भारत का मजाक उड़ाने वालों से हर नागरिक को सतर्क रहना चाहिए: मोदी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 19, 2019   15:53
भारत का मजाक उड़ाने वालों से हर नागरिक को सतर्क रहना चाहिए: मोदी

मोदी ने कहा कि इतने दशकों बाद ही सही, भारत को एक विश्वस्तरीय ट्रेन मिली है लेकिन इसका मजाक बनाया जाना ठीक नहीं है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि दिल्ली से काशी के बीच चल रही देश में निर्मित पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वन्दे भारत एक्सप्रेस का मजाक उडाना दु:खद है। मोदी ने यहां वाराणसी के लिए 3000 करोड रूपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण करने के बाद कहा, दिल्ली से काशी के बीच चल रही देश में बनी पहली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन वंदे-भारत एक्सप्रेस को कुछ लोगों द्वारा जिस तरह निशाना बनाया जा रहा है, उसका मजाक उड़ाया जा रहा है, यह बहुत दुखद है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय रेल की सूरत और सीरत बदलने वाले अनेक कदम बीते साढे चार वर्ष में उठाये गये और दिल्ली से काशी के बीच चल रही देश में निर्मित पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वन्दे भारत एक्सप्रेस इसका एक बहुत बडा उदाहरण है।

मोदी ने कहा कि इतने दशकों बाद ही सही, भारत को एक विश्वस्तरीय ट्रेन मिली है लेकिन इसका मजाक बनाया जाना ठीक नहीं है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत का मजाक उड़ाने की मानसिकता वाले ऐसे लोगों से देश के हर नागरिक को सतर्क रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा, हमें वन्दे भारत ट्रेन बनाने वाले इंजीनियरों पर गर्व है.. इंजीनियरों और टेक्नीशियनों को अपमानित करना उचित नहीं है। दिन रात देश के लिए काम करने वालों का मजाक उडाना उचित नहीं है। ऐसे लोगों को माफ नहीं किया जा सकता।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे दौर में जब आप सभी राष्ट्रनिर्माण के लिए देश में कुछ नया करने के लिए जी जान से जुटे हैं, उस समय में आपसे यही आग्रह करूंगा कि नकारात्मकता से घिरे इन लोगों की इन हरकतों से निराश होने की जरूरत नहीं है। मैं चेन्नई रेल कोच फैक्टरी के इंजीनियरों, टेक्नीशियनों और हर कर्मचारी से कहूंगा कि भारत को आप सभी पर बहुत गर्व है। मोदी ने कहा, मैं उनकी मेहनत को प्रणाम करता हूं। नमन करता हूं। आप जैसे इंजीनियर और प्रोफेशनल कल भारत में बुलेट ट्रेन भी बनाएंगे और सफलतापूर्वक चलाएंगे भी। रेलवे के सभी इंजीनियरों और कर्मचारियों तथा इससे जुडे़ एक एक श्रमिक के परिश्रम का परिणाम है कि आज रेल पटरियों को बिछाने का काम हो, दोहरीकरण या बिजलीकरण का काम हो, पहले से दो गुनी रफ्तार से हो रहा है।





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