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद, कांग्रेस सचिव गोपीनाथ पलानीअप्पन, मंत्री व विधायक शामिल थे।

कांग्रेस नेताओं ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों व आदेशों पर आपत्ति जताई, जो उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए या उन्हें अलग श्रेणी में रखा गया। शिवकुमार ने आरोप लगाया, “आयोग भाजपा की कठपुतली बन गया है।

गरीब मतदाताओं और प्रशासन की आलोचना करने वालों के नामों को निशाना बनाया जा रहा है। वे भाजपा के साथ मिलकर वोट चोरी में भागीदार बन गए हैं।’’ उन्होंने कहा कि संविधान के तहत आयोग को स्वायत्तता दी गई है लेकिन उसकी शक्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, “ज्ञानेश कुमार मुख्य ‘चुनाव’ आयुक्त नहीं बल्कि मुख्य ‘चयन’ आयुक्त हैं।

लोग इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे। केंद्र को संसद का सत्र बुलाकर इस मुद्दे पर जल्द से जल्द चर्चा करनी चाहिए।” शिवकुमार ने अब तक कराए गए एसआईआर को रद्द करने और मतदाता सूची का नए सिरे से पुनरीक्षण कराए जाने की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आयोग में ‘‘कठपुतलियों’’ की नियुक्ति की है।

मुख्यमंत्री ने हालांकि दावा किया कि अब दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों ने अपनी अंतरात्मा के अनुसार काम किया है और कुमार के फैसलों के खिलाफ ‘‘विद्रोह’’ किया है। उन्होंने कहा, “यह आपके (मोदी के) फैसले के खिलाफ उठ खड़े होने का एक उदाहरण है।” शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक की आबादी करीब सात करोड़ है और 5.54 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं, लेकिन एसआईआर के बाद प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में 4.46 करोड़ नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में विसंगतियों को लेकर 30-40 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम एक मजबूत चुनावी व्यवस्था के लिए लड़ रहे हैं। एसआईआर विरोधी आंदोलन को हर गांव तक ले जाया जाएगा।” यह प्रदर्शन ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर के बाद हुआ। खबर में कहा गया था कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी, जिन्हें उनकी जानकारी के बिना जारी किया गया था।

सिद्धरमैया ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर आयोग स्वतंत्र रूप से काम नहीं करेगा तो लोकतंत्र खुद नहीं बच सकता।

यह लोकतंत्र के अस्तित्व का सवाल है।” सिद्धरमैया ने कहा कि अगर यह साबित हो जाता है कि आयोग के सदस्यों ने संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है तो संविधान संरक्षक के रूप में राष्ट्रपति मुर्मू को हस्तक्षेप करना चाहिए।

All the updates here:

अन्य न्यूज़