Anil Ambani के करीबी Gautam Doshi पर ED का शिकंजा, RCom मनी लॉन्ड्रिंग केस में 5 दिन की कस्टडी

गौतम भाईलाल दोषी पर आरोप है कि वे रिलायंस ADA ग्रुप में काफी अधिकार और कंट्रोल वाले पद पर थे और ग्रुप के फाइनेंशियल, कॉर्पोरेट और ऑफशोर कामकाज से गहराई से जुड़े हुए थे। जांच से पता चला है कि वे रिलायंस ADA ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर में से एक थे, उस दौरान रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के डायरेक्टर थे, उसकी ऑडिट कमेटी के सदस्य थे, ग्रुप की 105 कंपनियों के 161 बैंक अकाउंट्स पर बैंकिंग अधिकार रखते थे, और उन्हें विदेशी फाइनेंसिंग व्यवस्था, FCCB जारी करने, विदेशी बैंक अकाउंट्स और ऑफशोर कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने गौतम भईलाल दोषी को 18 जून तक 5 दिन की ED कस्टडी में भेज दिया। उन्हें रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ़्तार किया गया है। दोषी रिलायंस टेलीकॉम के पूर्व डायरेक्टर हैं। उन्हें सुबह करीब 8 बजे वेकेशन जज के घर पर पेश किया गया। वेकेशन जज गौरव राव ने ईडी और आरोपी के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद गौतम भईलाल दोषी को 5 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया। वे रिलायंस एडीए ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर में से एक थे और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के डायरेक्टर भी थे। आरोपी को जज के सामने पेश करने के बाद, ED ने आरोपी की 14 दिन की कस्टडी रिमांड की मांग करते हुए एक अर्ज़ी दाखिल की।
कोर्ट ने ED की दलीलों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए दोषी की कस्टडी मंज़ूर कर ली। साथ ही, पूरी साज़िश का पता लगाने, फंड का पूरा ट्रेल (लेन-देन का रास्ता) और उसकी रिकवरी का पता लगाने, और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच करने के लिए भी यह ज़रूरी था।
वेकेशन जज ने 13 जून को आदेश दिया, "मैं आरोपी को 5 दिन की ईडी कस्टडी में भेजना सही समझता हूँ। इसलिए, आरोपी को 5 दिन के लिए ED की कस्टडी में भेजा जाता है और उसे अब 18 जून, 2026 को शाम 4:00 बजे या उससे पहले राउज़ एवेन्यू डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, नई दिल्ली में वेकेशन जज के सामने पेश होना होगा। गौतम भाईलाल दोषी पर आरोप है कि वे रिलायंस ADA ग्रुप में काफी अधिकार और कंट्रोल वाले पद पर थे और ग्रुप के फाइनेंशियल, कॉर्पोरेट और ऑफशोर कामकाज से गहराई से जुड़े हुए थे। जांच से पता चला है कि वे रिलायंस ADA ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर में से एक थे, उस दौरान रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के डायरेक्टर थे, उसकी ऑडिट कमेटी के सदस्य थे, ग्रुप की 105 कंपनियों के 161 बैंक अकाउंट्स पर बैंकिंग अधिकार रखते थे, और उन्हें विदेशी फाइनेंसिंग व्यवस्था, FCCB जारी करने, विदेशी बैंक अकाउंट्स और ऑफशोर कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
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कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूत यह साबित करते हैं कि वह उस फाइनेंशियल सिस्टम के मैनेजमेंट, देखरेख और कंट्रोल में सक्रिय रूप से शामिल थे, जिसके ज़रिए देश और विदेश की कंपनियों के बीच फंड जुटाया, भेजा और इस्तेमाल किया गया था। ईडी के अनुसार, मुख्य आरोप यह है कि RCOM, M/s रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और M/s रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड (जिन्हें मिलाकर रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप या RAAG कहा जाता है) ने बैंकों के एक ग्रुप (कंसोर्टियम) से कई बैंकिंग व्यवस्थाओं के ज़रिए गलत जानकारी देकर और धोखा देकर क्रेडिट सुविधाएँ लीं। आगे यह भी आरोप है कि इन सुविधाओं के तहत पैसा मिलने के बाद, बैंक के फंड का गलत इस्तेमाल किया गया। इसके लिए ऐसे ट्रांज़ैक्शन किए गए जो क्रेडिट सुविधाओं की मंज़ूरी की शर्तों और नियमों का उल्लंघन थे। ED ने यह भी आरोप लगाया कि RAAG ने उसी दौरान ऐसे बैंकों से भी क्रेडिट सुविधाएँ लीं जो उस कंसोर्टियम का हिस्सा नहीं थे। इसमें आपस में जुड़े कई ट्रांज़ैक्शन शामिल हैं, क्योंकि कंसोर्टियम बैंकों से ली गई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल उन बैंकों के क्रेडिट का भुगतान करने के लिए भी किया गया जो कंसोर्टियम का हिस्सा नहीं थे।
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आरोप है कि कंसोर्टियम बैंकों और गैर-कंसोर्टियम बैंकों से ली गई कुल बकाया राशि, जो अपराध से हासिल हुई रकम (proceeds of crime) है, लगभग 40,000 करोड़ रुपये है। अब तक की जांच से फंड का ऐसा रास्ता (ट्रेल) पता चला है जिससे यह साफ़ होता है कि RAAG से लोन का पैसा विदेशी रेमिटेंस, विदेशी बैंकों और ऑफशोर कंपनियों में भेजा गया। कुछ बैंकों से लिए गए इस फंड का इस्तेमाल उस मकसद के लिए नहीं किया गया जिसके लिए इसे लिया गया था, बल्कि इसे म्यूचुअल फंड में निवेश किया गया और ग्रुप की कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। इन बातों का ब्यौरा रिमांड की मांग वाली अर्ज़ी में दिया गया है।
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