Lok Sabha की मौजूदा सीटों पर महिला आरक्षण दे केंद्र: DMK नेता EVKS Elangovan

द्रमुक के वरिष्ठ नेता ईवीकेएस एलंगोवन ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार को लोकसभा में सीट संख्या बढ़ाने का इंतजार किए बिना वर्तमान संख्या के आधार पर ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करना चाहिए। उन्होंने इस प्रक्रिया में हो रही देरी को महिलाओं का अपमान बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया। इसके अलावा द्रमुक नेता ने तमिलनाडु की टीवीके सरकार के 100 दिनों के कार्यकाल और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के प्रशासनिक प्रदर्शन की भी तीखी आलोचना की।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता ईवीकेएस एलंगोवन ने लोकसभा में सीट संख्या बढ़ाकर महिला आरक्षण लागू करने में हो रही देरी को महिलाओं का “अपमान” बताते हुए रविवार को जोर देकर कहा कि केंद्र को सदन में मौजूदा सीट संख्या के आधार पर ही महिला आरक्षण लागू करना चाहिए। उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लोगों को “धोखा देने” का आरोप भी लगाया। द्रमुक नेता ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने पेश किया था और उस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसका विरोध किया था।
एलंगोवन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से बातचीत में तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के नेतृत्व वाली सरकार के पहले 100 दिनों के कार्यकाल के प्रदर्शन की भी आलोचना की। उन्होंने लोकसभा सीट संख्या बढ़ाने के साथ 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जोड़ने के केंद्र के तर्क की आलोचना की। एलंगोवन ने कहा, “उन्हें (केंद्र सरकार को) मौजूदा सीट पर ही महिला आरक्षण लागू करना चाहिए।” उन्होंने सीट संख्या बढ़ाने में हो रही देरी को “महिलाओं का अपमान” बताया।
द्रमुक नेता ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधते हुए टीवीके सरकार के पहले 100 दिनों के कथित खराब प्रशासनिक प्रदर्शन की आलोचना की और इसे “शून्य” बताया। एलंगोवन ने आरोप लगाया कि टीवीके सरकार ने केवल मौजूदा योजनाओं के नाम बदलने का काम किया है। उन्होंने कहा, “उनकी एकमात्र विचारधारा हर तरह से द्रमुक पर हमला करने की है।” एलंगोवन ने मुख्यमंत्री विजय के सरकार के खिलाफ साजिश को नाकाम करने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार के पास पूर्ण बहुमत नहीं है और वह उन दलों पर काफी निर्भर है, जिन्होंने द्रमुक के साथ गठबंधन के तहत चुनाव जीता था।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रहती है, तो ये सहयोगी दल अपना समर्थन वापस ले सकते हैं।
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