भोपाल में एमबीबीएस की हिंदी में पढ़ाई शुरू, मंत्री विश्वास सारंग ने दी जानकारी

भोपाल में एमबीबीएस की हिंदी में पढ़ाई शुरू, मंत्री विश्वास सारंग ने दी जानकारी

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मीडिया से चर्चा में कहा कि फाउंडेशन कोर्स में एक विषय मूल्य आधारित जीवन जीना पढ़ाया जाएगा जिसमें उन महापुरुषों के बारे में बताया जाएगा। इन महापुरुषों में वे लोग शामिल किए जाएंगे जिन्होंने समाज के लिए बहुत कुछ किया है।

भोपाल। भोपाल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो गया है। क्लास में सभी टीचर्स को हिंदी भाषा का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल एजुकेशन के फाउंडेशन कोर्स हेडगेवार, दीनदयाल, विवेकानंद, गांधी, भीमराव आंबेडकर व डॉ. अब्दुल कलाम को पढ़ाया जाएगा।

दरअसल चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मीडिया से चर्चा में कहा कि फाउंडेशन कोर्स में एक विषय मूल्य आधारित जीवन जीना पढ़ाया जाएगा जिसमें उन महापुरुषों के बारे में बताया जाएगा। इन महापुरुषों में वे लोग शामिल किए जाएंगे जिन्होंने समाज के लिए बहुत कुछ किया है।

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सारंग ने कहा कि प्रदेश में तो यह हिंदी में शुरू की जा रही है और दूसरे राज्यों में उनकी मातृभाषा में शुरू किया जा सकता है। मेडिकल एजुकेशन की पढ़ाई को हिंदी में शुरू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य होगा। एनाटॉमी, बायो केमिस्ट्री और फिजियोलॉजी विषयों के रूपांतरण के लिए काम शुरू किया जा रहा है जिसके लिए प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों की संबंधित फैकल्टी को रूपांतरण की जिम्मेदारी दी गई है।

मंत्री ने कहा कि हिंदी में पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए कॉपी राइट का पूरा अध्ययन किया गया है और उसका ध्यान रखकर ही पाठ्यक्रम बनाया जाएगा। अगले दो महीने में पाठ्यक्रम बन जाएगा। अभी भोपाल मेडिकल कॉलेज में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हिन्दी लेक्चर के ऑडियो-वीडियो बनाकर यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जिसने इस नवाचार की शुरूआत की। देवनागरी का उपयोग कर विद्यार्थियों को टूल और प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जा रहा है।

सारंग ने कहा कि हिंदी में मेडिकल एजुकेशन में हिंदी में पाठ्यक्रम बनाने में ट्रांसलेशन नहीं बल्कि व्यवहारिक पक्ष को ध्यान में रखा जाएगा। जिससे लर्निंग स्कील को बढ़ाने में मदद हो सके, ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा।





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