SIR को लेकर दिल्ली-महाराष्ट्र में चुनाव आयोग ने लिया बड़ा फैसला, किया ये बदलाव

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अभिनय आकाश । Sep 26 2026 7:46PM

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न को बेहतर बनाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। इसके तहत नोटिस पाने वाले वोटरों के लिए घर-घर जाकर वेरिफिकेशन और ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा दी जाएगी। साथ ही आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे तथा आपत्तियां दर्ज करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है।

भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को बेहतर बनाने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इनमें नोटिस पाने वाले वोटर्स के लिए घर-घर जाकर वेरिफिकेशन, ऑनलाइन सुनवाई का ज़्यादा इस्तेमाल और कमज़ोर वर्गों के लिए खास मदद शामिल है। आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है, जिससे वोटर्स को अपनी चिंताएं बताने या लिस्ट में सुधार की मांग करने के लिए ज़्यादा समय मिल सके। ECI ने एक बयान में कहा संशोधित SIR प्रक्रिया के तहत, जिन वोटर्स को नोटिस मिले हैं क्योंकि उन्हें अनमैप्ड माना गया है या उनमें लॉजिकल कमियां पाई गई हैं। उन्हें आम तौर पर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) या असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) के सामने पेश होने की ज़रूरत नहीं होगी। आयोग ने बताया कि यह फ़ैसला 26 सितंबर, 2026 को हुई बैठक के बाद लिया गया और इसे पूरे आयोग ने मंज़ूरी दी। इसके बजाय, बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) ऐसे वोटरों के घर जाकर ज़रूरी दस्तावेज़ इकट्ठा करेंगे और उन्हें ERO द्वारा विचार किए जाने के लिए ECINET पोर्टल पर अपलोड करेंगे। आयोग ने कहा कि इससे वोटरों को चुनाव कार्यालय जाने की ज़रूरत कम हो जाएगी।

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ECI ने कहा कि सुनवाई सिर्फ़ ERO द्वारा तय किए गए खास मामलों में ही होगी और प्राथमिकता के तौर पर इसे ऑनलाइन किया जाएगा। अगर सुनवाई की ज़रूरत पड़ती है, तो वोटर के परिवार का कोई बालिग सदस्य वोटर की तरफ़ से पेश होने के लिए अधिकृत किया जा सकता है। अधिकारियों को ऑनलाइन सुनवाई के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। ECI ने ज़िला चुनाव अधिकारियों (DEOs) से कहा कि वे स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से ज़रूरी हेल्प डेस्क बनाएँ और स्पेशल कैंप लगाएँ। ये कैंप नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मज़दूरों, आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों, बेघर लोगों और उन अन्य लोगों की मदद के लिए होंगे जिन्हें वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधार करवाने की प्रक्रिया में मुश्किल हो सकती है।

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गोवा में उठाए गए कदमों का ज़िक्र करते हुए ECI ने कहा गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने BLOs को निर्देश दिया है कि वे वोटर लिस्ट से छूटे हुए वोटरों के घर-घर जाकर उनसे फ़ॉर्म भरवाएँ।" आयोग के अनुसार, ऐसे 97 वोटरों में से 81 ने वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने के लिए पहले ही फ़ॉर्म 6 जमा कर दिया है। SIR को कंट्रोल करने वाले कानूनी ढांचे पर, कमीशन ने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए फॉर्म 6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। कमीशन ने कहा, "SIR के दायरे से बाहर की अवधि के लिए, आवेदन 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत प्रोसेस किए जाते रहेंगे। ECI ने अपने ECINET सिस्टम की समीक्षा करने की भी घोषणा की। उसने कहा कि फील्ड अधिकारियों को अभी उनके कानूनी अधिकारों के अनुसार प्लेटफॉर्म का रोल-बेस्ड एक्सेस (भूमिका-आधारित पहुंच) मिला हुआ है।

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