• संसद सत्र का पहला दिन: पेगासस मामले पर विपक्ष ने दिखाए तीखे तेवर, सरकार ने कहा- डेटा का जासूसी से कोई संबंध नहीं

विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष के सदस्यों के हंगामे के चलते नये मंत्रियों का परिचय दोनों सदनों में नहीं करवाए जाने से क्षुब्ध प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि विपक्ष की महिला, आदिवासी एवं दलित विरोधी मानसिकता के कारण यह सब किया जा रहे हैं क्योंकि नये बने मंत्रियों में से अधिकतर इन्हीं वर्गों के हैं।

नयी दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की सोमवार को हंगामेदार शुरूआत हुई तथा विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने के मकसद से विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों की बैठक बार बार बाधित हुई। हंगामे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी मंत्रिपरिषद के सदस्यों का परिचय भी नहीं करवा पाए। हंगामे के कारण लोकसभा दो बार और राज्यसभा तीन बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष के सदस्यों के हंगामे के चलते नये मंत्रियों का परिचय दोनों सदनों में नहीं करवाए जाने से क्षुब्ध प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि विपक्ष की महिला, आदिवासी एवं दलित विरोधी मानसिकता के कारण यह सब किया जा रहे हैं क्योंकि नये बने मंत्रियों में से अधिकतर इन्हीं वर्गों के हैं। दोनों सदनों में विपक्षी सदस्य तीन नये कृषि काननों, महंगाई सहित विभिन्न मुद्दों पर नारेबाजी करते दिखे। कुछ विपक्षी सदस्यों ने आसन के समक्ष आकर नारेबाजी भी की। राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि नये मंत्रियों का सदन में परिचय करवाने की परंपरा पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से चली आ रही है और इस परंपरा को तोड़ना लोकतंत्र की परंपराओं को हानि पहुचाना है। लोकसभा में सदन की बैठक शुरू होने पर चार नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ग्रहण किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मंत्रिपरिषद के नये सदस्यों का परिचय कराने के दौरान कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों ने केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों और अन्य विषयों पर हंगामा शुरू कर दिया। इस पर प्रधानमंत्री ने विपक्षी सदस्यों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कुछ लोगों को यह रास नहीं आ रहा है कि दलित, आदिवासी, ओबीसी और महिला मंत्रियों का यहां परिचय कराया जाए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को शांत करते हुए कहा, ‘‘परंपराओं को न तोड़ें। आप लंबे समय तक शासन में रहे हैं। आप परंपरा को तोड़कर सदन की गरिमा को कम नहीं करें।’’ विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने उन पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘मैं सोच रहा था कि सदन में एक उत्साह का वातावरण होगा क्योंकि बड़ी संख्या में हमारी महिला सांसद मंत्री बनी हैं...आज खुशी का माहौल होगा कि आदिवासी साथी बड़ी संख्या में मंत्री बने हैं।’’ उन्होंने कहा कि किसान परिवार और ग्रामीण परिवेश से आने वाले, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समाज से आने वालों को बड़ी संख्या में मंत्रिपरिषद में स्थान मिला है, उनके परिचय में खुशी होनी चाहिए थी। मोदी ने कहा, ‘‘इस बार सदन में हमारे साथी सांसद जो किसान परिवार से हैं, ग्रामीण परिवेश के हैं, सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग से हैं, ओबीसी समाज से हैं, बहुत बड़ी मात्रा में उन्हें मंत्रिपरिपषद में मौका मिला, उनका परिचय करने का आनन्द होता, बेंचों को थपथपा कर उन पर गौरव किया गया होता।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि लेकिन शायद देश के दलित मंत्री बनें, देश की महिला मंत्री बने, देश के ओबीसी मंत्री बनें, देश के किसानों के बेटे मंत्री बनें, ये बात कुछ लोगों को रास नहीं आती है और इसलिए उनका परिचय तक नहीं होने देते हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने अध्यक्ष के सुझाव पर नये मंत्रियों की सूची सदन के पटल पर रख दी। गौरतलब है कि गत सात जुलाई को नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला मंत्रिपरिषद विस्तार हुआ था जिसके तहत 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इनमें 15 कैबिनेट और 28 राज्य मंत्री हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नये मंत्रियों का परिचय कराने के दौरान कांग्रेस सदस्यों के हंगामे को दु:खद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के 40 दिवंगत पूर्व सदस्यों के निधन की जानकारी दी। विपक्ष के हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार किसी भी समय, किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष बताए कि वह किस बात के लिए प्रदर्शन कर रहा है।

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संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पेगासस जासूसी मामले में आई खबरों का खंडन करते हुए सदन में वक्तव्य दिया और इन खबरों को भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का प्रयास बताया। राज्यसभा में सभापति एम वैंकया नायडू ने सबसे पहले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को सदन का नेता बनाए जाने की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने दिवंगत वर्तमान सदस्य रघुनाथ महापात्र एवं राजीव सातव तथा वरिष्ठ अभिनेता दिलीप कुमार और महान धावक मिल्खा सिंह सहित 13 लोगों को पूरे सदन की ओर से श्रद्धांजलि दी। इनमें सदन के 10 पूर्व सदस्य शामिल हैं। वर्तमान सदस्य महापात्र एवं सातव के सम्मान में बैठक को एक घंटे के लिए स्थगित किया गया। नायडू ने कोविड-19 के कारण बनी अनिश्चितता की स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि संसद को देश की जनता को आश्वस्त करने की जरूरत है कि वह उसके साथ खड़ी हुई है। उन्होंने मानसून सत्र प्रारंभ होने के अवसर पर उच्च सदन में अपने संबोधन में कहा कि कोरोना को लेकर देश की वर्तमान स्थिति और लोगों को हुई परेशानियों के मद्देनजर इस सत्र का महत्व बढ़ गया है कि क्योंकि अब तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आपदा और संकट की इस घड़ी में संसद देश की जनता को उसके हाल पर नहीं छोड़ सकती। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में प्रवेश किया। उसके कुछ ही पलों बाद विपक्षी दलों के कुछ सदस्य आसन के निकट पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। विपक्षी सदस्यों को तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ नारेबाजी करते सुना गया। हंगामे के बीच ही सभापति ने प्रधानमंत्री को अपनी मंत्रिपरिषद के नये सदस्यों का परिचय कराने को कहा। हंगामे के कारण प्रधानमंत्री अपनी मंत्रिपरिषद के सदस्यों का परिचय नहीं करा सके और उन्होंने नये मंत्रियों की सूची को सदन के पटल पर रखा। प्रधानमंत्री ने विपक्षी सदस्यों के उस समय किए जा रहे हंगामे की ओर संकेत करते हुए सवाल किया कि यह कौन सी मानसिकता है जिसमें महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, किसानों के बेटों के गौरव का सम्मान नहीं होने दिया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘‘दलित-आदिवासी और महिला विरोधी मानसिकता’’ करार दिया। तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रॉय ने उच्च सदन में नियमों का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी मंत्रिपरिषद के जिन सहयोगियों की सूची आज सदन के पटल पर रखी है ‘‘उनमें एक राज्यमंत्री कथित तौर पर बांग्लादेशी’’ हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में एक नोटिस दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया। सदन के नेता गोयल ने विपक्षी सदस्यों के आरोपों को ‘‘बेबुनियाद’’ करार दिया और इसमें सच्चाई नहीं होने का दावा करते हुए उपसभापति हरिवंश से इसे सदन की कार्यवाही से बाहर निकालने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘जिस प्रकार की बेबुनियाद बातें सदन में रखने की कोशिश की जा रही है, उसकी हम घोर निंदा करते हैं। इसमें सत्यता नहीं है।’’ उन्होंने विपक्षी सदस्यों पर समाज के एक वर्ग विशेष को अपमानित करने का आरोप लगाया और उपसभापति से विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए विषय को कार्यवाही में शामिल नहीं करने का अनुरोध किया। इसके जवाब में हरिवंश ने कहा, ‘‘इसका परीक्षण किया जाएगा।’’? उच्च सदन में हंगामे के बीच ही उपसभापति ने नौचालन में सामुद्रिक सहायता विधेयक पर चर्चा शुरू करायी। किंतु विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण विधेयक पर चर्चा पूरी नहीं हो सकी तथा उपसभापति ने कुछ समय बाद बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।