BRICS Summit के New Delhi Declaration पर बनी सहमति, विदेशी पत्रकारों ने बताया बड़ी उपलब्धि

BRICS Summit के New Delhi Declaration पर बनी सहमति, विदेशी पत्रकारों ने बताया बड़ी उपलब्धि
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भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है। भारत मंडपम में मौजूद चीन, मिस्र और इंडोनेशिया के पत्रकारों ने पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक शासन पर बनी इस आम सहमति की सराहना की।

(कुणाल दत्त) नयी दिल्ली, 13 सितंबर चीन के एक वैश्विक टेलीविजन नेटवर्क से लेकर इंडोनेशिया के एक समाचार पोर्टल तक, भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को कवर कर रहे कई विदेशी पत्रकारों ने नयी दिल्ली घोषणापत्र पर बनी आम सहमति का स्वागत किया। कुछ ने इसे ‘‘बड़ी उपलब्धि” बताया, जबकि अन्य ने इसे ‘‘अच्छा कदम” करार दिया। भारत 12-13 सितंबर को मध्य दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।

इसमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों ने शिरकत की है। चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, कजाकिस्तान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और मिस्र समेत कई देशों के बड़ी संख्या में पत्रकार भारत मंडपम परिसर में आयोजित इस शिखर सम्मेलन को कवर करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं। अखबारों और टीवी चैनलों के लिए अपनी खबरें भेजने की व्यस्तता के बीच, इन पत्रकारों में से कुछ ने ‘पीटीआई-भाषा’ से भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को कवर करने के अपने अनुभव और नयी दिल्ली घोषणापत्र पर अपने विचार साझा किए।

भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में ब्रिक्स समूह ने शनिवार को आम सहमति से एक साझा घोषणापत्र को अपनाया। यह सहमति पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर यूएई और ईरान के बीच गहरे मतभेदों को दूर करने के बाद बनी। घोषणापत्र में ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिका का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया।

पत्रकार हुआंग यूए बीजिंग मुख्यालय वाले चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क (सीजीटीएन) की 12 सदस्यीय टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने शिखर सम्मेलन पर करीबी नजर रखी है, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शामिल हुए। शी ने इससे पहले 2019 में भारत की यात्रा की थी।

उन्होंने शिखर सम्मेलन स्थल पर बनाए गए अंतरराष्ट्रीय मीडिया केंद्र में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “नयी दिल्ली घोषणापत्र काफी लंबा है। मेरे नजरिए से इसके तीन प्रमुख पहलू हैं। पहला है वैश्विक शासन।

ब्रिक्स के साझेदार देश ‘ग्लोबल साउथ’ की प्रमुख आवाज हैं। इसलिए ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के लिए मिलकर काम करना और विकासशील देशों के विकास में योगदान देना महत्वपूर्ण है, खासकर मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में।” चीनी पत्रकार ने कहा कि दूसरा प्रमुख पहलू शांति को बढ़ावा देना है। घोषणापत्र में ब्रिक्स नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चिंता जताई है और ‘‘संबंधित पक्षों से संयम बरतने का आह्वान’’ किया है।

उन्होंने कहा कि नेताओं ने इन संघर्षों के समाधान के लिए संवाद को बढ़ावा देने और कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल करने की बात कही है। हुआंग ने कहा कि तीसरा प्रमुख पहलू ‘‘व्यावहारिक सहयोग’’ है। उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘‘दुनिया के कुछ हिस्सों में अशांति के बावजूद’’ ब्रिक्स देश एनडीबी के सहयोग से विकासशील देशों को वित्त मुहैया करा रहे हैं।

शिखर सम्मेलन से इतर शनिवार शाम राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि नयी दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंध और अधिक मजबूत होंगे।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को राष्ट्रपति शी चिनफिंग से कहा कि सीमा पर शांति और सौहार्द भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए ‘‘आवश्यक’’ आधार बना हुआ है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में ‘‘लगातार हो रही प्रगति’’ का भी स्वागत किया। मिस्र की पत्रकार अमीना जकी ने घोषणापत्र को ‘‘बड़ी सफलता’’ करार दिया और कहा कि सभी सदस्य देश आम सहमति बनाने में सफल रहे।

जकी ‘अल दस्तूर’ अखबार में विदेश मामलों पर लिखती हैं। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) एक ही मेज पर थे और ऐसे में आम सहमति बनना काफी महत्वपूर्ण है। जकी ने कहा, ‘‘इसके अलावा, संदेश बिल्कुल स्पष्ट था—ब्रिक्स नेताओं ने बिना किसी दोहरे मापदंड के हर तरह के आतंकवाद को खारिज किया।’’ इंडोनेशिया के पत्रकार फहारी जुल्फिकार भी एक समाचार पोर्टल के लिए शिखर सम्मेलन को कवर करने के लिए नयी दिल्ली में हैं।

जुल्फिकार ने कहा, “आम सहमति से तैयार किया गया घोषणापत्र एक अच्छा कदम है। इसमें पश्चिम एशिया के संघर्ष और एकतरफा प्रतिबंधों समेत कई अहम मुद्दों का जिक्र किया गया है। हालांकि, मुझे लगता है कि इसमें कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया गया है, लेकिन फिर भी यह एक अच्छा कदम है।’’ योग्याकार्ता के निवासी जुल्फिकार ने जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान इस क्षेत्र के दौरे को भी याद किया।

उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में किसी समय इंडोनेशिया भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। सन मीडिया कॉरपोरेशन में कार्यरत मलेशिया की पत्रकार अजुरा अबास ने नयी दिल्ली घोषणापत्र को “काफी व्यापक” दस्तावेज बताया, जिसमें “कई क्षेत्रों” को शामिल किया गया है।

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