• जंतर-मंतर पर किसानों का हल्ला बोल, 200 लोग 'किसान संसद' लगाएंगे, स्पीकर की होगी नियुक्ति, प्रश्नकाल भी चलेगा

किसान नेता प्रेम सिंह भंगू ने बताया कि हम वहां विस्तार से चर्चा करेंगे, हम स्पीकर भी बनाएंगे, चर्चा होगी और प्रश्नकाल भी होगा। 200 से अधिक किसान नहीं जाएंगे।

नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान जंतर-मंतर पर अपना विरोध प्रदर्शन करेंगे। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर से अन्य किसान नेताओं के साथ सिंघु बॉर्डर के लिए निकल गए हैं। इस दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने बताया कि 200 लोग संसद जाएंगे और वहां किसान संसद लगाएंगे और पंचायत करेंगे। यह सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। जंतर-मंतर पर पंचायत होगी जिसे किसान संसद का नाम दिया गया है।

वहीं, किसान नेता प्रेम सिंह भंगू ने बताया कि हम वहां विस्तार से चर्चा करेंगे, हम स्पीकर भी बनाएंगे, चर्चा होगी और प्रश्नकाल भी होगा। 200 से अधिक किसान नहीं जाएंगे। आपको बता दें कि किसानों ने 26 जनवरी को घटित हुई हिंसा से सीखते हुए किसानों के आई कार्ड तैयार किए हैं। ऐसे में बिना आई कार्ड के किसान संसद की तरफ अपना रुख नहीं कर पाएंगे। 

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किसान नेता मंजीत सिंह राय ने जानकारी दी कि 200 किसान संसद के आगे कृषि क़ानूनों के खिलाफ़ प्रदर्शन के लिए जाएंगे। जंतर मंतर पर हमारी बसें रुकेंगी वहां से हम पैदल जाएंगे। जहां पर भी हमें पुलिस रोकेगी वहीं पर हम अपनी संसद लगाएंगे। जिन किसानों के आईकार्ड बन गए हैं वे आगे जाएंगे। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में किसान नेता ने यह जानकारी दी।

किसानों के आंदोलन को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस के अधिकारी के अधिकारी ने बताया कि किसानों के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर टिकरी बॉर्डर पर प्रतिबंध की व्यवस्था की गई। सिर्फ सिंघु बॉर्डर से आने जाने की अनुमति है। टिकरी बॉर्डर से किसानों के प्रदर्शन से संबंधित आवाजाही की अनुमति नहीं है। बाकी अन्य तरह की आवाजाही पर रोक नहीं है। 

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एक ट्रैक्टर परेड के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद यह पहली बार है जब अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी है। गौरतलब है कि दिल्ली से लगे टिकरी बॉर्डर, सिंघू बॉर्डर तथा गाजीपुर बॉर्डर पर किसान पिछले साल नवम्बर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाए।